June 18, 2021

वृतांत – Vritaant

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जाति भेदभाव ख़त्म करने में डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने निभाई थी अहम् भूमिका

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जाति व्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है जिसमे एक व्यक्ति के स्थिति, कर्तव्यों और अधिकारों का भेद किसी विशेष समूह में किसी व्यक्ति के जन्म के आधार पर किया जाता है। यह सामाजिक असमानता का कठोर रूप है। डॉ.भीमराव आंबेडकर का जन्म भी एक माहर जाति के एक गरीब परिवार में हुआ था। समाज में उसके परिवार के साथ सामाजिक और आर्थिक भेदभाव होता था। बचपन में बाबा साहेब को माहर जाति से होने के कारण सामाजिक, बहिष्कार, छुआछूत और अपमान का सामना करना पड़ा था। यहाँ तक कि स्कूल में भी उनके साथ भेदभाव होता था। स्कूल के अध्यापक उन पर ध्यान नहीं देते थे। स्कूल में उन्हें कक्षा से बाहरअलग बैठाया जाता था और उन्हें पानी के बर्तन तक को नहीं छूने देते थे।

जाति की ऐसी व्यवस्था के कारण समाज में ऐसी कई बुराइयाँ प्रचलित थी। बाबा साहेब अम्बेडर इस व्यवस्था को बदलना चाहते थे। वे सामाजिक एकता में विश्वास रखते थे और वे चाहते थे कि किसी व्यक्ति के साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। अपनी स्नातक की पढ़ाई के बाद उन्होंने क़ानूनी पढाई करना शुरू कर दिया था। इसके बाद वे एक वकील बन चुके थे। वकील रहते हुए उन्होंने कई जातिगत भेदभाव वाले मामलो में वकालत की और अपना कौशल दिखाया। उनका सबसे बड़ा मामला ब्रह्मणो के खिलाफ था, जिसमे गैर ब्राह्मणो की रक्षा के लिए उन्होंने मुकदमा जीता। इस जीत के साथ उन्होंने बदलाव की आधार शिला को स्थापित कर दिया था। इसके अलावा बाबासाहेब ने दलितों को पूर्ण अधिकार दिलाने के लिए कई आंदोलन भी शुरू किये। उन्होंने सभी जातियों के लिए एक जल स्त्रोत से पानी और मंदिरो में प्रवेश करने की मांग की। इसके अलावा भेदभाव का समर्थन करने वाले हिन्दू शास्त्रों को भी गलत ठहराया।

बाबा ने साहेब ने अपने साथ हुए भेदभाव कारण उन्हें पुरे जीवन दुःख और अपमान का सामना किया। इसलिए उन्होंने इसके लिए लड़ने का फैसला किया। उन्होंने इसके लिए अलग चुनावी व्यवस्था के विचार का प्रस्ताव रखा। उन्होंने दलितों और अन्य बहिष्कृत लोगो के लिए आरक्षण की अवधारणा पर विचार किया और इस व्यवस्था की शुरुवात की। 1932 में सामान्य मतदाताओं के भीतर अस्थायी विधायिका में दलित वर्गों के लिए सीटों के आरक्षण हेतु बाबासाहेब अम्बेडकर और पंडित मदन मोहन मालवीय जी के द्वारा पूना संधि पर हस्ताक्षर किया गया। बाबा साहेब अम्बेडकर, महात्मा गाँधी के हरिजन आंदोलन में भी शामिल हुए। जिसमे उन्होंने भारत के पिछड़े जाति के लोगो द्वारा सामना किये जाने सामाजिक अन्याय के विरोध में अपना योगदान दिया।