June 17, 2021

वृतांत – Vritaant

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राजस्थान में स्कूलों की फीस के मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 70% तक फीस ले सकते है स्कूल

rajasthan high court on school fees, वृतांत - Vritaant

राजस्थान में स्कूलों ने फीस के मामले में कई दिनों से बच्चो की ऑनलाइन पढाई को है। राजस्थान सरकार ने कुछ महीने पहले ही राजस्थान और सीबीएसई बोर्ड से क्रमशः 40 और 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम को कम कर दिया था। जिसके बाद सरकार द्वारा कहा गया था कि स्कूल केवल उनके पाठ्यक्रम के अनुसार ही अभिभावकों से फीस ले पाएंगे। राजस्थान बोर्ड के स्कूल केवल 60 प्रतिशत तक ही फीस ले सकते है और सीबीएसई बोर्ड के स्कूल 70 प्रतिशत तक ही फीस ले सकते थे। इसके लिए राजस्थान में सभी स्कूलों ने कड़ा विरोध किया और कहा कि कई कई महीनो से बच्चो को ऑनलाइन पढ़ा रहे शिक्षकों को सैलरी कैसे दे पाएंगे, ऐसे में बच्चो की पढाई रुक जाएगी। इसके विरोध में स्कूलों के संघ ने मिलकर बच्चो की ऑनलाइन क्लास को बंद करवा दिया और इस फैसले को बदलने की मांग की। हाल ही में इस मामले को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है जिसके तहत अब राज्य के सभी स्कूल केवल 70 प्रतिशत तक ही फीस ले सकते है।

इस फैसले के बाद राज्य के स्कूल और अभिभावक इस फैसले से खुश नहीं है। स्कूल चाहते है अभिभावक बच्चो की पूरी फीस अदा करे और अभिभावकों का कहना है कि केवल 30 से 40 प्रतिशत तक फीस के भुगतान की अनुमति मिलनी चाहिए। इस फैसले के बाद स्कूल संचालक और अभिभावक दोनों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती देने का फैसला किया है। दोनों पक्ष हाई कोर्ट के फैसले से खुश नहीं होने के कारण अब सुप्रीम कोर्ट की और रुख करेंगे। फ़िलहाल अभी कक्षा 8 तक के विधार्थियो की फीस के बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है। केवल 9 से 12 तक के विधार्थियो को ही स्कूलों में बुलाया जा रहा है। कक्षा 8 तक के विधार्थियो की फीस के बारे में फैसला उनके स्कूल खुलने के बाद लिया जायेगा।

राज्य सरकार ने महामारी के चलते बच्चो के पाठ्यक्रम को कम किया था और जितना पाठ्यक्रम कम किया गया है उतनी ही फीस लेने के निर्देश दिए थे। जब स्कूलों ने इस फैसले का विरोध किया तो सरकार ने कहा कि महामारी कानून के तहत सरकार के पास स्कूलों की फीस तय करने का अधिकार है। इसके अलावा निज्जी स्कूलों को कहना है कि सरकार स्कूलों की फीस तय नहीं कर सकती है। स्कूलों की फीस केवल समिति के द्वारा तय की जाती है। सरकार के फैसले से राहत के लिए स्कूल हाई कोर्ट के फैसले के इंतजार में थे कि कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आएगा। लेकिन अब निजी स्कूलों का कहना है कि कोर्ट ने राहत देने के बजाय हमारे लिए मुश्किलें बढ़ा दी है। इसके अलावा अभिभावक भी इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।