June 18, 2021

वृतांत – Vritaant

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किसान आंदोलन : कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा कृषि कानूनों के मामले में दिए गए फैसले का सम्मान करती है।

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हाल ही में तीन कृषि कानूनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा सभी प्रयासों के विफल हो जाने के बाद बड़ा फैसला लिया और केंद्र सरकार के तीनो कृषि कानूनों पर अगल आदेश तक रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कोर्ट द्वारा विशेषज्ञों की एक समिति गठित जाएगी जो किसानो से उनके मुख्य मुद्दों पर वार्ता करेंगे। इसके बाद कोर्ट ने चार विशेष सदस्यों की एक समिति को किसानो के साथ वार्ता के लिए गठित किया लेकिन किसानो सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के साथ वार्ता करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा कृषि कानूनों पर रोक के बाद किसानो ने आंदोलन को खत्म करने से मना कर दिया है। इसके अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का सम्मान करती है और वे कोर्ट के आदेश के अनुसार ही आगे की कार्यवाही करेंगे।

कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने तीन कृषि कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। तोमर ने कहा कि सरकार किसानो के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करती है। सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के समक्ष अपने विचार रखेगी और सरकार बातचीत के जरिए मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रही है। मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायधीश एस ए बोबडे सहित दो अन्य मुख्य न्यायधिशो वाली पीठ ने कानूनों को संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर एक आदेश पारित किया और समिति को 10 दिन भीतर ही किसानो के साथ अपनी पहली बैठक आयोजित करने का निदेश दिया।

मामले में अगली सुनवाई को आठ सप्ताह के बाद किया जायेगा। इसी बीच किसानो ने कहा कि वे शीर्ष अदालत की गठित समिति की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करेंगे क्योकि अतीत में इसके प्रत्येक सदस्य ने कानूनों के पक्ष में बयान दिए है। किसानो ने कहा कि कोर्ट ने जिन भी लोगो को समिति में शामिल किया है वे सभी सरकारी लोग है और इन सभी ने खुलकर तीनो कृषि कानूनों का समर्थन किया है। इसलिए किसानो ने इस समिति के साथ वार्ता करने से भी मना कर दिया है।