August 2, 2021

वृतांत – Vritaant

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अब्दुल कलाम की सीख: डॉ. अब्दुल कलाम का जीवन सिखाता है जिंदगी की ये खास सीख

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को हुआ था. उनकी जयंती को विश्व छात्र दिवस के रूप में मनाया जाता है.  वह 2002 से 2007 तक भारत के राष्ट्रपति रहे. उन्हें 1997 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था. उनका जन्म धनुषकोडी, रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ था और उन्होंने भौतिकी और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का अध्ययन किया था.

पूरी दुनिया में मिसाइल मैन के नाम से जाने वाले महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु में हुआ था। डॉ. कलाम एक महान वैज्ञानिक के अलावा प्रेरणादायक नेता और एक अद्बुद्ध इंसान थे। जिस भी क्षेत्र में कलाम ने काम किया वहा सबका दिल जीत लिया। डॉ. कलाम ने 40 से ज्यादा यूनिवर्सिटी से डॉक्ट्रेट की मानक उपाधि हासिल की थी। एक बार कुछ नौजवानो ने डॉ. कलाम से मिलने की इच्छा जाहिर की इसके लिए उन्होंने उनके ऑफिस में एक पत्र लिखा। इसके बाद डॉ. कलाम ने उनकी इच्छा पूरी की और ना केवल उनके साथ मुलाकात की बल्कि उनके साथ वक्त बिताकर उनके नए आइडियाज भी सुने। डॉ. कलाम अक्सर देश भर में घूम कर युवाओ से मिला करते थे और उन्होंने भारत में घूमकर करीब 1 करोड़ 70 लाख युवाओ से मुलाकात की थी।

नजदीक से जाने- अब्दुल कलाम की सीख

डॉ.कलाम डीआरडीओ में अपनी रिसर्च करते थे। उनके साथ कई वैज्ञानिक काम किया करते थे। एक बार उनके साथी वैज्ञानिक ने कहा कि उसे जल्दी घर जाना है क्योकि वह उनके बच्चो को प्रदर्शनी दिखाने लेकर जाना चाहता है। इसके बाद डॉ. कलाम ने उसे इजाजत दे दी। लेकिन काम के चक्कर में वह भूल गया की उसे घर जल्दी जाना था। इसके बाद उसे बहुत दुःख हुआ। जब वह घर पंहुचा तो उसे पता चला कि डॉ. कलाम ने अपने मैनेजर को उसके बच्चो को प्रदर्शनी दिखाने के लिए भेज दिया था। डीआरडीओ के पूर्व चीफ कहते है कि जब अग्नि मिसाइल का परीक्षण किया जा रहा था तो कलाम इसको लेकर बहुत नर्वस थे। तब वे अपने जेब में इस्तीफा लेकर घूमते थे। उनका कहना था कि अगर कुछ भी गलत हुआ तो वे अपना पद छोड़ देंगे।

डॉ. कलाम ने भौतिकी और रक्षा के क्षेत्र में बहुत काम किया और इन क्षेत्रो में अपनी छाप छोड़ी। इसके अलावा डॉ. कलाम ने कई ग्रामीण इलाको में स्वास्थय के लिए भी काम किया। डॉ. कलाम सात साल तक प्रधान मंत्री के विशेष सलाहकार और डीआरडीओ के सचिव रहे। इसके बाद 2002 में उन्होंने लक्ष्मी सहगल को हराकर देश के 11वे राष्ट्रपति भी बने। डॉ. कलाम का जन्म बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे पढाई के साथ काम भी किया करते थे। बहुत ही कम उम्र में उन्होंने परिवार में आर्थिक सहयोग देना शुरू कर दिया था। वे अपने पिता के साथ घर की आमदनी में हाथ बटाते थे। अपनी स्कूल के दिनों में कलाम एक औसत छात्र ही थे। लेकिन उनकी दृढ शक्ति और सीखने इच्छा ने उन्हें होनहार और पारंगत बना दिया।

अब्दुल कलाम का सादा जीवन उच्च विचार

सादगी और सरल व्यवहार APJ अब्दुल कलाम की खासियत रही। एक मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे अब्दुल कलाम देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने के बावजूद भी जमीन से जुड़े रहे। यहाँ तक की जब वह अपने पद पर थे तब उन्होंने राष्ट्रपति को मिलने वाली तमाम तरह की सुख-सुविधाओं से खुद को अलग रखा था। जो अभी तक कुछ गिने चुने लोग ही कर पाए है। वह फिजूल खर्ची के सख्त खिलाफ थे। यहीं कारन है की हम आज उनके जाने के इतने समय बाद भी उनको याद कर रहें है।

अब्दुल कलाम की कड़ी मेहनत और लगन की सीख

अब्दुल कलाम के काम के प्रति लगन ने ही उन्हें एक आम इंसान से इतनी महान शख्सियत बना दिया। उन्होंने कई बड़े पद पर होते हुए भी किसी काम से मुंह नहीं मोड़ा। वह अपने अंत समय तक अपने जरुरी काम स्वयं ही पूरे किया करते थे।

अब्दुल कलाम की सीख, मानवता को सबसे ऊपर रखना

अब्दुल कलाम राजनीतिक विवादों से दूर रहते थे। उनकी नजर में मानवता का धर्म सबसे ऊपर था। वो मानवता से ऊपर किसी भी चीज को नहीं मानते थे।

अब्दुल कलाम की सीख, जीवन के प्रति सकरात्मक नजरिया

जीवन की किसी भी कठिनाइयों में होते हुए भी उन्होंने कभी भी नकरात्मक विचारों को खुद पर हावी होने नहीं दिया। रामेश्वरम से लेकर भारत के राष्ट्रपति भवन के विशाल जीवन यात्रा में उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी और मिसाइल मेन रूप में विश्वप्रसिद्ध हुए। उन्होंने हमेशा ही जीवन के प्रति सकरात्मक रखी, जिससे उन्हें हर मुकाम पर सफलता मिली।

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