August 2, 2021

वृतांत – Vritaant

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भारत और इंग्लैंड के बीच हुई 1 बिलियन पाउंड की डील, इससे दोनों देशो के बीच ईटीपी को बढ़ावा मिलेगा

भारत और इंग्लैंड के बीच आज 1 बिलियन पाउंड की डील संपन्न हुई है। भारत के प्रधान मंत्री और इंग्लैंड के प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन के बीच आज एक वर्चुअल समिट का आयोजन किया गया जिसमे दोनों देशो के मध्य व्यापर के लिए 1 बिलियन पाउंड की डील संपन्न हुई है। इस डील की मदद से दोनों देशो के बीच एन्हेन्स ट्रेड पार्टनरशिप (ईटीपी) को बढ़ावा मिलेगा। इससे पहले भारत ने इंग्लैंड के प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन को गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत आने के लिए आमंत्रित किया गया था लेकिन भारत में कोरोना संक्रमण के कारण बोरिस जॉनसन ने अपनी भारत यात्रा को टाल दिया था। भारत और इंग्लैंड के बीच हुई इस डील के तहत इंग्लैंड में भारतीय निवेश को बढ़ावा दिया जायेगा।

इंग्लैंड में भारतीय निवेश के तहत 533 मिलियन पाउंड से अधिक की राशि से स्वास्थय और प्रोधोगिकी क्षेत्रो का विस्तार किया जायेगा। इस निवेश में भारत के सीरम इंस्टिट्यूट द्वारा इंग्लैंड में अपनी वैक्सीन के कारोबार के लिए 240 मिलियन पाउंड के निवेश को भी शामिल किया गया है। इंग्लैंड के अनुसार सीरम इंस्टिट्यूट के इस निवेश से यूके सहित दुनियाभर में कोरोना जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में मदद मिलेगी। इंग्लैंड ने इस डील की पूछती करते हुए कहा कि यह डील दोनों देशो के बीच ईटीपी का हिस्सा है जिसकी मदद से ब्रिटेन में छह हजार से अधिक नौकरियों के अवसर उत्पन्न होंगे। इस डील से दोनों देशो के बीच ईटीपी पर सहमति बनी है और दोनों देश अपने व्यापारिक संबंधो को और मजबूत करने पर सहमत हुए है। इसके बाद अब ईटीपी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए प्रारूप तैयार करेगा जिससे दोनों देशो के बीच आर्थिक और व्यापारिक भागीदारी मजबूत हो सके।

ईटीपी का उद्देश्य 2030 तक भारत और इंग्लैंड के बीच व्यापर को दोगुना करना है। इंग्लैंड ने भी कहा इस डील के बाद कहा कि इस समझौते के बाद भारत और इंग्लैंड के बीक मुक्त व्यापार की मदद से एक दशक में इंग्लैड भारत के साथ अपनी व्यापारिक साझेदारी को और मजबूत करेगा और इससे दोनों देशो के मध्य संबंध और मजबूत बनेंगे। इस समझौते के बाद लोगो अधिक संख्या में रोजगार मिल सकेगा और इससे भारत की अर्थव्यवस्था भी मजबूत बनेगी। ईटीपी के तहत दोनों देशो के मध्य फल और चिकित्सा उपकरणों पर गैर टेरिफ बढ़ाओ को कम किया जायेगा जिससे ब्रिटिश उत्पादों को भारत में निर्यात करने में आसानी होगी। भारत और इंग्लैंड का संबंध मजबूत और ऐतिहासिक है और दोनों देश दुनिया के प्रमुख व्यापारिक भागीदारों में से एक है।

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