June 25, 2021

वृतांत – Vritaant

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किसान आंदोलन : केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने किसानो के लिए आठ पन्नो का पत्र जारी किया, पीएम मोदी ने सभी किसानो से इस पर ध्यान देने की अपील की

agriculture minister writes letter for farmers, वृतांत - Vritaant

केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में कई दिनों से सड़को पर आंदोलन कर रहे किसानो के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने एक आठ पन्नो का पत्र जारी किया है जिसमे किसानो की परेशानियों का हल बताया गया है। यह पत्र एक पार्टी की बैठक के बाद जारी किया गया जिसमे प्रमुख नेताओ जैसे केंद्रीय मंत्री अमित शाह, पियूष गोयल, निर्मला सीतारमण, तोमर और पार्टी के प्रमुख जेपी नड्डा ने भाग लिया था। कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने किसानो को एक पत्र लिखकर, विनम्र संवाद की कोशिश करके अपनी भावनाओ को व्यक्त किया है और सभी योगदानकर्ताओ से इसे पढ़ने का अनुरोध किया है। इसके बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर सभी देशवासियो से इस अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचाने का आग्रह किया है।

इस पत्र में किसानो के साथ संवाद बनाये रखने की बात कही गयी है। कृषि कानून जो इस क्षेत्र में बड़े सुधार के रूप में है का अर्थ यह है कि किसानो की आय को बिचोलियो से मुक्त कर उन्हें देश में किसी भी बाजार में अपनी फसल को बेचने की अनुमति देना है। किसानो को डर है कि इन कानूनों के बाद बाजारों और सरकार द्वारा प्रस्तावित एमएसपी को समाप्त कर दिया जायेगा। इस पत्र के जरिए किसानो को आश्वासन दिया गया है कि कृषि उत्पादकों या मंडियों को जहा उन्हें अपनी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा। इसके जरिए एमएसपी को और मजबूत किया जा रहा है। इसके अलावा किसानो को यह भी चिंता है कि शायद उनकी जमीनों को छीन लिया जायेगा। लेकिन इस पत्र के जरिए कहा गया है कि किसानो की एक इंच जमीन को भी उनसे दूर नहीं किया जायेगा।

हालाँकि किसानो ने केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सभी आश्वासनों को मानने से इनकार कर दिया था और तीनो कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए ही अड़े रहे है। इसके अलावा किसानों ने अगली वार्ता के लिए भी कहा था कि अगर केंद्र सरकार तीनो कृषि कानूनों को रद्द करने के बारे में बात करेगी तभी वे केंद्र की बात सुनेंगे, इसके अलावा वे आंदोलन को वापस नहीं लेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा लिखे गए पत्र में भी किसानो आश्वासन देने की कोशिश की गयी है। हाल ही में इस आंदोलन को तेज होता देख सुरमे कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है और एक समिति बनाकर किसानो के साथ वार्ता करने और आंदोलन को समाप्त करने के निर्देश दिए है।

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