July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

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नई फिल्म ‘वीरता परवम’ में नक्सली आतंकी के किरदार में दिखाई देंगे राणा दग्गुबती, तेलगु फिल्म इंडस्ट्री में भी बॉलीवुड का असर

फिल्मे ऐसा साधन है जो हमरे समाज पर सबसे अधिक प्रभाव डालती है और हमरे देश की फिल्म इंडस्ट्री पूरी दुनिया में सबसे बड़ी है क्योकि हमरे देश में हर साल सबसे ज्यादा फिल्मे बनती है। इसलिए हमरे देश का एक बहुत ही बड़ा दर्शक वर्ग है जो कई भाषाओ में बनी हुई फिल्मो पसंद करता है। बॉलीवुड के बाद हमरे देश की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री है। तेलुगु फिल्मो को दक्षिण भारत के अलावा भी पुरे भारत में खास पसंद किया जाता है। उत्तरी भारत में तेलुगु फिल्मो के हिंदी संस्करणों को बहुत अधिक देखा जाता है। इसके अलावा तेलुगु फिल्मो के हिंदी रिलीज़ किये गए संस्करणों को यूट्यूब पर करोडो दर्शक देखते है और ये फिल्मे यूट्यूब पर कई सरे रिकॉर्ड बनाती है। तेलुगु फिल्मो की सबसे खास बात यह होती है कि इनमे हमारी देश की संस्कृति का बहुत सम्मान किया जाता है। इसके अलावा ये फिल्मे पारिवारिक मूल्यों, परम्पराओ और संस्कारो पर आधारित होती है। इसलिए तेलुगु और तमिल फिल्मो को बॉलीवुड दे अधिक पसंद किया जाता है। लेकिन अब दक्षिण भारत की फिल्मो में भी बॉलीवुड का असर दिखने लगा है क्योकि हाल ही में राणा दग्गुबती की फिल्म ‘वीरता परवम’ का टीजर रिलीज़ किया गया है और इस फिल्म में राणा दग्गुबती नक्सली आतंकी के रूप में नजर आ रहे है।

हमने कई सालो से देखा है कि कैसे नक्सली हर हमारे हजारो जवानो को जंगलो में मार देते है। उनके हथियारों और सामान को लूट लिया जाता है और अपने हक़ के नाम पर ये देश को खोखला करते है। नक्सल क्षेत्रो में यही नक्सली आदिवासियों के लिए परेशानियों का कारण बनते है और उन्हें भड़काकर सरकार और देख के खिलाफ खड़ा कर दिया जाता है। इसके अलावा एक तरफ ये लोग सरकार से विकास की मांग करते है और जब सरकार द्वारा वहा पर किसी योजना पर कार्य किया जाता है तो ये ही नक्सली वहा पर बम धमाके करना, गोलिया बरसाना और काम को बंद करवा देना, ऐसे काम ये लोग करते है। जब हमारी भारतीय सेना के जवान वहा पर सुरक्षा के लिए जाते है तो उनके रास्ते रोक लिए जाते है और सेना पर हमला किया जाता है जिससे हर साल कई जवान वीरगति को प्राप्त हो जाते है। ऐसे देश के आतंकियों को बॉलीवुड और कला -साहित्य वर्ग के लोग क्रांतिकारी के रूप में दिखाते है।

बॉलीवुड तो कई सालो से ऐसे मुद्दों पर फिल्मे बनाता आया है और अपनी फिल्मो में इन नक्सली आतंकियों को क्रांतिकारी, हक़ के लिए लड़ने वाला और बहुत ही अच्छा दिखाया जाता है। बॉलीवुड ने हमेशा अपनी फिल्मो में लाल आतंकियों को समर्थन किया है और कम्युनिस्ट धारणा का प्रचार किया है। ऐसे राणा दग्गुबती की फिल्म में भी दिखाया गया है। राणा दग्गुबती लाल आतंकी के रूप में नजर आ रहे है और फिल्म के टीजर में वे कम्युनिस्ट पार्टी के झंडे उठाये प्रशासन से लड़ते हुए नजर आ रहे है। ऐसी फिल्मो में दिखाया जाता है कि ऐसे नक्सल आतंकी जो हमारे देश की सेना पर हमला करते है और हमारे ही देश के विकास में बाधा डालते है ऐसे लाल आतंकियों को साहित्य और कला का क्षेत्र बहुत ही गर्वता से क्रांतिकारी दिखाता है। बॉलीवुड तो अपनी पहले ही देश को तोड़ने वाली फिल्मे बनता है लेकिन देश का और देश की संस्कृति का सम्मान करने वाली तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री से ये उम्मीद नहीं की जा सकती थी।

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