June 25, 2021

वृतांत – Vritaant

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भारत में कोरोना वायरस के बाद अब मरीजों में तेजी से बढ़ रहा है फंगल इन्फेक्शन का खतरा

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भारत में कोरोना वायरस का संकट पुरे देश में सबसे बड़ा परेशानी का कारण बना हुआ है। भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने पुरे देश में कहर बरसाया हुआ है। देश में रोज़ हजारो की संख्या में कोरोना मरीजों की मौत हो रही है और यह आंकड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसके अलावा देश में रोज़ लाखो की संख्या में नए कोरोना वायरस के मरीज सामने आ रहे है जिसके कारण देश के कई राज्यों में लॉक लगा हुआ है। लेकिन भारत के सामने दूसरी बीमारी के रूप में नयी परेशानी आकर खड़ी हो गयी है जो कोरोना के मरीजों को तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। यह बीमारी है फंगल इन्फेक्शन जो तेजी से कोरोना संक्रमित मरीजों में फैलती जा रही है। भारत में फंगल इन्फेक्शन जिसे ब्लैक फंगल इन्फेक्शन कहा जा रहा है के कई मामले सामने आये है और यह इंफेक्शन कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों में तेजी से बढ़ता जा रहा है। यह इन्फेक्शन उन कोरोना संक्रमित मरीजों में ज्यादा देस्खने को मिल रहा है जो लम्बे समय से ऑक्सीजन के सहारे पर है ऐसे में लम्बे समय से ऑक्सीजन के सपोर्ट चल रहे मरीजों में ब्लैक फंगल इन्फेक्शन का खतरा मंडरा रहा है।

कोरोना के बाद भारत में तेजी से बढ़ते फंगल इन्फेक्शन के मामलों की वजह से लोगो में डर का माहौल है। उन लोगो में सबसे ज्यादा डर फैला है जो कोरोना संक्रमित है और लम्बे समय से ऑक्सीजन के सहारे चल रहे है। इस फंगस का नाम म्यूकोर्मिकोसिस है जो एक गंभीर बीमारी है और यह तेजी से फैलने वाला संक्रमण है। यह इन्फेक्शन फफूंद के कारण होता है और भारत में इस इन्फेक्शन के मामले तेजी से सामने आ रहे है। इस बीमारी को ब्लैक फंगस के नाम से भी जाना है जो हमारे शरीर में सबसे ज्यादा हमारे फेफड़ो और मस्तिष्क को प्रभावित करती है और इससे मृत्यु भी हो जाती है। यह संक्रमण ऐसे लोगो में ज्यादा देखने को मिल रहा है जो कोरोना वायरस से संक्रमित है या कोरोना वायरस से ठीक हो चुके है। विशेषज्ञों के अनुसार यह इन्फेक्शन भारत में पहले की तुलना में तेजी से बढ़ गया है। कोरोना वायरस के बाद जिन लोगो की इम्युनिटी पावर कमजोर है उन लोगो को इस फंगल इन्फेक्शन का खतरा बना हुआ है। यह हमारे शरीर के सायनस, फेफड़े, त्वचा और मष्तिष्क को ज्यादा प्रभावित करता है। इस ब्लैक फंगस का डर उन लोगो में ज्यादा है जो पहले से किसी बीमारी से पीड़ित है और जो किसी बीमारी का इलाज ले रहे है।

जो लोग मधुमेह जैसे रोग से संक्रमित है यह फंगल इन्फेक्शन ऐसे लोगो को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है और लोगो की रोगो से लड़ने की क्षमता को कमजोर कर रहा है। इस बीमारी से संक्रमित होने से आँखों की रौशनी चली जाती है और शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते है। यह इन्फेक्शन नाक से शुरू होता है और आँखों के बाद मस्तिष्क तक पहुंच जाता है और इसके मस्तिष्क में पहुंचने के कारण मृत्यु हो जाती है। अगर इस फंगल इन्फेक्शन के लक्षणों की बात करे तो भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान (आईसीएमआर) के अनुसार नाक में रुकावट होना, नाक से काला या खुनी तरल का बहना, गाल की हड्डी में दर्द होना आदि है। इसके अलावा अन्य लक्षणों की बात करे तो दर्द के साथ दृष्टि का धुंधला होना, बुखार आना, चेहरे के एक तरफ दर्द होना, सूजन आना , दांतो का हिलना या ढीला पड़ना, सिरदर्द, खासी, साँस फूलना, खून की उलटी होना, खून का थक्का बनना, सीने में दर्द होना आदि लक्षण शामिल है।

भारत में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में 2,000 से अधिक फंगल इन्फेशन के मामले देखे गए है इसके अलावा कई अन्य राज्यों में इसके मामले सामने आये है। विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा स्टेरॉइड्स के इस्तेमाल की वजह से यह इन्फेक्शन फैला है। यह रोग एक प्राकृतिक फफूंद के कारण होता है जो हमारी नाक या अन्य चीज़ो के सेवन के साथ हमरे शरीर में चली जाती है। लोगो में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से यह तेजी से फैलने लगा है। इस रोग से बचने के लिए कोरोना संक्रमित रोगियों में शर्करा स्तर पर निगरानी रखे और इसे नियंत्रित करने की कोशिश करे। अस्पतालों में ऑक्सीजन के साथ उपयोग में लिए जाने वाला पानी साफ होना चाहिए। इसके अलावा अस्पतालों में डॉक्टरों को ज्यादा स्टेरॉयड देने से भी बचना होगा। इस तरह के उपायों से इस फंगल इन्फेक्शन को फैलने से रोका जा सकता है।

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