July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

खबर, संवाद और साहित्य

चीनी बैंक आईसीबीसी ने यूपीआई के मालिक, एनपीसीआई में शेयर की पेशकश की

दो महीने पहले आईसीबीआई सहित 131 नए शरधारको की सूची को 17 सितम्बर 2020 को कंपनी की वार्षिक बैठक में एक विशेष प्रस्ताव में अनुमोदित किया गया था। हालाँकि खुदरा भुगतान शाखा का कहना है कि वर्तमान में निजी प्लेसमेंट प्रक्रिया चल रही है। एनपीसीआई अभी भी इक्विटी को व्यापक बनाने के बीच में है। इस अभ्यास में कुछ सप्ताह लगेंगे और इस साल के मध्य दिसम्बर तक इसका समापन होने की सम्भवना है। वर्तमान में आईसीबीसी, जो कि विदेशी बैंको में से एक था, जिसे शुरुवात में अन्य निवेशकों के साथ 5 प्रतिशत से थोड़ा कम की कुल इक्विटी कमजोर पडने के लिए पहचाना गया था ने निजी प्लेसमेंट में अपने शेयर धारको के कोटा के लिए आवेदन नहीं किया है। इसलिए एनपीसीआई ने आईसीबीसी को कोई शेयर जारी नहीं किया है, एनपीसीआई ने स्पष्ट किया।

चीनी सरकार के पास आईसीबीसी 4.0 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया का सबसे बड़ा बैंक भी है। बैंक कुल संपत्ति, जमा और  अग्रिम के मामले में जेपी मॉर्गन चेस और बैंक ऑफ़ अमेरिका जैसे अमेरिकी दिग्गजों से आगे है। यह ज्ञात नहीं है कि आईसीबीआई अपने स्वयं के निजी प्लेसमेंट को छोड़ रहा है या दोनों देशो के बीच के मुद्दों के कारण सलाह दी गयी है। या यह अपने कोटा के लिए आवेदन करने से पहले समय बिता रहा है क्योकि निजी प्लेसमेंट की पूरी प्रक्रिया दिसम्बर के मध्य तक पूरी होने की उम्मीद है। एनपीसीआई द्वारा मौजूदा इक्विटी कमजोर पड़ने की प्रवृति आरबीआई-विनियमित संस्थाओ के एक बड़े समूह को साझा करने और वितरित करने के लिए है, जिसमे विदेशी बैंक, एनबीएफसी और फिनटेक भी शामिल है।

एनपीसीआई अपने आप में किसी भी आरबीआई विनियमित यूनिट को बाहर नहीं कर सकता है। वास्तव में बहिष्कार किसी भी देश या अन्यथा से संबंधित दिशानिर्देशों  के आधार पर आवंटन के समय हो सकता है। आईसीबीआई भारत में पहले से ही एक विदेशी बैंक के रूप में पंजीकृत है। इसने लगभग एक दशक पहले भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) से भारत में संचालित होने के लिये एक बैंक लाइसेंस प्राप्त किया था। ऐसा तब था जब भारत-चीन व्यापार संबंध भारत में शाखाओ वाले चीनी बैंको के लिए नए अवसर खोलने लगे थे। पिछले एक साल में चीन के खिलाफ राजनितिक भावनाओ में नाटकीय बदलाव आया है। सरकार ने विशेष रूप से पडोसी देशो से आने वाले निवेश के संबंध में अवसरवादी अधिग्रहण का हवाला देते हुए विदेशी पोर्टफोलियो निवेश नियमो को कड़ा किया है। हालाँकि भारत में चीनी पोर्टफोलियो निवेश पर कोई रोक नहीं है।

%d bloggers like this: