June 18, 2021

वृतांत – Vritaant

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दीपावली विशेष : क्यों खास है दीपावली के पांच दिन, विशेष पूजा विधि के साथ

deepwali ke 5 din, वृतांत - Vritaant

धर्म कर्म

दीपावली के पावन अवसर पर हर तरफ खुशियों का जगमगाता वातावरण और हर और खुशियाँ होती है। यह पर्व सभी पर्वों में सबसे बड़ा माना जाता है क्योंकि पांच दिन तक इस त्योहार की खुशियां मनाई जाती है और हर तरफ तरह तरह की मिठाईया उपहारों के अम्बार और दीपो की जगमगाहट मन को हर्षित करने वाली होती है। इस पंच दिवसीय पर्व का अपना विशेष महत है । पुराणो में भी इससे सम्बंधित अनेक कथाये मिलती है । यहाँ हम पंच दिवस के प्रत्येक दिवस की विशेषता के बारे में जानेंगे और हर दिन का विशेष बनाने हेतु क्या ज्योतिषीय उपाय हो सकते है ये भी जानेंगे। आइये जानते हैं पांच दिवसीय पर्व को अपने अनुकूल कैसे बना सकते हैं ज्योतिषी अनु गर्ग से –

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धन्वन्तरी त्रयोदशी
इसे ‘धनतेरस’ भी कहा जाता है। इस दिन देवताओ के चिकित्सक भगवान धन्वंतरी की भी पूजा करते हैं। पुराणों में कथा है कि समुद्र मंथन के समय धन्वंतरी अमृत कलश लेकर अवतरित हुए थे। इस दिन संध्या समय यमराज के लिए दीपदान करना चाहिए। इससे अकाल मृत्यु का नाश होता है।
इस दिन सोना चांदी क्रय करना अत्यदिक शुभ मन जाता है और उसकी पूजा की जाती है ऐसी मान्यता है ऐसा करने से लक्ष्मी माँ प्रसन्न होती हैं लेकिन आज महंगाई के चलते प्रत्येक के बजट में सोना या चांदी खरीदना संभव नहीं यदि आप भी इन्ही में शामिल हैं तो चिंता न करें और भी वस्तुए हैं जिनसे आप लक्ष्मी माँ को प्रसन्न कर सकते है l जैसे पीतल ,धनिया दाना , जौं, सीक झाड़ू ,अक्षत इन पांच वास्तु में से जो आपको सही लगे इस दिन खरीदिये और माँ लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त कीजिये ।

नरक चतुर्दर्शी या भौम चौदस
इसे ‘छोटी दीवाली ‘ या ‘रूप चौदस’ भी कहा जाता है। इस दिन नरक से डरने वाले मनुष्यों को चंद्रोदय के समय स्नान करना चाहिए l जो चतुर्दशी को प्रातःकाल तेल मालिश कर स्नान करता है और रूप सँवारता है, उसे यमलोक के दर्शन नहीं करने पड़ते हैं। नरकासुर की स्मृति में चार दीपक भी जलाना चाहिए। इस दिन भगवन श्री कृष्ण की आराधना मधुराष्टक से करनी चाहिए।

कार्तिक अमावस्या
इसे दीपावली कहा जाता है। इस दिन महालक्ष्मी की पूजा गणपति जी और माँ सरस्वती के साथ की जाती है। शुभ मुहूर्त में लक्ष्मीजी का पान, सिक्का, तस्वीर अथवा श्रीयंत्र, धानी, बताशे, दीपक, पुतली, गन्ने, साल की धानी, कमल पुष्प, ऋतु फल आदि पूजन की सामग्री खरीदी जाती है। घरों में लक्ष्मी के नैवेद्य हेतु पकवान बनाए जाते हैं। शुभ मुहूर्त, गोधूलि बेला अथवा सिंह लग्न में लक्ष्मी का वैदिक या पौराणिक मंत्रों से पूजन किया जाता है। श्री सूक्त का पाठ भी अवश्य करें।

ध्यान रहे माँ लक्ष्मी जी की पूजा में घंटी नहीं बजे जाती। इस दिन सरसो के तेल के दिए अपनी सामर्थ्य अनुसार यदि संभव हो तो 25 या अधिक दिए पूजा में शामिल करें और लक्ष्मी पूजन के बाद इनको अपने मंदिर में घर के कोनो में छत पर तुलसी क्यारी में मुख्य द्वार पर मदिर में पीपल के नीचे शमी के तुलसी के पास कुए पर चौराहें आदि पर रखें इन दियो को खील बताशे का भोग भी लगाए ऐसा करने से आपकी धन संपत्ति ऐश्वर्य में वृद्धि होगी।

श्री गोवर्धन पूजा

इसे महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। आज के दिन गाय-बछड़ों एवं बैलों की पूजा की जाती है। गाय-बछड़ादि को तरह-तरह से श्रृंगारित किया जाता है। सायंकाल उन्हें सामूहिक रूप से गली-मोहल्लों में घुमाया जाता है और ग्वाल-बाल, विरह गान भी करते हैं। इस दिन भगवन श्री कृष्ण को छप्पन भोग अर्पित किये जाते हैं । यदि आज के दिन से आरम्भ कर आप वर्ष भर गाय को भोजन देने का संकल्प लेंगे तो आपके जीवन की बढ़ाये दूर होंगी l

गोवर्धन पूजा के दिन महिलाएं शुभ मुहूर्त में घर आंगन में गोबर से गोवर्धन बनाकर कृष्ण सहित उनकी पूजा करती हैं। इस महोत्सव में देवस्थानों पर चातुर्मास में वर्जित सब्जियों की संयुक्त विशेष सब्जी बनाई जाती है और छप्पन भोग तैयार कर भगवान को नैवेद्य लगाया जाता है। उसके पश्चात देवस्थलों से भक्त, साधु, ब्राह्मण आदि को सामूहिक रूप से प्रसाद के रूप में वितरण किया जाता है।

यम द्वितीया

इसे भाई दूज कहा जाता है। इस दिन प्रातःकाल उठकर ईश्वर की आराधना करनी चाहिए। यदि संभव हो तो भाई बहन को यमुना में स्नान करना चाहिए ऐसी मान्यता है यदि भाई बहन यमुना जी में स्नान करते है तो उनको याम देवता का आशीर्वाद और यमुना देवी का स्नेह मिलता है और उनका आपसी स्नेह बढ़ता है । आज के दिन यमुना ने यम को अपने घर भोजन करने बुलाया था, इसीलिए इसे यम द्वितीया कहा जाता है। इस दिन भाइयों को घर पर भोजन नहीं करना चाहिए। उन्हें अपनी बहन, चाचा या मौसी की पुत्री, मित्र की बहन के यहां स्नेहवत भोजन करना चाहिए। इससे कल्याण की प्राप्ति होती है।
भाई को वस्त्र, द्रव्य आदि से बहन का सत्कार करना चाहिए। सायंकाल दीपदान करने का भी पुराणों में विधान है।

इसके अतिरिक्त पांचो दिन 5 दिए मंदिर के प्रांगण में आकाश के नीचे जलाने से आपको अपर धन संपत्ति की प्राप्ति होती है। पुराणों में कहा गया है की धन तेरस से दीवाली तक 3 दिन हम जो भी पूजा उपाय करते है उनका फल एक वरदान के अनुसार राजा बलि को प्राप्त होता है और हमें उसको प्राप्त करने के लिए एक विशेष उपाय करना होता है यदि आप उस उपाय को जानना चाहते है तो पढ़िए 23 नवंबर का राशिफल और अपने दीवाली के पुण्य को प्राप्त करें।