July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

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भविष्य में होगा परिवहन का पांचवा नया साधन, जानिए क्या है हाइपरलूप तकनीक

परिवहन एक ऐसी युक्ति है जो दुनिया को आपस में जोड़ती है। दुनिया में परिवहन के फ़िलहाल चार साधन उपलब्ध है, जिनमे सड़क परिवहन, रेल परिवहन, हवाई परिवहन और जल परिवहन मुख्य साधन है। कई दशको और सदियों से इंसानो ने इन्ही साधनो का उपयोग परिवहन के लिए किया है। लेकिन अब इंसान ने एक और नए परिवहन के साधन के रूप में एक नयी तकनीक की खोज कर ली है। इस तकनीक का नाम हाइपरलूप है। यह दुनिया का सबसे तेज परिवहन का साधन है। इसकी गति लगभग 12,00 किमी प्रति घंटा होगी। इसका मतलब यह हवाई जहाज से भी तेज चलेगा। हाइपरलूप को एक बेलनाकार पाइप नुमा लूप के रूप में बनाया जायेगा। इस लूप के अंदर यात्रियों को बैठने के लिए बेलनाकार पोड को प्रयोग में लिया जायेगा, जिसमे हवाईजहाज जैसी बैठने की सुविधा मिलेगी।

कैसे काम करता है हाइपरलूप ?

जैसा की हम जानते है कि सड़क, पटरी, हवा और जल में चलने वाले परिवहन के साधन घर्षण के सहारे चलते है। जब कोई गाड़ी सड़क पर चलती है तो उस पर धरातल का घर्षण काम करता है, रेल पर पटरी घर्षण लगती है, पानी में चलने वाले जहाज पर जल द्वारा घर्षण लगाया जाता है और हवाईजहाज पर हवा के द्वारा अवरोध लगाया जाता है। इसके कारण चलने वाले साधनो की गति कम हो जाती है और इनको तेज गति से चलाने के लिए अधिक ईंधन की आवश्यकता होती है। लेकिन हाइपरलूप तकनीक के द्वारा हवा और सतह के अवरोध को हटा दिया गया है। इसके लिए इस तकनीक में चुम्बकीय सिद्धांत को काम में लिया गया है। जिस प्रकार चुम्बकीय समान ध्रुव एक दूसरे को दूर धकेलते है उसी के सिद्धांत पर हाइपरलूप को डिज़ाइन किया गया है।

जिस बेलनाकार लूप में पोड को रखा जायेगा वो किसी एक चुम्बकीय ध्रुव का बना होगा और लूप के अंदर चलने वाला पोड भी उसी चुम्बकीय ध्रुव का बना होगा जिससे बाहरी लूप बना है। इससे पोड कभी भी लूप के संपर्क में नहीं आ पायेगा और पोड हवा में तैरता रहेगा। इस तरह सतह के घर्षण को खत्म कर दिया जायेगा। इसके बाद हवा के अवरोध को खत्म करने के लिए बाहरी लूप पर वैक्यूम लगाए जायेंगे जो लूप के अंदर की हवा को बाहर की तरफ खींच लेंगे। इस तरह से लूप में सतह और हवा दोनों के अवरोध को खत्म कर दिया जायेगा। लूप को आगे की तरह चलाने के लिए लीनियर मोटर का प्रयोग किया जायेगा। किसी भी घर्षण और अवरोध के न होने से हाइपरलूप की गति बहुत अधिक बढ़ जाएगी। इतनी तेज गति से देश के किसी भी कोने में मात्र कुछ ही समय में सफर तय किया जा सकेगा। इस तकनीक से दुनिया के बीच की दुरी और कम हो जाएगी।

इस तकनीक की खोज 200 वर्ष पूर्व ही ब्रिटेन के वैज्ञानिको द्वारा की जा चुकी थी लेकिन उस समय प्रयाप्त साधन नहीं होने की वजह से कोई भी इस तकनीक को आगे नहीं बढ़ा पाया। साल 2013 में टेस्ला और स्पैक्स जैसी कंपनियों के मालिक एलोन मस्क ने इस तकनीक को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव रखा। जिसके बाद अमेरिका के लॉस वेगास में वर्जिन कंपनी के द्वारा हाइपरलूप तकनीक का दो यात्रियों के साथ परीक्षण भी किया गया। इसी तरह के सफल परीक्षणों के बाद हम जल्द ही भविष्य में हाइपरलूप को पूरी दुनिया में देख पाएंगे।

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