July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

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किसान आंदोलन : अब कंपनियों के गोदामों को निशाना बनाने की किसानो ने दी सरकार को चेतावनी

आज किसानो को केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानो को दिल्ली की सड़को पर आंदोलन करते हुए 100  दिन से ज्यादा हो गये है लेकिन अभी तक यह आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और न ही सरकार द्वारा किसानो को राहत देने की कोशिश की गयी है। किसानो का यह आंदोलन पिछले साल नवंबर में शुरू किया गया था जो अभी तक भी जारी है। किसानो ने सरकार से अपनी मांगो को मनवाने के लिए कई तरीके अपना के देख लिए है लेकिन सरकार ने अभी तक किसानो की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है और ना ही इस आंदोलन को खत्म करने का प्रयास किया गया है। अब किसान नेता राकेश टिकैत ने सरकार को नयी चेतवानी दी है और कहा है कि वे अब कंपनियों के गोदामों को निशाना बनाएंगे अगर सरकार उनकी मांगो को स्वीकार नहीं करती है।

उन्होंने सरकार को धमकी दी है कि अगर केंद्र सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती है तो वे अब कंपनियों के गोदामों पर धावा बोल देंगे। राकेश टिकैत ने सरकार को धमकी भरे शब्दों में चेतवानी दी है कि अगर केंद्र सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती है अब किसान दूसरी कार्यवाही करने को तैयार है और इसमें वे अब कंपनियों के गोदामों को नुकसान पहुचायेंगे और गोदामों को ध्वस्त कर देंगे। हाल ही किसान नेता राकेश टिकैत ने किसान महा पंचायत बुलाई जिसमे उन्होंने कहा कि देश में कई निजी कंपनियों ने नए कानूनों के आने के बाद नए गोदामों को निर्माण कर लिया है और अब किसानो द्वारा उगाये गए अनाज का भण्डारण करना शुरू कर दिया है। अब किसान ऐसी कंपनियों के गोदामों को ध्वस्त करने की तैयारी कर रहे है और इसके लिए उन्होने पहले से ही सरकार को चेतावनी जारी कर दी है।

इसके अलावा राकेश टिकैत ने महा पंचायत में कहा कि भाजपा सरकार बैंको, बीमा कंपनियों और अन्य सरकारी विभागों को निजी कंपनियों को बेचने की तैयारी कर रही है। सरकार योजन लाने जा रही है जिसमे अब दूध, बिजली, फ़र्टिलाइज़र, बीज और मोटर वाहनों की मार्केटिंग निजी कंपनियों के हाथ में चली जाएगी जिसके बाद किसानो का और भी अधिक शोषण होगा। इसके अलावा उन्होंने देश के युवाओ को भी आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया है और कहा है युवाओ कृषि में अब रोजगार के अवसर तलाशने चाहिए जिससे किसानो को सरकार की ख़राब योजनाओ से बचाया जा सके। हालाँकि किसानो की इस चेतवानी के बाद सरकार द्वारा कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी गयी है लेकिन किसानो ने अपनी मंशा साफ कर दी है।

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