July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

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Detail Study on Rafale : राफाल के आने से क्यों टीस चुभी भारतीय पडोसी देशों के?

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Detail Study on Rafale : 29 जुलाई 2020 को आखिर राफाल भारत आ गए, कोरोना महामारी और कुछ अन्य कारणों से कुछ महीनों की देरी हुई पर आखिरकार 5 राफाल भारत लैंड हो ही गए, परन्तु साथ ही लैंड हुए विवाद भी। जी नहीं हम कीमत की बात नहीं कर रहे हैं। ये तो हैं कुछ विदेशी दावे और आलोचनाएं, जो की होनी ही थी। क्योंकि 114 मीडियम मल्टीरोल लड़ाकू विमानों के नए टेंडर जिसे MMRCA 2.0 के नाम से जानते है, का सबसे प्रबल दावेदार भी राफाल ही है। वैसे तो क्रिटिसिज़्म हर जगह से आ रही है  पर इनमें से अधिकतर हमारे पडोसी ही हैं जिनसे अक्सर हमें सैन्य चुनौतियाँ मिलती रही हैं, और वो हैं चीन तथा पाकिस्तान। कुछ रशियन विशेषज्ञों ने भी राफाल को रुसी जेट्स से कमतर बयाया है। हम आज MMRCA 2.0 के प्रतियोगियों की तुलना नहीं करेंगे क्योंकि इनमें फ़िलहाल नए दावेदारों के नाम पर सिर्फ F-15 EX ही एक नया नाम है। जहाँ तक विवादों, दावों और बहस की बात है तो इन सभी दावों में कितना दम है ये आपको आगे पता चल ही जायेगा।

भारतीय राफालों का सामना किसी युद्ध अथवा वायुसेना के किसी मिशन में जिन विमानों से हो सकता है उसमें भारत के दोनों पड़ोसियों चीन तथा पाकिस्तान के विमान सर्वाधिक हैं, क्योंकि भारत का टकराव इन्ही दो देशों से होता आया है। और लड़ाई में राफाल के सामने आने वाले विमानों की सूची बड़ी लम्बी है। परन्तु हम केवल उन्ही विमानों के बारे में जानेंगे जिनसे राफाल का सामना होना तय है तथा जो वाकई राफाल से टक्कर लेने योग्य हैं। ये सूची कुछ इस प्रकार है:-

 पाकिस्तानचीन
1F16Chengdu J-7 (लाइसेंस्ड वैरिएंट MiG-21)
2JF17 थंडरSukhoi Su-30MKK
3Chengdu J-7Shenyang J-16 (लाइसेंस्ड वैरिएंट Su-30)
4Mirage IIIShenyang J-8
5Mirage 5Chengdu J-10
6Shenyang J-11 (लाइसेंस्ड वैरिएंट Su-27 – 10 के आर्डर दिए गए हैं)
7Sukhoi Su-35
8Chengdu J-20

आज इस अत्याधुनिक तकनीक के ज़माने में डॉगफाइट नहीं होती जहाँ लड़ाई का दायरा 1-2 किमी होता हैं और विमान की ऑटोकैनन तथा शार्ट रेंज मिसाइलें दाग के शत्रु के विमान मार गिरते हैं, क्योंकि विमानों के राडार शत्रु को 120-150 किमी पहले ही पकड़ लेते हैं। और अपनी मिसाइलों से उन्हें अपना निशाना बनाते हैं, जिनकी रेंज भी 80-120 किमी होती है। ये BVR(बियॉन्ड विसुअल रेंज) मिसाइल्स कहलाती हैं। आज का सारा खेल “Look First & Shoot First ” का है, अर्थात शत्रु को पहले देखो और पहले ख़त्म करो।

इसलिए किसी विमान की ज्यादा फ्यूल ले जाने की क्षमता, रफ़्तार, ज्यादा ऊंचाई तक पहुँचने की क्षमता जैसी की रूसी जेट्स में है, तब भी कोई गेम चेंजिंग एडवांटेज नहीं दिला पाती।

एक ये भी बात सोशल मीडिया में खास तौर से पाकिस्तान में उछाली गई की भारत को पुराने विमान दिए जा रहे हैं क्योंकि एक तस्वीर में RB-003 नंबर के प्लेन का पेंट उड़ा हुआ था। असल में हमारे पायलट्स इस विमान पर 1 साल से प्रैक्टिस कर रहे थे और इस दौरान उन्होंने इसे कई घंटे उड़ाया है, साथ ही टेस्टिंग के दौरान फ्रेंच पायलट्स ने भी इसे काफी उड़ाया होगा। तो पेंट हटना कोई बड़ा इशू नहीं है। वैसे भी भारतीय सेना पाकिस्तान की भाँती न तो सेकंड हैंड हवाईजहाज खरीदती है न ही दान में दिया जेट उड़ाती है।

चलिए जानते हैं की किन-किन विमानों से राफाल का सामना संभव है और उनमें कितना दम है:-

यहाँ हम पाकिस्तान के दो विमानों को शामिल नहीं कर रहे हैं क्योंकि ये अटैक एयरक्राफ्ट्स हैं जिन्हें क्लोज एयर सपोर्ट तथा ग्राउंड अटैक के लिए इस्तेमाल होते हैं जो की हैं-

(1)Mirage-5 (2)Mirage-III
Mirage-III विमान इंटरसेप्टर है, पर बेहद ही पुराना होने के कारण Mirage-5 की ही तरह रेस से बाहर है और ये एक तरह से संख्या को बढ़ने का ही काम करते हैं।

वो विमान जिनका सामना राफाल से होना तय है अथवा संभावना है वो इस प्रकार है-

(1)F-16:-

फिलहाल इसके 3 प्रकार के मॉडल पाकिस्तान के पास हैं।

(A)F-16AM/BM ब्लॉक 15 MLU(मिड लाइफ अपग्रेड 1991-1997):-

इस दौर में पाकिस्तान चिली और जॉर्डन ने ये विमान ख़रीदे जो डच और बेल्जियम के सरप्लस थे (सरप्लस अर्थात मिलिटरी सरप्लस, वो सामान जिसकी कोई आवश्यकता नहीं बची और अब उसे या तो बेच दिया जाता है या डिस्पोज़ कर दिया जाता है, और जो इन्वेंटरी में केवल बढे हुए नंबर दिखाने के काम आता है।)

(B)F-16A/B ADF (एयर डिफेंस फाइटर):-

ये मॉडल ख़ास तौर से एयर डिफेन्स के तौर पर अमेरिकी एयर नेशनल गार्ड्स के लिए अपग्रेड किये गए थे लगभग 1989 में।

(C)F-16C/D Block 52+ वैरिएंट्स:-

ये फिलहाल सबसे उन्नत मॉडल है पाकिस्तान की वायुसेना में। (यहाँ B तथा D वेरिएंट ट्विन सीटर हैं ट्रेनिंग के लिए।)

F-16 के इंजन 2 कंपनियों द्वारा बनाये जाते हैं।

General Electric F110-GE-129 afterburning turbofan (Block 50) तथा

Pratt & Whitney F100-PW-229 afterburning turbofan (Block 52)

F-16 को विश्व में वही दर्जा प्राप्त है जो की रशियन असाल्ट राइफल AK-47 को प्राप्त है, भरोसे का दूसरा नाम। ये विमान अपने जन्म से अब तक अनेकों अपडेट और अपग्रेड प्रोग्राम्स से गुजरा है इसलिए डॉगफाइट में ये विमान भले ही (पाकिस्तानी मॉडल हो या अन्य) कुछ कमजोर हो परन्तु ये बैटल प्रूवन और बैटल हार्डन है, और नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि इसका वेपन पैकेज ताकतवर है। मगर आज के भारतीय राफाल के सामने ये सेकंड हैंड विमान अपने पुराने वेपन पैकेज के साथ टिक पाएंगे इसमें खुद पाकिस्तान को भी शक है, क्योंकि वैसे तो कोई भी पाकिस्तानी एक्सपर्ट इसको खुले तौर पर स्वीकारेगा नहीं, पर अच्छे से जानता और समझता है की राफाल का तोड़ पाकिस्तान की इन्वेंटरी में नहीं है।

(2) JF17 थंडर:-

ये विमान वर्तमान स्थिति में पाकिस्तान का मुख्य विमान है। ये चीन ने बनाया है परन्तु खुद चीन ही इसे इस्तेमाल नहीं करता।

ये रशियन डिज़ाइन पर आधारित है जिसे रूस ने ही रिजेक्ट कर दिया, फिर बाद में चीन ने खरीद कर कुछ बदलाव करके इसे विकसित किया। फिलहाल अब इसका उत्पादन चीन और पाकिस्तान मिल कर करते हैं। इसमें चीनी मिसाइलें लगती हैं जो अमेरिकी और यूरोपियन मिसाइलों जितनी अचूक और भरोसेमंद नहीं है।

(3)Chengdu J-7:-

ये विमान भी चीन ने बनाया है और इसे दोनों इस्तेमाल करते हैं परन्तु ख़ास ये है की ये MiG 21 की नक़ल है। मगर इतना भी दमदार नहीं जितना ओरिजनल मिग है।

ये विमान केवल इंटरसेप्ट और एरिया पॉइंट डिफेन्स के काम में आते हैं। और दुश्मन के विमानों को तब तक रोकने की कोशिश करते हैं जब तक सहयोगी दमदार एयर सुपीरियर्टी विमान आ कर मोर्चा न संभाल ले। क्योंकि ये उतने दमदार और मेनुवरेबल नहीं होते की डॉगफाइट में ज्यादा टिक पाएं। चीन के पास लगभग 388 विमान हैं।

(4) Sukhoi Su-30MKK और Shenyang J-16:-

Shenyang J-16 विमान Su-30 का hi लाइसेंस्ड वैरिएंट है अर्थात दोनों एक ही विमान हैं, परन्तु J-16 उतना शक्तिशाली नहीं जितना सुखोई है। सुखोई का ये MKK मॉडल एयर सुपीरियरिटी रोल का ट्विन सीटर विमान है, जो हमारे Su30-MKI के लगभग बराबर ही है। अंततः यहाँ चीनी मॉडल के मुकाबले रुसी सुखोई से सावधान रहना ज्यादा आवश्यक है।

(5)Shenyang J-8:-

ये भी Chengdu J-7 के सामान ही सिंगल सीटर इंटरसेप्टर विमान है जिसका निर्माण इसीलिए किया गया क्योंकि उस समय J-7 अमेरिकी बॉम्बर और स्पाई विमानों को इंटरसेप्ट करने की काबिलियत नहीं रखता था। इनकी संख्या लगभग 96 है इस से आप समझ सकते हैं की 2 इंजन का इंटरसेप्टर होने के बाद भी ये आज के J-7 जितना दमदार/भरोसेमंद नहीं है। क्योंकि J-7 मिग 21 की रिवर्स इंजीनियरिंग करके बनाया गया था जिसके लगभग 30 से भी अधिक वेरिएंट्स विकसित और टेस्ट किये गए, वही इसके लगभग 20 वेरिएंट्स पर काम किया गया क्योंकि ये 2 इंजन वाला विमान था जिसपर खर्च अधिक होता तथा ये एक फ्रेश डिज़ाइन था जिसपर समय भी बहुत अधिक खर्च होता।

(6)Chengdu J-10:-

ये विमान एक पायलट और सिंगल इंजन वाला डेल्टा विंग डिज़ाइन का कनार्ड विंग्स के साथ आने वाला लाइट केटेगरी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान है जिसका प्रोग्राम 1980 में शुरू हुआ, जो 1998 में पहली उड़ान भरा तथा 2006 में PLAAF में शामिल किया गया। इनकी कुल संख्या लगभग 435 है, और इन्हें चीन के अलावा कोई भी काम में नहीं लेता है। इस से जुड़ा एक विवाद है की ये बाहर से बिलकुल इसरायली Lavi के सामान है, जिसका निर्माण भी 1980 में शुरू हुआ था और 3 प्रोटोटाइप बनाये गए परन्तु 1986 में इसे शामिल करने के बाद काफी सारे आंतरिक और अंतर्राष्ट्रीय कारणों से अगले ही साल 1987 में सम्पूर्ण कार्यक्रम को ही कैंसल कर दिया गया। अर्थात यहाँ भी चोरी और वो भी रिजेक्टेड डिज़ाइन की। वैसे इसके संभावित खरीददारों में सिर्फ एक ही देश का नाम है और वो हमारा परम मित्र प्रिय पडोसी पाकिस्तान ही है। मगर उस से भी मजे की और आश्चर्यजनक बात ये है की उसका झुकाव इस विमान के बजाय JF-17 थंडर ब्लॉक 3 की और ज्यादा है।

(7) Su-27 और Shenyang J-11:-

Shenyang J-11 भी एक नक़ल किया विमान है जो की Su-27 का लाइसेंस्ड वैरिएंट है जिसे Flanker के नाम से भी जाना जाता है, 10 Su-27 के आर्डर दिए गए हैं। फ्लैंकर एक रूसी ट्विन इंजन सुपर मनुवरेबिलिटी वाला विमान है तो एयर सुपीरियरटी रोल के लिए बनाया गया है और J-11 भी यही रोल निभाता है।

(8)Sukhoi Su-35:-

यह एक रूसी सिंगल सीट वाला ट्विन इंजन सुपर मनुवरेबिलिटी वाला एयर सुपीरियरटी और मल्टीरोल विमान है। नॉन स्टेल्थी 4th जनरेशन विमानों में, ये सुखोई का, सबसे आधुनिक विमान है। चीन के पास इनकी संख्या 24 है तथा फ़िलहाल भारत में राफाल के आने के बाद कुछ और विमानों की खरीद के आर्डर दिए जाने की ख़बरें आ रही है। ये सीधा सीधा संकेत है की राफाल को टक्कर देने के लिए अगर किसी विमान का इस्तेमाल होगा तो वो Su-35 ही होगा, क्योंकि क्षमताओं और वेपन पैकेज में चीन के पास इस से बलशाली और कोई विमान नहीं है। फिलहाल भारतीय Su-30 MKI अपने “सुपर सुखोई अपग्रेड प्रोग्राम” के बाद इसके लगभग बराबर आ जायेगा जिसके अंतर्गत इसके आतंरिक उपकरण, एवियोनिक्स इत्यादि को अपग्रेड किया जायेगा।

(9)Chengdu J-20:-

ये चीन का सबसे आधुनिक 5वीं पीढ़ी का ट्विनजेट, ऑल-वेदर, स्टील्थ, एयर सुपीरियरटी लड़ाकू विमान है। इसका डिज़ाइन अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट F-22 तथा F-35 से मिलता जुलता है, क्योंकि 2009 में अमेरिका पर हुए एक साइबर हमले में F-35 की कुछ फाइल्स चुरा ली गई थी और इस हमले का केंद्र चीन था, अर्थात यहाँ भी चोरी। हालाँकि इतने आधुनिक विमानों का डाटा चुराने के बाद भी डिज़ाइन में खामियों के कारन ये उतना स्टील्थ नहीं है। पूर्व भारतीय एयर चीफ बी एस धनोआ ने कहा की इसके कनार्ड विंग्स इसके स्टील्थ को कम करते हैं जो की एक वाज़िब तर्क है। पूर्व में भारतीय सुखोई ने भी इसे डिटेक्ट किया था। बेशक इसका डिज़ाइन स्टेल्टी है परन्तु यह F-22 तथा F-35 से काफी  लम्बा और थोड़ा ऊंचा है जो की इसका RCS(राडार क्रॉस सेक्शन) बढ़ा देता है जिसके कारण यह AESA जैसे आधुनिक राडार की पकड़ में आ जाता है, हालाँकि यह दूरी काफी कम है अत्याधुनिक अमेरिकी विमानों के लिए जैसे की 36 किमी से F-22, तथा 58 किमी से F-35 विमान डिटेक्ट किया जा सकता है सुखोई Su-35 के द्वारा, परन्तु अलग अलग एंगल और अलग अलग स्थानों पर स्थित राडार के डाटा के आकलन से लगभग 50-100 किमी की दूरी से J-20 जैसे विमान को डिटेक्ट अथवा ट्रैक किया जा सकता है, तथा IRST जैसे उपकरण इंफ्रारेड और थर्मल इमेज कैप्चरिंग तकनीक के द्वारा इन स्टेल्थी विमानों को दूर से डिटेक्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हाल ही में स्वयं चीन के द्वारा ही इसे 4th जनरेशन का स्टील्थ लड़ाकू विमान कहा गया है, अर्थात ये स्टेल्थ के हिसाब से उतना बड़ा खतरा नहीं है।

भारतीय राफाल:-

राफाल पाकिस्तानी विमानों की तुलना में थोड़ा बड़ा जरूर है परन्तु इसके ऐरोडायनमिक्स आधुनिक हैं, ये 2 इंजन का ताकतवर विमान है जो किसी आपातकालीन परिस्थिति में +11 G तक के manoeuvre करने में सक्षम है।

चीन के J-7 और J-8 फाइटर-इंटरसेप्टर हैं जो दशकों पुराने तो हैं ही, इनके राडार की रेंज से ज्यादा तो राफाल की मिसाइलों की रेंज ज्यादा है। वहीँ मल्टीरोल J-11 भी विश्वसनीय नहीं है। अब बचे रूसी और उनकी नकल। और आप तो जानते ही हैं की नकल का माल कैसा होता है, कुछ मॉडल भले ही 19-20 ही सही परन्तु असल और नकल, आकार में बहुत बड़े और लगभग 20-30% अधिक विंग एरिया वाले, भारी भरकम एयर सुपीरियरटी रोल के, ज्यादा RCS वाले विमान हैं जिन्हें राफाल काफी दूर से ही न सिर्फ पकड़ सकता है बल्कि शिकार भी बना सकता है। यहाँ ज्यादा बड़े साइज की ताकत इनके लिए ज्यादा दूर से ही डिटेक्ट हो जाने की बड़ी कमजोरी भी दे जाती है। और तो और चीन के पांचवी पीढ़ी के स्टील्थ विमान J-20 का विंग एरिया तो लगभग-लगभग दुगना है, तथा ये तो अमेरिकी 5वीं स्टील्थ विमानों से भी आकार में बड़ा है जो की सबसे ज्यादा स्टेलथी हैं। इनके थ्रस्ट वेक्टरिंग इंजन इन्हें डॉगफाइट में राफाल से ज्यादा फुर्तीला तो बना सकते हैं, परन्तु राफाल का छोटा आकार और डेल्टा विंग डिज़ाइन भी उन्हें कड़ी टक्कर देगा। और फन फैक्ट ये है की J-20 के पास तो डॉगफाइट के लिए कैनन ही नहीं है!!!!!

राफाल एक मल्टीरोल विमान है, ये अपनी ही तरह का अनोखा विमान है जो की एयर सुप्रीमेसी, ग्राउंड सपोर्ट, SEAD मिशन (Suppression of Enemy Air Defenses), एंटी शिप मिशन, दुश्मन के हमला करने की स्थिति में एरिया एक्सेस डिनायल (दुश्मन से महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा अथवा इंटर्सेप्शन रोल), हवाई जासूसी यहाँ तक की परमाणु हमला करने में भी समर्थ है। इन सात विभिन्न प्रकार के रोल्स को अकेले निभाने की क्षमता के कारण ही इसे ओमनी रोल एयरक्राफ्ट कहा जाता है।

मिसाइल वॉर:-

अब बात करते हैं मिसाइल्स की जो की आधुनिक युद्ध के मुख्य हथियार हैं। आपने देखा की “राफाल बनाम पाकिस्तान” वाली स्थिति में राफाल बड़ा साइज होकर भी आगे है और “राफाल बनाम चीन” वाली स्थिति में छोटा तथा धीमा होने के बाद भी चीन पर भारी है। इसकी वजह है इसका आधुनिक डिज़ाइन, उन्नत राडार और राफाल का वेपन पैकेज अर्थात मिसाइल शक्ति।

पाकिस्तान के पास मुख्य रूप से अमेरिकी और चीनी मिसाइलें हैं जिनमें अधिकतर पुराने वेरिएंट हैं, वहीँ दूसरी और चीन के पास रूसी अमेरिकी और यूरोपियन मिसाइलों के स्वदेशी वेरिएंट्स हैं जिसे उसने रिवर्स इंजीनियरिंग करके बनाया है इसलिए वे सस्ती तो हैं पर इतनी कारगर/विश्वसनीय नहीं हैं। राफाल के मिसाइल बेडे में हर मिसाइल का ज़ोरदार जवाब है।

  • एयर टु एयर मिसाइलों में मैजिक 2 शार्ट रेंज की मिसाइल है जो पुरानी मैजिक वेरिएंट से आधुनिक है।
  • माइका मिसाइल एक आधुनिक शार्ट और मीडियम रेंज की ऑल वेदर “फायर एंड फॉरगेट” मिसाइल है जिसकी रफ़्तार 4 Mach है।
  • MBDA की मिटियोर मिसाइल बियॉन्ड विज़ुअल रेंज की मिसाइल है जिसके आने से पाकिस्तानी AIM 120 का BVR एडवांटेज ख़त्म हो जाता है। ये मिसाइल बिना अपना राडार चालू किये, दागे गए विमान के अथवा AWACS विमान के राडार के आधार पर अपने लक्ष्य पर एक निश्चित गति से आगे बढ़ती है, और करीब पहंचते ही राडार चालू कर अपने शक्तिशाली इंजन की ताकत से बड़े तीव्र वेग से उसकी और बढ़ती है। इसकी नो एस्केप जोन 60 किमी की है, अर्थात अगर दुश्मन 60 किमी से कम दूरी पर है तो वो बच नहीं सकता क्योंकि ये अपना राडार लगभग 20 किमी पर शुरू करती है और विमान के पास 1 मिनट से भी कम समय होता है भागने के लिए, परन्तु इसकी 4 mach की रफ़्तार और तीखे मोड़ लेने की काबिलियत किसी भी तेज़ तर्रार विमान को धराशाही करने की क्षमता रखती है। इसलिए ये PL-15, जिसकी रेंज 300 किमी है, पर भारी पड़ती है क्योंकि ये चीनी मिसाइल एयर रिफ्यूलर और AWACS जैसे धीमे और कम मनुवर करने वालों को ही निशाना बना पाती है। इसकी काबिलियत का पता इसी से चलता है की इसे F-35 में लगाने की बात चल रही है।

कुछ अन्य Air-to-Ground मगर अति महत्वपूर्ण मिसाइल्स:-

ये मिसाइलें राफाल को दूर से ही अपने लक्ष्य को बर्बाद करने की क्षमताएं प्रदान करती है जिसके कारण राफाल को नजदीक जाने का रिस्क नहीं लेना पड़ता।

  • अपाचे मिसाइल MBDA की एंटी रनवे मिसाइल है जिसमें 50 किलो के 10 सब म्यूनिशियन्स (जैसे की क्लस्टर बम) होते हैं। ये एक क्रूज मिसाइल है।
  • स्टॉर्म शैडो एक स्टील्थ प्रकार की air launched क्रूज मिसाइल है जो स्कैल्प EG के नाम से भी जानी जाती है, ये 560 किमी दूर दुश्मन के बंकर, SAM मिसाइल ठिकानों, और अन्य महत्वपूर्ण इंस्टालेशन को बर्बाद कर सकती है। इसके आने के बाद बालाकोट जैसे मिशन्स के लिए हमारे विमानों को बॉर्डर पार करने की आवश्यकता ही नहीं होगी।
  • हैमर नामक ये स्मार्ट बम, एक मिसाइल के सामान ही 15 से 60 किमी तक जा सकता है। ये स्पाइस 2000 जैसा ही स्मार्ट बम है।
  • AS-30 एक लेज़र गाइडेड मिसाइल है जो बंकर, पुल आदि हाई वैल्यू टारगेट सटीकता से धवस्त कर सकती है।
  • एक्सोसेट मिसाइल भी एक एंटी शिप मिसाइल है। ये समुद्री सतह पर उड़ते हुए राडार को चकमा देकर वेसल्स डुबो सकती है।
  • ASMP मिसाइल एक न्युक्लियर मिसाइल है 300-500 किमी तक जा सकती है।

भविष्य में भारतीय राफाल:-

  • भारतीय राफाल (Rafale fighter jet India) आने वाले कुछ सालों में स्वदेशी मिसाइलों से लैस होंगे जिनमें प्रमुख नाम है भारत की अस्त्र BVR मिसाइल जिसकी रेंज 100 किमी से अधिक है। इसकी अभी कोई आधिकारिक सूचना नहीं है पर जिस प्रकार आत्मनिर्भर भारत अभियान ने ज़ोर शोर से शुरुआत की है अंदाज़ा लगाया जा सकता है की अस्त्र लगाई जाएगी।

  • अस्त्र के साथ ब्रह्मोस जिसके लाइट वर्शन पर भी काम जारी है, और ये भी अगर वजन में कम हुई तो राफाल में भी कई मिसाइलें लगाई जा सकती है क्योंकि राफाल 2 इंजन वाला ताकतवर विमान है।
  • बालाकोट में जिस स्पाइस 2000 ने तबाही मचाई वो भी 1-2 साल में लग जायेगा। ये बम इजराइल की डिफेन्स कंपनी रफाएल (Rafael Advanced Defense Systems) बनती है। ये इस्राइली बम पहले कभी राफाल में नहीं लगाया गया इसलिए इसके इंटीग्रेशन में समय लगेगा और तब तक हम हैमर से काम चलाएंगे। ये लगभग 60 किमी तक जा सकता है जिसकी CEP 3 मीटर है अर्थात ये हैमर से न सिर्फ रेंज में ज्यादा है बल्कि सर्कुलर एरर प्रोबेबिलिटी (CEP) भी हैमर से कम है, यानि ज्यादा सटीक है।
  • ASMP -A न्युक्लियर मिसाइल का नया वेरिएंट जिसपर काम जारी है, की रफ़्तार 8 Mach तक होगी अर्थात ये एक हाइपरसोनिक मिसाइल होगी तथा रेंज भी 1,000 किमी होगी।

राफाल की खूबियों, इसके वेपन पैकेज, इसकी काबिलियत, MMRCA 2.0 की वर्तमान परिस्थितियां और आत्मनिर्भर भारत प्रोग्राम की दशा-दिशा देखते हुए ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है की राफाल भारतीय वायुसेना में वही काम करेगा जो काम अमेरिकी वायुसेना के लिए F-35 करता है, अर्थात SEAD मिशन्स। राफाल अधिकतर SEAD मिशन और बालाकोट जैसे मिशन में अधिक इस्तेमाल होगा। जहाँ SEAD मिशन में राफाल दुश्मन के एयर डिफेन्स को तबाह करेगा और अन्य विमानों जैसे की मिराज 2000, तेजस, सुखोई इत्यादि का रास्ता साफ़ करेगा, वहीँ बालाकोट जैसे मिशन्स में एक सुरक्षित दूरी से ही शत्रु के ठिकानों को बर्बाद करेगा।

और अगर राफाल का सामना Su-35 जैसे आधुनिक विमान जिनके पार 400 किमी वाला राडार है, से होता है तो भी एडवांटेज राफाल के ही पास होगा क्योंकि राफाल के पास माइका (MICA) और मिटियोर जैसी शक्तिशाली BVR मिसाइल्स है। चीन तथा पाकिस्तान की बयानबाजियां देख कर तो यही लगता है की 5 राफाल ही 50 का भय पैदा कर रहे हैं।

जय हिन्द।

Characteristics/aircraftsRafale
Dimension (Length, Wingspan, Height, Wing area)15.27 m, 10.90 m,

5.34 m, 45.7 m2

Fuel capacity4,700 kg (single seat)

4,400 kg (twin seat)

Engine Thrust (Dry & Afterburners)2 engine=

100.08 kN – 150 kN

Ferry Range3,700 km (3 drop tanks)
Service Ceiling15,835 m
Rate of climb304.8 m/s
G limits+9 −3.6 (+11 in emergencies)
Max speed2,223 km/h

Mach 1.8

Hardpoints14 (13 navy version)
Combat range1,850 km
Guns1×30 mm 125 rounds
Radar Range~200 km

दिव्यांश शर्मा, जयपुर
लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार

समस्त जानकारी लेखक की अपनी रिसर्च पर आधारित है वृतांत इस लेख से जुड़े किसी तथ्य पर कोई दावा पेश नहीं करता है।

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