January 19, 2022

वृतांत – Vritaant

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भारत में क्यों बढ़ रही है ऑक्सीजन की कमी, इस कमी को रोकने के क्या समाधान हो सकते है ?

भारत में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में कोरोना वायरस के कारण मरीजों को ऑक्सीजन की बहुत ज्यादा आवश्यकता पड़ रही है। देश के कई राज्यों के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी की सूचनाएं आ रही है। अब सरकार ने देश में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए 50,000 मिट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन को आयात करने की योजना बनाई है। इसके लिए सरकार स्वास्थय और परिवार कल्याण मंत्रालय को निविदा जारी करने के आदेश भी दे दिए है। देश में सबसे ज्यादा सक्रीय कोरोना मरीज महाराष्ट्र में है और सबसे ज्यादा ऑक्सीजन के सपोर्ट वाले मरीज भी इसी राज्य में है। यह संख्या दूसरे राज्यों की तुलना में बहुत ही ज्यादा है। महाराष्ट्र को दूसरे राज्यों जैसे गुजरात से भी ऑक्सीजन की सप्लाई दी जा रही है। इसके अलावा गुजरात के जामनगर में रिलायंस के संयत्र से भी महाराष्ट्र में ऑक्सीजन दी जा रही है।

केंद्र सरकार ने इस कोरोना की महामारी को देखते हुए एम्पावर्ड ग्रुप -2 नियुक्त किया है। इस ग्रुप का कार्य आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की निगरानी करना है। इस ग्रुप ने देश में सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की मांग वाले राज्यों पर अपना ध्यान केन्द्रत किया है। देश में फ़िलहाल महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, केरल, तमिलनाडु, पंजाब और और हरियाणा राज्यों में ऑक्सीजन की सबसे ज्यादा मांग है। इस राज्यों में ऑक्सीजन की मांग को पूरा करने के लिए 17,000 टन से अधिक ऑक्सीजन की सप्लाई तीन बैचों में की जाएगी।

देश में ऑक्सीजन का सबसे ज्यादा उपयोग लोहे, इस्पात और कांच के उद्योगों में किया जाता है। वर्तमान में कई राज्य ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए ऑक्सीजन का उत्पादन कर रहे है। विशषज्ञों के अनुसार भारत में लगभग 7,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन करने की क्षमता है लेकिन इसका सबसे बड़ा हिस्सा उद्योगों में काम लिया जाता है और अस्पतालों में बहुत ही कम ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती है। कई बड़ी ऑक्सीजन का उत्पादन करने वाली कंपनियों ने अब प्रतिदिन ऑक्सीजन के उत्पादन को बढ़ा दिया है और देश के अस्पतालों में अधिक मात्रा में ऑक्सीजन की सप्लाई कराई जा रही है। इसमें सबसे बड़ा उत्पादक आइनॉक्स एयर है जो अब केवल मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन पर ध्यान दे रहा है और अन्य गैसों के उत्पादन को रोक दिया है। ऐसे ही अगर अन्य सभी उत्पादक केवल मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पाद कर देश में ऑक्सीजन की आपूर्ति को पूरा करे तो जल्द ही यह समस्या ख़त्म हो सकती है।

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