August 3, 2021

वृतांत – Vritaant

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जानिए कोरोना संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत क्यों पड़ रही है, भारत में ऑक्सीजन गैस का उत्पादन बढ़ा

भारत में कोरोना वायरस का प्रकोप तेजी से फैलता जा रहा है और इसके साथ सबसे बड़ी समस्या देश के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी है। कोरोना वायरस के मरीज देश में एक साथ ही लाखो की संख्या में बढ़ गए है और इस बार मरीजों को ऑक्सीजन की जरुरत भी बहुत ज्यादा पड़ने लगी है। दूसरी लहर में फैला कोरोना वायरस पहले फैले कोरोना वायरस से ज्यादा घातक साबित हो रहा है क्योकि यह संक्रमित होने के दो दिन में ही मरीज के फेफड़ो को खत्म कर दे रहा है। ऐसे में कोरोना मरीजों को वातावरण से ऑक्सीजन लेने में कठिनाई हो रही है और ऑक्सीजन नहीं मिल पाने के कारण लोगो की मौत हो रही है। हालाँकि भारत में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत है ऑक्सीजन की सप्लाई और और ट्रांसपोर्टेशन की श्रंखला नहीं होने के कारण देश में यह जरुरत के स्थानों पर नहीं पहुंच पा रही है।

भारत में फ़िलहाल 7,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग है जबकि देश की ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता 7,800 मीट्रिक टन है जो मांग से 800 मीट्रिक टन ज्यादा है। ऑक्सीजन को स्टोर करने के लिए उसे द्रव अवस्था में परिवर्तित करना पड़ता है और इसको द्रव में बदलने के लिए बहुत ही ज्यादा ठंडा करना पड़ता है। इसको ठंडा करने के लिए बहुत ही कम तापमान पर रखना पड़ता है जो कि -185 डिग्री सेल्सियस तक होता है। इस द्रव अवस्था में बदली गयी ऑक्सीजन को ही अस्पतालों में काम में लिया जाता है। इसको रखने के लिए अलग से कंटेनर आता है जो इसको बहुत ही ठंडा रखता है जिससे इनमे रखी गयी ऑक्सीजन द्रव की अवस्था में ही रहती है।

हालाँकि हम वातावरण में उपस्थित ऑक्सीजन का उपयोग साँस लेने के लिए करते है लेकिन कोरोना मरीजों को वातावरण से ऑक्सीजन लेने में कठिनाई होती है क्योकि कोरोना वायरस के कारण उनके फेफड़े खराब हो चुके होते है। वातावरण में केवल 21 प्रतिशत ही ऑक्सीजन की मात्रा होती है और सबसे ज्यादा 71 प्रतिशत नाइट्रोजन हवा में पायी जाती है। हम हवा में उपस्थित 21 प्रतिशत ऑक्सीजन का ही उपयोग कर पाते है। लेकिन कोरोना मरीजों को हवा से ऑक्सीजन नहीं मिल पाने के कारण उन्हें अलग से ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है जो की ऑक्सीजन सिलंडर में भरी हुई होती है। इन सिलेंडरों में 98 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन होती है जिसको कोरोना मरीजों को दिया जाता ही जिससे वे साँस ले पाते है। लेकिन अब भारत सरकार ने देश में ऑक्सीजन की आपूर्ति को पूरा करने के लिए उत्पादन को बढ़ा दिया है। इसके अलावा कई राज्यों ने भी अपने उद्योगों को बंद कर दिया है जिनमे सबसे ज्यादा ऑक्सीजन का उपयोग होता है ताकि अस्पातलो में ऑक्सीजन की आपूर्ति को पूरा  किया जा सके।

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