January 20, 2022

वृतांत – Vritaant

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दिल्ली हाई कोर्ट ने फ्यूचर ग्रुप डील के लिए सुनाया अहम् फैसला, रिलायंस को डील के लिए मंजूरी मिली

दिल्ली उच्च न्यायलय ने सोमवार को फ्यूचर रिटेल लिमिटेड के विलय को रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमटेड के साथ मंजूरी दे दी। जबकि अमेज़न इंक को उचित क़ानूनी मंचो में इस विलय के विरोध को जारी रखने की अनुमति दे दी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ई-कॉमर्स दिग्गज को फ्यूचर ग्रुप के अम्बानी के रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को अपनी सम्पत्ति बेचने की योजना पर आपत्ति जताने के लिए कोई रोक नहीं है। लेकिंन बोर्ड द्वारा विलय को मंजूरी किसी भी वैधानिक क़ानूनी प्रावधानों के उल्लंघन में नहीं थी और दोनों पक्ष नियामकों से समझौते के लिए मंजूरी लेने के लिए स्वतंत्र थे। इसके साथ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड और कॉर्पोरेट मामलो के मंत्रालय के सामने एक नयी लड़ाई होने की उम्मीद है जहा अमेज़न इस सौदे को चुनौती दे रहा है।

प्रतियोगिता आयोग (सीसीआई) ने नवंबर में लेनदेन की मंजूरी  दे दी थी। 12 अगस्त 2019 को अमेज़न ने फ्यूचर कूपन प्राइवेट(एफसीपीएल) में 49% का अधिग्रहण किया था इसके बाद फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) के 9.82% हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया था। अमेज़न के साथ एफसीपीएल डील में कहा गया था कि एफआरएल की रिटेल परिसम्पत्तियों का कोई भी हस्तांतरण एफसीएल और प्रवर्तकों द्वारा रिलायंस सहित किसी भी कंपनी को अमेज़न की अनुमति के बिना प्रस्तावित नहीं किया जायेगा। किशोर बियानी की अगुवाई वाली फ्यूचर रिटेल लिमिटेड ने नवंबर में दिल्ली उच्च न्यायलय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमे रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ 24,713 करोड़ रूपये के सौदे के संबंध में सिंगापुर इंटरनेशनल ओर्बिटेशन सेंटर(एसआईएसी) द्वारा पारित मध्यस्थता आदेश के खिलाफ रहत की मांग की गयी थी।

एसआईएसी ने प्रतिबंधित पार्टी से किसी भी फंडिंग को सुरक्षित करने के लिए फ्यूचर रिटेल को प्रतिबंधित करने या उसकी सम्पत्तियो का निपटान करने या किसी भी प्रतिभूतियों को जारी करने के लिए कोई कदम उठाने से अमेज़न के पक्ष में अपना फैसला सुनाया था। इस सौदे का विरोध करते हुए अमेज़न में सेबी को अब तक दो  पत्र लिखे है जिसमे नियामक से लेनदेन को मंजूरी नहीं देने का आग्रह किया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने फ़िलहाल फ्यूचर रिटेल लिमिटेड और रेलाइन्स रिटेल को सौदे के लिए मंजूरी दे दी है और अमेज़न को भी विरोध की छूट दी है ताकि वह अन्य क़ानूनी सहायता से इस सौदे का विरोध कर सके। हाई कोर्ट ने आगे कहा कि दिग्गज रिटेल कंपनी अमेज़न ने केवल सुरक्षात्मक अधिकारों का निर्माण करके अपने निवेश को सुरक्षित कर रहे है बल्कि भारतीय कानून में किसी भी बदलाव के चिंतन में पूर्व अधिकार भी बना रहे है जो अमेज़न को प्रयाप्त हिस्सेदारी प्रदान करने की अनुमाई नहीं देगा।

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