June 18, 2021

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हवा के जरिये फैल रहा है कोरोना वायरस, जानिए क्या कहती है The Lancet Report in Hindi

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Ten scientific reasons in support of airborne transmission of SARS Cov 2

कोरोना से पूरे देश में कोहराम मचा है। कोरोना की दूसरी लहर और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। दिनांक 17 अप्रेल को देश में रिकॉर्ड तोड़ 2 लाख 62 हजार कोरोना के पॉजिटिव मामले सामने आये। जबकि 1500 लोगों की मृत्यु हुई। पूरे देश में तांडव मचा है। इसी बीच विश्वसनीय पत्रिका The Lancet ने 15 अप्रेल को अपनी एक प्रकाशित की है जिसका टाइटल है Ten scientific reasons in support of airborne transmission of SARS Cov 2 (covid aerosol transmission) जिसमें उसने दावा किया है कि कोरोना SARS Cov 2 हवा में फैलने वाला वायरस है।

रिपोर्ट में The Lancet ने अपनी ओर से 10 ठोस कारण बताये हैं जिनसे उसने यह साबित करने की कोशिश की है कि कोरोना हवा के माध्यम से फैलने वाला वायरस है। आइये एक-एक बिंदु से देखते हैं The lancet के दावों को।

सबसे पहले थोड़ा सा दी लांसेट के बारे में जान लीजिये। दी लान्सेट एक विश्वस्वनीय मेडिकल जर्नल है जिसे 1823 में थॉमस वाकली नाम के एक सर्जन ने शुरू किया था। यह दुनियाभर में बीमारियों या मेडिकल से जुड़े क्षेत्रों में अध्ध्य्यन करती है और अलग-अलग मौकों पर विश्व को सचेत भी करती है।

The Lancet Report द्वारा बताये 10 काऱण

1. Human behaviour, बातचीत, कमरे के आकार, वेंटिलेशन जैसे factors की detailed study से पता चला है कि ये हवा में फैलने वाली बीमारी है। वायरस का सुपरस्प्रेडिंग इवेंट जो कि इन दिनों देखा जा रहा है तेजी से वायरस को आगे ले जाता है, वास्तव में, यह महामारी के शुरुआती carrier हो सकते हैं। ऐसे ट्रांसमिशन का हवा के जरिए होना ज्यादा आसान है।

2. होटलों में एक-दूसरे से सटे कमरों में क्वारंटीन में रह रहे लोगों के बीच वायरस का ट्रांसमिशन देखा गया, जबकि क्वारंटाइन में रह रहे लोग एक-दूसरे के कमरे में गये ही नहीं।

3. The Lancet के विशेषज्ञों का दावा है कि Sars Cov 2 के 33 से 59 प्रतिशत मामलों में असिम्पटोमैटिक या प्रिजेप्टोमैटिक ट्रांसमिशन जिम्मेदार हो सकते हैं। जो खांसने या छींकने से फैलने वाले नहीं हैं।

4. Covid 19 आउटडोर यानी चारदीवारी के बाहर कम और इनडोर यानी बंद कमरों के अंदर अधिक तेजी से फैलता है। यदि इनडोर वेंटिलेशन हो तो यह कम भी हो जाता है।

5. स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा पहने गए PPE किट भी इसके ट्रांसमिशन के वाहक बने हैं क्योंकि PPE किट को बूंदों यानी ड्रॉपलेट्स से बचने के लिए डिजाइन किया गया था ना कि एरोसोल एक्सपजोर के लिए। अस्पतालों में नोसोकॉमियल इन्फेक्शन पैदा होता है यह वहां पर भी पाया गया है।

6. विशेषज्ञों ने लैब में एक एक्सपेरिमेंट किया जहाँ पाया कि यह वायरस तीन घंटे तक हवा में रहा, इसलिए विशेषज्ञों ने संक्रमण के हवा में कम फैलने वाले दावे को खारिज कर दिया।

7. अस्पतालों के एयर फिल्टर और बिल्डिंग डक्ट्स में जब जाँच की गई तो वायरस वहाँ भी पाया गया जहाँ यह केवल हवा के जरिए ही पहुंच सकता है।

8. पिंजड़ों में बंद जानवरों में भी यह वायरस पाया गया है जो साबित करता है कि इसका संक्रमण हवा के जरिए भी फैलता है।

9. विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि ऐसा कोई भी अध्ययन अभी तक नहीं किया गया है जो यह साबित करने के लिए मजबूत और तर्कयुक्त सबूत दे कि SARS-CoV-2 हवा में फैलने वाली बीमारी नहीं है।

10. अपने आखिरी कारण में विशेषज्ञों ने कहा है कि ऐसे सबूत बेहद कम हैं, जो केवल अन्य मार्गों जैसे रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स (मुंह से निकलने वाली बूंदें) से फैलने की पुष्टि करते हों।

अब ऐसे में the lancet की रिपोर्ट का यह दावा उन सभी दावों को ख़ारिज करता है जो कहते हैं की कोरोना खांसते या छींकते समय ड्रॉप्लेट्स से फैलता है। या छिटककर ज्यादा से ज्यादा 6 फ़ीट की दूरी तक छलांग लगा सकता है। अगर ऐसा है तो सोशल डिस्टैन्सिंग के क्या मायने हैं रह जायेंगे? खैर दुनियाभर के डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स के reviews अभी इस रिपोर्ट पर आने बाकी हैं। आप Covid Appropriate Behaviour अपनाएं तथा सतर्क और सुरक्षित रहिये।