June 17, 2021

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देश में नई शिक्षा नीति लागू, जानिए क्या है नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

New education policy 2020 in hindi, वृतांत - Vritaant

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा से जुड़े कई बड़े बदलावों के बारे में जानकारी दी गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तहत कैबिनेट ने 21वीं सदी के लिए एक नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी है। 34 साल से शिक्षा नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ था। नई शिक्षा नीति की औपचारिक घोषणा केंद्रीय मंत्रियों प्रकाश जावड़ेकर और डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने संयुक्त रूप से की। घोषणा के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई है। नया अकादमिक सत्र सितंबर-अक्टूबर में शुरू होने जा रहा है और सरकार का प्रयास पॉलिसी को इससे पहले लागू करने का है। इसके साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है।

विभिन्न लैंग्वेज कोर्स
नई शिक्षा नीति के अनुसार भाषा के विकल्प को बढ़ा दिया गया है। ऐसा माना जाता है कि विद्यार्थी 2 से 8 वर्ष की उम्र में जल्दी भाषाएं सीख जाते हैं। इसीलिए उन्हें स्थानीय भाषा के साथ-साथ तीन अलग भाषाओं में शिक्षा देने का प्रावधान भी रखा गया है नई शिक्षा नीति में छात्रों को कक्षा कक्षा छह से आठवीं के बीच कम से कम दो साल का लैंग्वेज कोर्स भी प्रस्तावित है। इसी के साथ विद्यार्थियों के शारीरिक विकास के लिए पढ़ाई के साथ फिजिकल एजुकेशन को भी जरूरी बनाने का नियम रखा गया है।

नया पाठ्यक्रम
नई शिक्षा नीति में सरकार ने छात्रों के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार करने का भी प्रस्ताव रखा है। 6-9 वर्ष के जो बच्चे आमतौर पर 1-3 क्लास में होते हैं उनके लिए नेशनल मिशन शुरू किया जाएगा ताकि बच्चे बुनियादी साक्षरता और न्यूमरेसी को समझ सकें। स्कूली शिक्षा के लिए खास करिकुलर 5+3+3+4 लागू किया गया है। इसके तहत 3-6 साल का बच्चा एक ही तरीके से पढ़ाई करेगा ताकि उसकी फाउंडेशन लिटरेसी और न्यमरेसी को बढ़ाया जा सके। इसके बाद मिडिल स्कूल याना 6-8 कक्षा में सब्जेक्ट का इंट्रोडक्शन कराया जाएगा। फिजिक्स के साथ फैशन की पढ़ाई करने की भी इजाजत होगी। कक्षा 6 से ही बच्चों को कोडिंग सिखाई जाएगी।

रिपोर्ट कार्ड भी होगा खास
नई शिक्षा नीति के अनुसार बच्चों का रिपोर्ट कार्ड भी नये किस्म से तैयार किया जा सकता है। रिपोर्ट कार्ड में तीन लोग बच्चे का असेसमेंट करेंगे। एक, खुद बच्चा अपना असेसमेंट करेगा, दूसरा उसका सहपाठी करेगा और तीसरे टीचर उसका असेस्टमेंट करेंगे। बच्चे को कौन सी स्किल सिखाई जानी चाहिए, वो रिपोर्ट कार्ड में लिखा जाएगा। पैरेंट्स से बच्चे के स्किल्स और काबिलियत के बारे में बात की जाएगी। इस नए तरह के रिपोर्ट कार्ड के उद्देश्य के बारे में बताया गया कि 12वीं कक्षा से पास होकर जब बच्चा निकलेगा तो रिपोर्ट कार्ड में लिखा होगा कि उसने क्या क्या हासिल किया है और कौन-कौन से स्किल्स सीखे हैं।

रिसर्च में किया गया बदलाव
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि जो रिसर्च में जाना चाहते हैं उनके लिए 4 साल का डिग्री प्रोग्राम होगा। जबकि जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे। लेकिन जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद पीएचडी कर सकते हैं। इसके लिए एमफिल की जरूरत नहीं होगी।