June 18, 2021

वृतांत – Vritaant

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किसान आंदोलन : किसान नेता राकेश टिकैत भावुक होकर आत्महत्या करने की चेतावनी के बाद किसानो ने आंदोलन को तेज किया, किसान संघठनो ने की महा पंचायत

farmers leader rakesh tikait warns to suicide, वृतांत - Vritaant

कृषि कानूनों के विरोध में किसानो द्वारा 26 को गणतंत्र दिवस के मौके पर निकाली गयी ट्रेक्टर रैली ने हिंसक रूप ले लिया जिसमे किसान और दिल्ली पुलिस आमने सामने हो गए थे। इसके बाद किसानो और पुलिस के बीच हुई तनातनी में एक किसान की ट्रेक्टर पलटने से मौत हो गयी। इसके अलावा सैकड़ो पुलिस कर्मी गंभीर घायल हो गए। किसानो के कई समूह अपने निर्धारित मार्गो के भटक कर लाल किले पर पहुंच गए और उन्होंने अपने धार्मिक झंडो को लाल किले पहरा दिया। इस बात के लिए पुरे देश में किसानो की कड़ी आलोचना हुई और देश के कई लोगो ने किसानो का समर्थन करना छोड़ दिया। किसानो की यह स्थिति देखकर किसान नेता राकेश टिकैत ने सरकार को इसका दोषी ठहराया और यह कहते हुए उनके आंसू निकल गए कि अगर सरकार ने इन कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया तो वे आत्महत्या कर लेंगे।

गणतंत्र दिवस को हुई हिंसा के बाद किसान आंदोलन खत्म होने लगा था लेकिन राकेश टिकैत के आंसुओ ने किसानो में फिर से जोश भर दिया और किसानो ने अपने आंदोलन को तेज कर दिया। इसके बाद किसानो ने तिरंगे के साथ मार्च निकाला और आंदोलन का साथ छोड़ चुके किसानो को वापस मनाने के प्रयास किये। किसानो ने अब फिर से आंदोलन को जोरो शोरो से शुरू कर दिया है। इसके बाद दिल्ली से 125 किमी दूर मुजफ्फरनगर में जीआईसी मैदान में किसानो नेताओ ने महापंचायत का आयोजन किया। इस महापंचायत में आंदोलन को अपनी मंजिल तक पहुंचाने के लिए संयम और अनुशासन के साथ आंदोलन करने का फैसला लिया गया।

इस महा पंचायत में भीड़ को अपने घर भेज दिया गया। यह महा पंचायत 3 घंटे की देरी से शुरू हुई और किसानो की भीड़ जुटती चली गयी। सभी किसान महापंचायत के फैसले के इंतजार में थे और दिल्ली कुछ करने के लिए तैयार थे। लेकिन किसान नेता राकेश टिकैत ने किसानो को घर भेज दिया और कहा कि सभी अपने जरुरी काम काज निपटा ले और दिल्ली बार्डर पर आते जाते रहे।

इस महा पंचायत में फैसला लिया गया कि आंदोलन पुरे अनुशासन के साथ आगे बढ़ेगा और देश में कोई भी अशांति नहीं फैलाई जाएगी। गणतंत्र दिवस पर किसानो की रैली में हुई हिंसा के बाद लग रहा था कि आंदोलन अब खत्म हो जायेगा क्योकि देश के कई लोगो और किसानो ने आंदोलन का साथ छोड़ किया था। लेकिन किसान नेता राकेश टिकैत के आंसुओ ने किसानो में नयी जाग्रति ला दी और फिर से किसानो ने आंदोलन को तेज कर दिया है।