July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

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किसान आंदोलन : प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष से की किसानो को गुमराह नहीं करने की अपील

देश में कृषि कानूनों का मुद्दा सरकार के लिए परेशानियों का कारण बन गया है। कई दिनों से देश में कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसान अभी भी आंदोलन में डटे हुए है और केंद्र को नए कृषि कानूनों के खिलाफ कड़ा प्रदर्शन कर रहे है। किसानो के इस आंदोलन में किसानो को कई विपक्षी पार्टियों का भी समर्थन मिल रहा है और कई विपक्षी नेताओ ने भी किसानो के साथ आंदोलन में भाग लिया है। देश में कई संघटनो ने केंद्र के खिलाफ किसानो के साथ समर्थन दिखाया है। किसानों ने केंद्र सरकार के हर आश्वासन को मानने से इनकार कर दिया है और आंदोलन को तेज कर दिया है। इस आंदोलन को तेज होता देख सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप करते हुए नयी समिति के साथ वार्ता करने के निर्देश दिए है। केंद्र सरकार का मानना है कि किसानो को विपक्ष द्वारा गुमराह किया जा रहा है और वे उन्हें कृषि कानूनों के फायदे से ज्यादा नुकसान होने के बारे में बता रहे है।

हाल ही प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मामले में चुप्पी तोड़ी है और विपक्ष से अपील की है कि वे किसानो को गुमराह न करे और उनके हित के बारे में सोचे। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को मध्यप्रदेश के किसान सम्मलेन में थे और उन्होंने इस बारे में खुलकर बात की है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अगर किसी को शंका है तो वे हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर कर बात करने के लिए भी तैयार है। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि इन तीनो कृषि कानूनों को सोच समझकर बनाया गया है और इसके लिए दशकों से इस पर चर्चा चल रही है। पिछली सरकारों ने भी इन कानूनों को लाने के लिए विचार किये है। सरकार चाहती है कि किसानो की उन्नति हो और उन्हें उसकी फसल को सही जगह पर बेचने की आजादी मिले।

प्रधान मंत्री ने कहा कि मैं सभी राजीनीतिक दलों से अपील करता हूँ कि आपके पुराने घोषणा पत्रों पर ही ध्यान देकर ये कानून लाये गए है और इसके लिए आप मुझे क्रेडिट मत दीजिए, मैं आपके पुराने घोषणा पत्रों को इसके लिए क्रेडिट देना चाहता हूँ। इसके अलावा उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की है कि वे किसानो को भ्रमित न करे और किसानो के हित में होने वाले प्रयासों को रोकने की कोशिश न करे। किसानो ने फ़िलहाल इसके लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और इसके अलावा किसानो के समर्थन में और भी नए दल शामिल हो गए है। हाल ही में चिपको आंदोलन के बहुगुणा ने भी किसानो का समर्थन किया है। हालाँकि अभी किसानो और सरकार के प्रतिनिधियों की वार्ता बाकि है जिसके बाद पता चल पायेगा कि किसान आंदोलन का क्या नतीजा होता है।

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