August 4, 2021

वृतांत – Vritaant

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उत्तराखंड में कई सालो बाद फिर से टुटा ग्लेशियर, 150 लोग बहे

उत्तराखंड में सात साल बाद फिर से केदारनाथ जैसा हादसा हो गया। उत्तराखंड में इस बार ग्लेशियर टूट गया और नदी में गिर गया, जिससे एक झील बन गयी और यह झील टूटकर बाढ़ में बदल गयी। इस ग्लेशियर के मुहाने पर चमोली बांध के लिए सुरंग का काम चल रहा था। इस सुरंग को बनाने के लिए विस्पोट और कई भरी मशीनों का उपयोग किया जा रहा था। कहा जा रहा है कि इन्ही कारणों के चलते ग्लेशियर में दरार आ गयी और वह टूट कर गिर गया और तबाही बन गया। जब यह ग्लेशियर नदी में गिरा तब नदी के पास मलबा भी एकत्र था। जब यह ग्लेशियर नदी में गिरा तो यह मलबा भी इसके साथ बह गया और केदारनाथ जैसी बाढ़ का कारण बन गया।

यह हादसा इतना जल्दी हुआ कि वहा पर काम कर रहे 150 लोगो को बचने का मौका भी नहीं मिला और वे तेज बहाव के साथ बह गए। इसके अलावा सुरंग में 16 मजदुर भी काम कर रहे थे और जब यह मलबा बाढ़ के साथ बहने लगा तो वे सुरंग में ही फंस गए। लेकिन सुरंग में फंसे इन मजदूरों को दो घंटे के बाद बचा लिया गया। बाढ़ में बहे लोगो में केवल 10 लोगो के शव ही मिल पाए है और रेस्क्यू टीम लगातार बाकि लोगो को भी तलाश करने की कोशिश कर रही है।

आमतौर पर देखा जाता है कि ग्लेशियर सर्दी भी नहीं टूटते है, यानी यह हादसा प्राकृतिक हादसा नहीं हो सकता है। नंदा देवी क्षेत्र एक संरक्षित क्षेत्र है और यहाँ पर कई बांध बनाने का काम चल रहा है। यहाँ के स्थानीय लोगो द्वारा दो साल पहले कोर्ट में याचिका भी दायर की गयी, जिसमे कहा गया था कि इस क्षेत्र में बांधो के काम के कारण कई झीले बन गयी है और ये बाढ़ का कारण बन सकती है। लेकिन रविवार को दो साल बाद यह सच में बाढ़ का कारण बन गयी और और लोगो के लिए तबाही बन गयी।

जब यह ग्लेशियर नदी में गिरा तो मलबे के साथ तेज बहाव ऋषि गंगा नदी के रास्ते से सबकुछ अपने साथ बहा ले गया। इसके रास्ते में भारत और चीन की सीमा को जोड़ने वाला पूल बह गया और इसके बाद लगभग पूरा हो चूका ऋषि गंगा बिजली प्रोजेस्ट भी तबाह हो गया। इसके अलावा अन्य बिजली प्रोजेक्ट भी इस बाढ़ की चपेट में आ गया। इस बहाव ने तपोवन बिजली प्रोजेक्ट भी तबाह कर दिया और आगे बढ़ता गया। इस बिजली प्रोजेक्ट को तबाह करने के बाद बाढ़ का बहाव कम हो गया और प्रशसन ने इसके आगे आने वाले इलाको को खाली कराया। प्रकृति ने कई बार इंसानो को चेतवानी दी है, लेकिन फिर भी इंसान इस बात पर ध्यान नहीं देता है और उसे इसके लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। यह हादसा भी इसी लापरवाही का उदाहरण है और इसका पूरा जिम्मेदार प्रशासन है।

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