June 18, 2021

वृतांत – Vritaant

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किसान आंदोलन : किसानो ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना आंदोलन तेज किया, और अधिक संख्या में पंजाब और हरियाणा के किसान सड़को पर उतरे

मोदी सरकार किसान आंदोलन पर क्यों है चुप ?, वृतांत - Vritaant

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। किसानो को आंदोलन करते हुए 17 दिन हो गए है और किसान इतने दिनों से कृषि कानूनों को निरस्त कराने के लिये सड़को पर उतरे हुए है। किसान नेताओ के साथ सरकार के द्वारा की गयी बातचीत किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच पायी है। सरकार ने कहा है कि वे किसानो से अगली वार्ता के लिए तैयार है लेकिन अभी तक दोनों तरफ से कोई पहल नहीं की गयी है। किसान नेताओ का कहना है कि वे अगली वार्ता तभी करेंगे जब सरकार केवल तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के बारे में ही वार्ता करेगी, इसके अलावा वे आंदोलन को वापस नहीं लेंगे। इसके अलावा किसानो ने एलान किया कि वे अब इस आंदोलन को और भी तेज करेंगे। इस एलान के बाद और भी अधिक संख्या में किसान आंदोलन से जुड़े और जमकर सड़को पर प्रदर्शन किया।

शुक्रवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने केंद्र की प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि अभी तक आंदोलनकारी किसानो से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। दुरी ओर किसानो ने कहा कि केंद्र सरकार को किसानो को सूचित करना चाहिए कि वे अगली बैठक करना चाहते है। शुक्रवार को आधी रात को किसानो ने दिल्ली-चंडीगढ़ राष्ट्रिय राजमार्ग पर करनाल और पानीपत के टोल प्लाजा पर कब्ज़ा कर लिया, जिससे टोल फ्री कर दिया गया और किसानो ने टोल फ्री आंदोलन की शुरुवात कर दी। इसके अलावा किसानो ने एलान किया है कि वे दिल्ली की ओर जाने वाले सभी राजमार्गो को टोल मुक्त करेंगे। किसानो द्वारा दिल्ली की ओर जाने वाले सभी टोल प्लाजा पर कब्ज़ा ज़माने के बाद बिना किसी टोल के वाहनों को गुजरने दिया जायेगा। सभी टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों से कोई टोल नहीं लिया जायेगा।

दिल्ली की ओर जाने वाले सभी राजमार्गो पर भारी संख्या में पंजाब और हरियाणा के किसान अपने ट्रेक्टर और ट्रॉलियों से साथ पहुंचे और सड़को पर ही अपना डेरा जमा लिया। किसानो ने दिल्ली- चंडीगढ़ के राजमार्ग को जाम कर दिया है और अपना यही पर अपना धरना प्रदर्श शुरू कर दिया है। सरकार द्वारा कृषि कानूनों के बारे कोई प्रतिक्रिया नहीं देने के कारण किसानो ने आंदोलन भड़का दिया है। इससे पहले किसानो ने एलान किया था कि वे देशभर में ट्रेनों को भी रोकेंगे। इसके अलावा उन्होंने रिलायंस जिओ और राजमार्गो पर पड़ने वाले रिलायंस के स्टोर्स का भी बहिष्कार किया था। कई विपक्षी पार्टियों से किसानो को इस आंदोलन के लिए समर्थन मिल रहा है और कई राजनेता किसानो के साथ इस आंदोलन में भाग ले रहे है।