September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए लॉन्च हुआ ‘लिटिल गुरु’ मोबाइल एप, अब इस एप के जरिए संस्कृत सीख सकेंगे

भारत की सबसे पुरानी भाषा संस्कृत है और इसी भाषा से अन्य भाषाओ का भी जन्म हुआ है, इसलिए संस्कृत भाषा को अन्य भाषाओ की जननी कहा जाता है। संस्कृत भाषा हमे हमारी संस्कृति का बोध कराती है क्योकि हमारे धार्मिक ग्रन्थ भी इसी भाषा में लिखे गए है। वर्तमान में भारत में संस्कृत भाषा की पहुंच कम होती जा रही है और भारत में इस भाषा को सीखना लोगो को बहुत ही मुश्किल लगता है। हाल ही में 9 अप्रैल को इंडियन कॉउन्सिल फॉर कल्चरल रिलेशनशिप (आईसीसीआर) ने अपना 71वा स्थापना दिवस मनाया और इसी के दौरान संस्कृत भाषा को आसानी से सिखने के लिए लिटिल गुरु नामक मोबाइल एप लॉन्च किया गया। यह दुनिया पहला संस्कृत लर्निग एप है जिसमे गेम्स के जरिए आसानी से संस्कृत भाषा को सीखा जा सकता है। आईसीसीआर के स्थापना दिवस के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आईसीसीआर के छात्र भी मौजूद थे और इसी कार्यक्रम में इस एप को लॉन्च किया गया।

इस एप को बीजिंग में भारतीय एम्बेसडर विक्रम मिस्त्री और संस्कृत व भारतीय स्टडीज के छात्रों की मौजूदगी में इस एप को लॉन्च किया गया। इस एप को खास तौर पर संस्कृत भाषा को आसानी से सीखने के लिए लॉन्च किया गया है। यह एक गेमीफाइड एप है जो बहुत ही इंटरैक्टिव प्लेटफार्म के साथ आता है और इसके जरिए संस्कृत को समझना बहुत ही आसान हो जाता है। इस एप के जरिए जो लोग संस्कृत भाषा को सिखने की इच्छा रखते है वे आसानी से गेम्स, प्रतियोगिताओ और अपने साथियो के साथ बात करके आदि कई माध्यमों से संस्कृत भाषा को आसानी से सीख सकते है।

आईसीसीआर ने इस एप को बनाने के लिए गेम एप स्पोर्ट्सवीज़ प्राइवेट लिमिटेड के साथ हाथ मिलाया है। इस एप को वर्तमान की बदलती हुई टेक्नोलॉजी और पढ़ाई के तरीको को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। जो लोग संस्कृत सीखना चाहते है और उन्हें किताबो से इस भाषा को सिखने में परेशानी हो रही है तो वे प्लेस्टोर से इस एप को डाउनलोड कर सकते है और बहुत ही आसान तरीको से संस्कृत को सीख सकते है और समझ सकते है। संस्कृत भाषा को चीन सहित कई देशो ने अपना रखा है और वहा के विश्व विद्यालयों में इस भाषा का अध्ययन भी कराया जाता है। लेकिन आज भारत में सस्कृत भाषा को कई स्कूलों से हटा दिया गया जिससे यह भाषा अब भारत में लोगो से दूर होती जा रही है। इस भाषा को बचाने के लिए ही यह पहल शुरू की गयी है।

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