July 29, 2021

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Meen Rashi / मीन राशि : क्या होता है मीन का अर्थ और किन राशियों के जातकों से रहना चाहिए सावधान

saptahik rashifal

।।श्री गणेशाय नमः।।

भारतीय वैदिक ज्योतिष 12 राशि 27 नक्षत्र 7 मुख्य ग्रह और 2 छाया ग्रह के संयुक्त योगदान से अस्तित्व प्राप्त करता है। इन्ही कारको के माध्यम से समस्त ज्योतिषीय गणना की जाती है। नक्षत्रो को समेत कर विभिन्न राशियों में निहित किया गया है तो ग्रहो को राशियों का स्वामित्व प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त इन सभी कारको के अपने अलग स्वभाव, कारक तत्व और क्षेत्र है।

भिन्न-भिन्न स्वभाव, प्रकृति के कारण इन ग्रहो में, नक्षत्रो में मित्रता, ;शत्रुता, समता के भाव उत्पन्न होते हैं। इसी प्रकार राशियों की भी मित्रता शत्रुता भी निश्चित होती है। यहाँ मैं मीन राशि के विषय में और उसकी शत्रु राशि के विषय में बात करने जा रही हूँ। मीन राशि की शत्रु राशि कौन सी है और मीन राशि के जातको को किस प्रकार इन राशियों से सावधान रहना चाहिए।

मीन राशि का अर्थ

मीन राशि का शाब्दिक अर्थ मछली है और अगर इसकी आकृति आप देखेंगे तो उसमे आपको दो मछलियां एक दूसरे का पीछा करती नजर आएँगी । मीन राशि जल तत्व की राशि है ज्योतिष शास्त्र में इसकी तुलना समुद्र के गहरे स्वच्छ जल से की गई है। ये मोक्ष त्रिकोण की अंतिम राशि है कालपुरुष की कुंडली में इसको द्वादश भाव का आधिपत्य प्राप्त है।

किन राशि के जातकों से रहें सावधान

मीन राशि की शत्रु राशि वृषभ, कन्या, तुला और कुम्भ है। मीन राशि के जातको को इन राशि के जातको से सावधान रहना चाहिए।

meen rashi ki shatru rashi konsi hai

वृषभ राशि के जातक ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो नामाक्षर के होते है। ये मीन राशि की शत्रु राशि है मीन राशि के जातको को इन जातको से अधिक वाद विवाद नहीं करना चाहिए और वृषभ राशि के मित्रो पड़ोसियों से सावधान रहना चाहिए यदि वाद विवाद होगा तो इनको हानि ही होगी। अगर इनके छोटे भाई बहन वृष राशि के होंगे तो उनकी देखभाल की अधिक जिम्मेदारी इन पर होगी और सम्मान में कमी रहेगी। वृष राशि के मित्र और भाई बहन पर चाहे ये कितना भी स्नेह और धन व्यय कर लें तब भी जिस सम्मान और स्नेह के अधिकारी हैं प्राप्त नहीं कर पायेंगें।

कन्या राशि के जातक ढो,पा, पी, पु,ष,ण,ठ,पे, पो नामाक्षर के होते हैं। मीन राशि के जातको की अपेक्षा इनकी बुद्धि चपल और तेज़ होती है। मीन राशि के जातको को इनके साथ कभी साझेदारी नहीं करनी चाहिए और न ही कोई व्यावसायिक अनुबंध ही करना चाहिए। ऐसा करने पर परिस्थिति वश इनको धोखा मिलने की अधिक सम्भावना रहेगी। यदि हो सके तो कन्या के जातको के साथ यात्रा करने से भी बचें जीवनसाथी के चयन में भी अगर सम्भव हो तो इस राशि के जातको को छोड़ देना ही उचित होगा।

तुला राशि के जातक रा, री, रु, रे, रो, ता, ती,तु,ते नामाक्षर के होते हैं। मीन राशि के जातको को तुला राशि के जातको से अचानक कष्ट या धोखा मिल सकता है कभी कभी इनसे बड़ा कष्ट भी इनको मिल सकता है। अतःमीन राशि के जातको को इनसे बहुत सतर्कता से समझदारी से व्यव्हार करना चाहिए और सदैव सजग रहना चाहिए। अगर इनके ससुराल पक्ष में इस राशि के सदस्य होंगे तो इनको उन पर अधिक खर्चा करना पड़ सकता है।

कुम्भ राशि के जातक गु, गे,गो,सा, सी, सु, से, सो, दो के नामाक्षर के होते हैं। मीन जातको के साथ कार्यरत या इनके अधीन कार्यरत कुम्भ राशि के जातको से इनको सावधानी पूर्वक व्यव्हार करना चाहिए और इन पर अधिक समय और धन व्यय करने से बचना चाहिए। मीन जातक इनकी वजह से पथ भ्रष्ट हो सकते है। समाज में अपमानित हो सकते है। ये मीन जातको की आदतों में भी गलत बदलाव करने में सक्षम हो सकते हैं जिससे इनको स्वास्थ्य हानि या धार्मिक हानि भी हो सकती है। शत्रु राशि के रत्न कभी धारण नहीं करने चाहिए।

मीन राशि के जातक सद्गुणी, सदाचारी, ईश्वरीय आस्था वाले, सभी की सहायता करने वाले, सब पर विश्वास करने वाले, ज्ञानी जन होते हैं। इनकी शत्रु राशि विलासी चपल और भिन्न भिन्न कर्मो की ओर लगाने वाली स्वभाव की हैं। इनको शत्रुओ से बचने के लिए बड़ी सतर्कता की आवश्यकता होती है। जिनकी जन्म राशि मीन है उनको शत्रु राशि के नाम रखने से भी बचना चाहिए अन्यथा जीवन में संघर्ष बढ़ सकते हैं।

यहाँ वर्णित राशियों की व्याख्या उनके नैसर्गिक प्रकृति के अनुसार की गई है। वर्णित शत्रु राशि के स्वभाव मीन राशि से एकदम विपरीत हैं।

 

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