September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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चीन की चालाकी पर है अमेरिका की नजर,सैन्य खतरों को देखते हुए एशिया में भेजेगा सेना, भारत के साथ खूनी टकराव को बताया सबूत

वॉशिंगटन। चीन की एशिया में बढ़ती दादागीरी के खिलाफ अमेरिका कड़ा रूख अपनाने जा रहा है। अमेरिका ने यूरोप से अपनी सेना हटाकर एशिया में तैनात करने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत वो जर्मनी से करने जा रहा है।

माना जा रहा है कि अमेरिका जर्मनी में तैनात 52 हजार अमेरिकी सैनिकों में से 9,500 सैनिकों को एशिया में तैनात करेगा। अमेरिका यह कदम ऐसे समय उठा रहा है कि जब चीन ने भारत में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है, तो दूसरी ओर वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपीन और साउथ चाइना सी में खतरा बना हुआ है।

US military

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कहा है कि भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए खतरा उत्पन्न कर रहे चीन के कारण उनका देश यूरोप से अपनी सेनाएं कम करके अन्य जगहों पर तैनात कर रहा है। पोंपियो ने ब्रसेल्स फोरम में अपने एक वर्चुअल संबोधन के दौरान एक सवाल के जवाब में यह बात कही। पोंपियो की टिप्पणी भारत और चीन के बीच जारी तनाव के संदर्भ में बेहद अहम है।

भारत के साथ खूनी टकराव सबूत
चीन के खतरे के बारे में बोलते हुए, उन्होंने भारत के साथ सीमा पर खूनी टकराव का हवाला देते हुए कहा ‘यह बीजिंग की दक्षिण चीन सागर गतिविधि और उसकी शिकारी आर्थिक नीतियों का सबूत है।’ माइक पोंपियो साथ ही कहा कि मैंने इस महीने यूरोपियन यूनियन के विदेश मंत्रियों से बात की और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बारे में बहुत सा फीडबैक मिला। कई तथ्य सामने आए हैं, जिसमें भारत के साथ लद्दाख में घातक झड़प, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने उकसावे वाले कार्रवाई की बात थी। इसमें दक्षिण चीन सागर में उसकी आक्रामता,और शांतिपूर्ण पड़ोसियों के खिलाफ खतरे का जिक्र किया गया था।

पोम्पियो ने उल्लेख किया कि ट्रंप प्रशासन ने दो साल पहले अमेरिकी सेना की एक लंबी बहुप्रतीक्षित रणनीतिक स्थिति की समीक्षा की थी। अमेरिका ने अपने सामने आने वाले खतरों के बारे में एक बुनियादी रणनीति बनाई थी कि उसे अपने संसाधनों को कैसे आवंटित करना चाहिए, जिसमें खुफिया और सैन्य और साइबर संसाधन शामिल हैं।

पोंपियो से पूछा गया था कि जर्मनी से अमेरिका ने अपनी सेनाएं क्यों कम कर दी हैं। उनका जवाब था-क्योंकि उन्हें अन्य जगहों में भेजा जा रहा है। उन्‍होंने चीन को भारत और दक्षिणपूर्व एशिया के लिए खतरा बताया है। माइक पोंपियो से सवाल किया गया था कि जर्मनी में अमेरिकी सेना की टुकड़ी को क्यों घटा दिया गया। माइक ने कहा कि वहां से हटाकर सेना को दूसरी जगह तैनात किया जा रहा है।

US military

इससे पहले माइक पोंपियो ने बताया था कि उन्होंने यूरोपियन यूनियन के विदेश नीति के प्रमुख जोसेप बोरेल से चीन को लेकर बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार किया है। इसके लिए वह जल्द ही यूरोप जाने वाले हैं। पोंपियो ने कहा कि सिर्फ अमेरिका ही नहीं है जो चीन का सामना कर रहा है, पूरी दुनिया चीन का सामना कर रही है।

इससे पहले पोम्पियो ने कहा कि दुनियाभर में चीन की टेक्नोलॉजी कंपनियों की लहर खत्म हो रही है। दुनिया की कई टेलीकॉम कंपनियां चीनी कंपनी हुवेई के साथ कारोबार करने से इनकार कर रही हैं। इस दौरान उन्होंने मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि स्पेन के टेलीफोनिका, ऑरेंज, ओ 2, जियो, बेल कनाडा, टेलस, और रोजर्स जैसी कंपनियां साफ-सुथरा व्यापार कर रही हैं।

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