June 25, 2021

वृतांत – Vritaant

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पायलट गुट के 19 विधायकों को स्पीकर का नोटिस, अब कौन पड़ेगा किस पर भारी

Sachin Pilot got notice, वृतांत - Vritaant

जयपुर।  सचिन पायलट सहित 19 बागी कांग्रेस विधायक और साथी मंत्रियों को पदमुक्त करने के बाद कांग्रेस ने पार्टी से उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए राजस्थान विधानसभा के स्पीकर सीपी जोशी को अनुरोध किया था जिस पर संज्ञान लेकर स्पीकर सीपी जोशी ने इन सभी को नोटिस थमा दिया है। अब पायलट और मुख्यमंत्री गहलोत के बीच इस आर-पार की लड़ाई में यह देखना दिलचस्प रहेगा कि अगर पायलट गुट के इन 19 सदस्यों की सदस्यता रद्द होती है तो विधानसभा के इस संख्याबल के खेल में गहलोत अपनी सरकार को कैसे बचा पायेंगे?

किसके पास कितनी सीटें – भौगोलिक दृष्टी से देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान की विधानसभा में सीटों की कुल संख्या 200 है जिसमें 2018 के चुनावों में कांग्रेस के खाते में 100 सीटें आई और बाद में हुए उपचुनाव में 1 सीट और जीतकर कांग्रेस ने 101 सीटें अपने कब्जे में ले ली और बहुजन समाजवादी पार्टी के 6 विधायको का समर्थन प्राप्त कर वर्तमान में कांग्रेस के पास 107 सीटें है लेकिन पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की बगावत से पायलट खेमे की 19 सीटों को अगर हटा दिया जाये तो वर्तमान कांग्रेस सरकार 88 सीटों पर आकर रूक गई है। इस तरह 200 में से अगर ये 19 सीटें अयोग्य कर दी जाये तो विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 181 रह जाती है और गहलोत सरकार को बहुमत सिद्घ करने के लिये 91 सीटों की आवश्यकता पड़ेगी। लेकिन इस समीकरण के बावजूद भी गहलोत 200 सीटों की इस विधानसभा में 109 सीटों के साथ बहुमत होने का दावा कर रहे हैं जबकि हकीकत तो यह है कि अब 19 विधायक कम होने के बाद 13 निर्दलीय विधायक और अन्य छोटी पार्टियों पर गहलोत की निर्भरता ज्यादा हो गई है।

निर्दलीय और अन्य पार्टियों के विधायक – बीटीपी और सीपीएम के २- विधायकों का समर्थन किसे मिलता है, इस पर अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है क्योंकि बीटीपी के एक विधायक ने हाल ही में विडियो के माध्यम से उन्हें बंधक बनाने का आरोप लगाया है और सीपीएम के भी 2 नेताओं को राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने पर पार्टी ने सस्पेंड कर दिया था।

भाजपा की स्थिति – आरएलपी के 3 और खुद के 72 विधायको को मिलाकर वर्तमान में भाजपा के पास 75 सीटें हैं। कांग्रेस के 19 बागी विधायकों को 17 जुलाई तक स्पीकर के नोटिस का जवाब देना है और यदि वे कोर्ट जाते हैं व कोर्ट द्वारा उनको निरस्त करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी जाती है तो गहलोत सरकार पूर्णतया 13 निर्दलीय व अन्य छोटी पार्टियों पर निर्भर हो जायेगी।

अब देखना यह शेष है कि राजस्थान की इस राजनीतिक वजूद की लड़ाई में ऊंट किस ओर करवट लेके बैठता है!

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