June 17, 2021

वृतांत – Vritaant

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यात्रा वृतांत : हिमाचल की पहाड़ियों के बीच बसा ‘मनाली’ का सफर

Manali tour vritaant, वृतांत - Vritaant

मैं अपनी कॉलेज के तीसरे वर्ष में था और मेरी कॉलेज ने हमे इंडस्ट्रियल टूर के लिए मनाली ले जाने की योजना बनायीं थी। मैं और मेरे दोस्त इस टूर (यात्रा ) पर जाने के लिए तैयार हो गए थे और मैं और मेरे सभी दोस्त इसके लिए बहुत ही उत्साहित थे। 26 अगस्त 2018 को रात 8 बजे की जयपुर जंक्शन से चंडीगढ़ के लिए डबल ऐसी ट्रैन बुक कराई गयी थी। मैं और मेरे सभी दोस्त अपने सामान के साथ शाम 6 बजे कॉलेज पहुंच गए थे। वह से कॉलेज बस के द्वारा हम जयपुर जंक्शन पहुंचे। मेरी कॉलेज की सभी ब्रांचो को मिलाकर हम लगभग 100 से अधिक छात्र इस टूर का हिस्सा थे। जयपुर रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद हम प्लेटफार्म पर गए। वह कुछ देर रुकने के बाद हमारी ट्रैन प्लेटफार्म पर आ चुकी थी। हम सब हमरे अध्यापको के आदेश और मार्गदर्शन के साथ रेल में अपनी अपनी सीटों पर बैठ गये। कुछ ही देर में ट्रैन चल पड़ी और हमने ट्रैन में खूब मस्ती मजाक भी किया। कुछ समय बीतने के बाद मैंने अपने दोस्तों के साथ बैठकर खाना भी खाया। सभी अपने घरो से अच्छा खाना बांध कर लाये थे। देर रत तक जागने और हंसी मजाक करने के बाद हम सब सो गए। सुबह के 5 बजे हम चंडीगढ़ पहुंच चुके थे।

चंडीगढ़ पहुंचने के बाद हम वह के रेलवे स्टेशन से बाहर आए और हमारे टूर प्लानर द्वारा हमारे लिए दो बसे बुक कराई गयी थी। कुछ ही देर में हमारी बसे आ गयी और हम सब अपने अपने दोस्तों के साथ बसों में बैठ गए। इसके बाद हम बद्दी के लिए निकल पड़े। हमने बस में खूब मजे किये और कई फन गेम्स भी खेले, जैसे अंताक्षरी, डांस करना और चुटकले सुनाना। इसके बाद कुछ घंटो के बाद हमने हिमाचल में प्रवेश कर लिया और अब रास्ते भी बदलने लगे थे। धीरे धीरे सीधी सड़के घुमावदार पहाड़ी रास्तो में बदल गयी थी और हमारी बसे हरे भरे पहाड़ो के बीच से गुजरने लगी थी। पहाड़ो की ऐसी खूबसूरती मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। अब मेरा पूरा ध्यान बस की खिड़की से बाहर था। दोपहर 1 बजे तक हम बद्दी पहुंच चुके थे। वह हम एक होटल में रुके। वह पर हमने अपने रोजमर्रा के सभी काम किये और खाना भी खाया। उसके बाद हम तैयार होकर बद्दी की एक इंडस्ट्रियल फैक्ट्री में पहुंचे। वह पर हमने मशीनों से लोहे से बैरिंग्स को बनाते हुए देखा और उनके बारे में जनकरी प्राप्त की। कुछ घंटे वहा बिताने के बाद हम हम शाम को वापस होटल आ गए। उसके बाद हमने आराम किया। रात को हम खाना खाकर वापस बसों में बैठ गए और अब हम मनाली के निकल पड़े।

रात को पहाड़ी रास्तो से गुजरते हुए मन में थोड़ी बहुत घबराहट थी लेकिन रात समय पहाड़ो से आती हुई घरो की रौशनी इतनी चमकीली लग रही थी की आंखे वह से हट ही नहीं रही थी। देर रात को ठंड बढ़ने के बाद मुझे खिड़की को बंद करना पड़ा और थकन की वजह से मुझे नींद आ गयी। सुबह 7 बजे के बाद मेरी आंख खुली तो मेने देखा कि रास्ते और भी दुर्गम हो गए थे और घुमाव और भी मुश्किल। पहाड़ो की बीच गुजरते हुए मन यही सवाल आ रहा था कि आखिर कैसे ये रास्ते बनाये गए होंगे। कई सेकड़ो किमी का पहाड़ी सफर तय करने के बाद हम सुबह 11 बजे के आस पास मनाली पहुंच चुके थे। वह पर भी हम एक होटल में रुके। वह पर हमने तैयार होक नाश्ता किया और उसके हम जीप द्वारा रोहतांग के लिए निकल पड़े। मैं अपने दोस्तों के साथ एक जीप में था और हम कुल 7 लोग थे। इसके बाद जीप चलना शुरू हुई। और बहुत ही भयानक और ऊँची घुमावदार सड़को से गुजरी। धीरे धीरे चढ़ाई और भी अधिक होने लगी थी। घर बहुत ही छोटे छोटे दिखने लगे थे। यह एक सिंगल रोड थी जो रोहतांग होते हुए लद्दाख को जाती है। जब भी किसी घुमाव में सामने से कोई अन्य ट्रक या गाड़ी आती थी और मन में घबराहट तेज हो जाती थी। लेकिन मुश्किल और खतरनाक रास्ते होते हुए भी धीरे धीरे पहाड़ो की खूबसूरती बढ़ने लगी थी। आसमानी बदल पहाड़ो की चोटियों को चुम रहे थे। इसके अलावा पहाड़ो की चोटियों पर सफ़ेद बर्फ भी चमक रही थी। कुछ घंटे के बाद हम रोहतांग पहुंचे।

वहा पर उतरते ही बर्फीली हवाएं महसूस हुई और मैं कांपने लगा। लेकिन हमने निकलने से पहले सर्दी से बचने वाले सूट जीप में रख लिए थे। हमने वहा उतरते ही सबसे पहले अपने अपने सूट पहने। इसके बाद हम वहा पर खूब प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लिया और खूब तस्वीरें खींची। कुछ समय बिताने के बाद वह पर ओले गिरना शुरू हो गए और तेज बारिश आने लगी। इसके बाद हम वापस अपनी जीप में आकर बैठ गए और रोहतांग से वापस आ गए। इसके बाद आकर हमने होटल में गरम गरम खाना खाया। इसके बाद हम सब ने आराम किया। रात को हम मनाली के बाजार में शॉपिंग के लिए गए। मैंने अपनी मम्मी के लिए दो शाल खरीदी और पापा के लिए एक जैकेट। बहुत देर तक घूमने के बाद हमने आकर रात का खाना खाया और इसके बाद होटल में डीजे नाईट भी रखी गयी थी। इसके बाद हमने डीजे पर जमके डांस किया। रात 12 बजे तक हमने खूब मस्ती की उसके बाद हम सब थक चुके थे और उसके बाद हम जाकर सो गए।

अगली सुबह हम एक एडवेंचर कैंप में शामिल हुए और हमने पूरा दिन कई एडवेंचर एक्टिविटीज की। हमने रस्सी के सहारे नदी पार करना भी सीखा। इसके अल्वा हमने नेट पर चढ़ना, रोप वे और राफ्टिंग आदि भी किये। रात को हमने कैंप के बाहर बोन फायर किया और खूब मस्ती की। पूरा दिन इन्ही एडवेंचर एक्टिविटीज से भरा हुआ था और मुझे इसमें बहुत ही मज़ा भी आया। उसके अगले दिन हम वापस हमारी बसों द्वारा चंडीगढ़ के लिए निकल पड़े और रात होते हुए हम चंडीगढ़ पहुंच गए। इसके बाद चंडीगढ़ से हमारे लिए जयपुर के लिए दो अलग बसे बुक कराई गयी थी। हम रात को खाना खाना खाने के बाद बसों द्वारा जयपुर के निकल गए। बहुत थकान के कारण मैंने जयपुर आने तक का सफर सोकर ही तय किया। अगली सुबह 10 बजे तक हम जयपुर पहुंच गए। इसके बाद वहा से अपने अपने घरो को निकल गए। यह एक बहुत ही मजेदार को एडवेंचर से भरा हुआ टूर था। मैं अभी तक इस अनुभव को नहीं भूल पाया हूँ और जीवन में कभी नहीं भूल पाउँगा।

यात्रा वृतांत
हितेश मौर्य (Hitesh Mourya)
जयपुर