July 29, 2021

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अधिकतर शहद के ब्रांड्स शहद में ‘चीनी के सिरप’ की मिलावट करते है : विज्ञानं और पर्यावरण केंद्र (CSE) की रिपोर्ट

nakli shahad

दुनिया में शहद के कई बड़े व छोटे ब्रांड्स मौजूद है। दुनियाभर के लोग इनकी शुद्धता के दावों पर भरोसा करके इन ब्रांड्स के शहद को काम में लेते है। लेकिन हाल ही में विज्ञानं और पर्यावरण केंद्र (सीएसी) की स्टिंग रिपोर्ट में पाया गया कि अधिकतर शहद के ब्रांड्स अपने शहद में चीनी के सिरप की मिलावट करते है। स्टिंग रिपोर्ट के अनुसार सबसे प्रमुख और कम प्रसिद्द ब्रांडो के शहद में चीनी के सिरप की मिलावट पायी गयी है। इस बारे में मीडिया के साथ बात करते हुए सीएसी की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि जाँच में पाया गया कि भारतीय बाजारों में 13 मेसे 10 कंपनियों द्वारा बेचे गए शहद में चीनी के सिरप की मिलावट है। इसके अध्ययन के लिए 13 कम्पनियो के 22 नमूने लिए गये थे।

हालाँकि इन सभी शहद के ब्रांडो ने इन सभी आरोपों को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि ये सभी आरोप जानबूझकर लगाए गए है और इसके जरिए भारतीय प्राकृतिक शहद उद्योग को बदमान करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा दिलचस्प बात यह है कि दो साल पहले कंस्यूमर वॉइस द्वारा किये गए एक अध्ययन में 10 शीर्ष शहद ब्रांडो का परीक्षण किया गया था और यह पाया गया कि वे सभी शुद्धता और प्रमाणिकता के मुद्दों से पीड़ित थे। सीएसी की रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि किस तरह से संशोधित चीनी के सिरप को चीन से आयात किया जा रहा था, इस सिरप के साथ मिलवाती शहद भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा प्रमाणित परीक्षणों को पारित करने में कैसे कामयाब रहा और आखिरकार कैसे परमाणु चुम्बकीय अनुनाद (एनएमआर) परीक्षण मिलावट को उजागर करने में कामयाब रहे।

दिलचस्प बात यह है कि एफएसएसएआई सोने के मानक एनएमआर परीक्षण का उपयोग केवल भारत से निर्यात होने वाले शहद के परीक्षण के लिए करता है, न कि घरेलू उपयोग बाजारों में बेचे जाने वाले शहद के लिए। पतंजलि के एमडी आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हम 100% प्राकृतिक शहद बनाते है जिसने एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित 100 से अधिक मानकों पर शुद्ध परीक्षण किया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि यह प्रसंस्कृत शहद को बढ़ावा देने के लिए भारतीय प्राकृतिक शहद उद्योग को बदनाम करने की साजिश है। गुजरात में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट (एनडीडीबी) से सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग लाइवस्टॉक एंड फ़ूड (CALF ) में इन ब्रांडो के नमूनों का पहली बार परीक्षण किया गया था। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अनुसार लगभग सभी शीर्ष ब्रांडो ने शुद्धता के परीक्षणों को पारित किया, जबकि कुछ छोटे ब्रांडो ने C4 चीनी का पता लगाने के लिए परीक्षणों को विफल कर दिया। यह गन्ने की चीनी का उपयोग करने वाली बुनियाद मिलवट है। लेकिन जब न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेसोनेंस (एनएमआर) का उपयोग करके समान ब्रांडो का परीक्षण किया गया तो इसमें पाया गया कि सभी छोटे बड़े शहद के ब्रांडो द्वारा संशोधित चीनी के सिरप की मिलावट की जा रही है और इन परीक्षणों में लगभग सभी ब्रांड्स विफल हो गए। 13 ब्रांडो के परीक्षणों में से केवल तीन ने एनएमआर परीक्षण पारित किया जो जर्मनी में एक प्रयोगशाला द्वारा किया गया।

सीएसी ने यह भी दावा किया कि इसने चीनी व्यापार पोर्टलों को ट्रैक किया जो फ्रक्ट्रोज़ सिरप के विज्ञापन थे जो जाँच को रोकने के लिए परीक्षणों को बाईपास कर सकते है। यह भी पाया गया कि इन्ही चीनी कम्पनियो ने इस फ्रक्ट्रोज़ सिरप का विज्ञापन किया था जो C3 और C4 परीक्षणों  को हरा सकते थे। यह सिरप भारत को भी निर्यात किया गया था। सीएसी की महानिदेशक सुनता नारायण ने कहा कि उन्होंने तब और अधिक जानने के लिए एक अंडरकवर ऑपरेशन किया। चीनी कंपनियों ने सीएसी को सूचित किया कि  भले ही 50-80 प्रतिशत शहद सिरप के साथ मिलवाती हो लेकिन यह सभी परीक्षणों को पारित करेगा। उन्होंने कहा कि सिरप के एक नमूने को बाईपास परीक्षणों के बाद चीनी कंपनी द्वारा कस्टम वर्णनों के माध्यम से प्राप्त करने के लिए पेण्ट वर्णक के रूप में भेजा गया था। दुनिया में महामारी फैली हुई है और इससे बचने के लिए हम शहद का उपयोग भी कर रहे है लेकिन यह मिलवाती शहद हमारे लिए उपयोगी साबित नहीं होगा। सुनीता नारायण ने कहा कि हमे सार्वजनिक परीक्षण के माध्यम से भारत में प्रवर्तन को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया जाये। सरकार को उन्नत तकनीकों का उपयोग करके नमूनों का परीक्षण करना चाहिएऔर परीक्षण के परिणामो को सार्वजनिक करना चाहिए।

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