June 25, 2021

वृतांत – Vritaant

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सरकार कर रही है Corona Vaccine की तीसरी डोज की तैयारी, जानिए क्या है Masterplan of third dose of Corona virus vaccine

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कोरोना वायरस बार-बार अपना रुप बदलकर लगातार बढ़ रहा है और पूरी दुनिया इससे एक बार फिर जूझती नज़र आ रही है। covid19india.org ट्रैकर के मुताबिक दिनांक 2 अप्रेल को भारत में कोरोना पॉजिटिव की संख्या ने एक दिन में 89 हजार का आंकड़ा दर्ज किया। जबकि पिछले शुक्रवार को यह संख्या 62276 थी। इस प्रकार देश में कोरोना के कुल एक्टिव मामलों की संख्या 6 लाख 55 हजार से अधिक पहुँच चुकी है यानी स्थिति लगभग पिछले साल जैसी बनती जा रही है। लेकिन जो डर लोगों में पिछली साल दिखाई दे रहा था वह इस बार दूर-दूर कहीं नज़र आ रहा है। ना ही सरकारें इसे लेकर गंभीर दिखाई दे रही है खैर हम यहाँ बात करने वाले हैं कोरोना वैक्सीन की तीसरी डोज जिसे बूस्टर का नाम दिया है।

इस विषय पर चर्चा करते हुए कुछ सवालों के जवाब हम यहाँ आपको देने वाले हैं जैसे यह बूस्टर डोज आखिर क्या खेला है? इसकी जरुरत क्यों पड़ रही है? पहली और दूसरी डोज के कितने समय बाद यह डोज लगाई जाएगी? और कौनसी कंपनी है जो बूस्टर डोज लगाने की पूरी तैयारी कर चुकी है?

लेकिन इससे पहले हम आपको कोरोना स्ट्रेन के बारे में हम आपको बता देते हैं . कोरोना बड़ा ही चालान किस्म का वायरस है जो अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए बार-बार अपनी संरचना बदल रहा है और तेजी से बढ़ रहा है जब-जब वह अपनी संरचना बदलकर सामने आता है तो मेडिकल भाषा में कहा जाता है कि नया स्ट्रेन है। कोरोना को रोकने के लिए पहले वैक्सीन पर बात हुई और फिर उसकी दो डोज देने पर।

अब दो डोज देने की जरुरत क्यों पड़ी यह भी आपको बता देते हैं

दरअसल सालों में बनने वाली वैक्सीन को बहुत कम समय में बनाया गया इसलिए इसकी प्रभावशीलता की जांच नहीं की जा सकी। शरीर में यह असर दिखाने में 14 दिन का समय लेती है और अपना असर अगले कुछ हफ़्तों तक बनाये रख सकती है इसलिए इसके प्रभाव को थोड़े अधिक समय तक शरीर में बनाये रखने के लिए दूसरी डोज का उपाय सामने आया।

पहली और दूसरी डोज की कहानी तो समझ आ गई अब भला यह तीसरी डोज क्यों जिसे बूस्टर डोज कहा जा रहा है

बूस्टर डोज यानि की शरीर में पिछली डोज से विकसित की गई प्रतिरोधी क्षमता को एक बूस्ट दे देना जो एक लम्बे समय तक चले। अब इसकी जरुरत क्यों पड़ी चलिए समझते हैं अब चूँकि कोरोना अपना रूप बदलकर लगातार सामने आ रहा है तो अब जरुरत पड़ रही है कि वैक्सीन का प्रभाव शरीर में और अधिक लम्बे समय तक बना रहे जैसे 1 साल या उससे भी अधिक ताकि शरीर में कोरोना से लड़ने की क्षमता लगातार एक लम्बे समय तक बनी रहे और इसके संक्रमण को रोका जा सके यानी एक लम्बे समय तक हम ना इससे संक्रमित हों और ना ही किसी और को संक्रमित करें।

अब सवाल यह उठता है की दूसरी डोज के कितने समय बाद यह बूस्टर डोज लगाई जाएगी तो फ़िलहाल विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए 6 महीने का अंतराल रखा जाये और इसी तरह इसे आगे भी जारी रखा जा सकता है यानी उसके 6 महीने या 1 साल बाद फिरसे ऐसी ही एक डोज लगाई जा सकती है और यह सिलसिला तब तक चल सकता है तब तक कि कोरोना पूरी तरह ख़त्म नहीं हो जाता।

इसके ट्रायल की बात करें तो फिलहाल को-वैक्सीन बनाने वाली भारत बायोटेक ने इसके ट्रायल की तैयारी कर ली है . जिन्हें कोरोना का दूसरा टीका लग चुका है पहले यह देखा जा जायेगा कि उससे कितनी प्रतिरोधी क्षमता विकसित हुई है और फिर इसी तरह तीसरी यानि बूस्टर डोज पर भी निगरानी रखी जाएगी।

तो बस यही थी बूस्टर डोज की कहानी। कोरोना को हलके में मत लीजिये मास्क लगाइए और सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ का हिस्सा बनने से बचिए।

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