September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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क्या है अल-अक्सा मस्जिद पर हमले का कारण? जानिए इजराइल और फिलिस्तीन के बीच हो रहे संघर्ष के बारे में

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष काफी लम्बे समय से चलता है आ रहा है। पहले इजराइल का ज्यादातर क्षेत्र ही फिलिस्तीन हुआ करता था जबकि इजराइल के पास बहुत ही कम क्षेत्र था लेकिन इजराइल के लोगो ने धीरे धीरे अपने क्षेत्र को बढ़ाना शुरू कर दिया और फिलिस्तीन के लगभग पुरे भाग को अपने क्षेत्र में ले लिया। इजराइल और फिलिस्तीन के बीच यह संघर्ष बहुत ही पुराना है। लेकिन हाल ही में इजराइल और फिलिस्तीन के बीच यह संघर्ष फिर से आक्रामक रूप से बदल गया है और इस बार जो विवाद हुआ है वो अल-अक्सा मस्जिद को लेकर हुआ है। यह अल-अक्सा मस्जिद येरुशेलम में स्थित है और इस मस्जिद पर हमला किया गया जिसमे कई लोग गंभीर घायल हो गए। इसके बाद इजराइल और फिलीस्तीन के बीच यह विवाद और भी ज्यादा बढ़ गया है और इसमें विशाल आक्रामक रूप ले लिया जिसके कारण कई लोगो की जान भी चली गयी।

यह संघर्ष तब भड़का जब इजराइली पुलिस द्वारा अल-अक्सा मस्जिद में नमाज अदा कर रहे लोगो पर भारी गोलीबारी की गयी जिसके कारण 300 से ज्यादा लोग गंभीर घायल हो गए। यह गोलीबारी 10 मई को गयी जिस दिन इजराइल में यहूदियो द्वारा यह येरुशेलम दिवस के रूप में मनाया जाता है। इजराइली पुलिस की इस गोलीबारी का जवाब देने के लिए हमास नामक आतंकी संगठन ने इजराइल पर कई सारे रॉकेट दागे। येरुशेलम में यहूदियों, ईसाइयो और मुसलमानो तीनो के पवित्र स्थान है। यहाँ पर ईसाइयो का पवित्र सेपुलकर चर्च, मुसलमानो का पवित्र स्थान अल-अक्सा मस्जिद और यहूदियों का टेम्पल माउंट स्थित है। अल-अक्सा मस्जिद को मक्का और मदीना के बाद मुसलमानो का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। यह अल-अक्सा मस्जिद एक पहाड़ पर स्थित है और इसके परिसर को मुसलमानो द्वारा नोबल सैंक्चुअरी कहा जाता है जबकि यहूदी इसे टेम्पल माउंट कहते है।

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच का यह संघर्ष 100 साल से भी अधिक पुराना है। पहले इस क्षेत्र में रहने वालो में अरब के लोग अधिक थे और यहूदियों की संख्या बहुत ही कम थी। लेकिन संयुक्त राष्ट्र द्वारा यहूदियों को वहा पर बसाने और उनका अलग देश बनाने के लिए समर्थन किया गया। जिसके बाद अरबो ने इसका विरोध किया। धीरे-धीरे यहूदियों और अरबो में यह संघर्ष बढ़ता चला गया। इसके बाद फिलिस्तीन में स्वतंत्र यहूदी देश और अरब देश फिलिस्तीन के विभाजन का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र द्वारा पेश किया गया जिसके के लिए यहूदियों ने सहमति दे दी जबकि अरबो ने इसे मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद सन 1948 को इजराइल को स्वतंत्र देश बना दिया गया जिसके बाद कई अरब देशो ने इजराइल पर आक्रमण कर दिया। इस युद्ध के बाद इजराइल ने इन देशो को युद्ध में हरा दिया और पहले से भी अधिक भूमि का अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद 1967 में इजराइल ने येरुशेलम के कुछ हिस्से का भी अधिग्रहण कर लिया।

फिलिस्तीन में एक आतंकी संघटन हमास का सामने आया। अब फिलिस्तीन की मांग है कि इजराइल को 1967 से पूर्व की सीमाओं तक सीमित किया जाये और गाजा पट्टी में स्वतंत्र फिलिस्तीन राज्य की स्थापना की जाये। जबकि इजराइल येरूशम को अपना सबसे महत्वपूर्ण अंग मानता है और येरुशेलम पर अपना पूर्ण रूप से कब्ज़ा चाहता है। इसी कारण से यह संघर्ष फिर शुरू हो गया है। हमास द्वारा इजराइल पर रॉकेट दागने के बाद इजराइल ने भी फिलिस्तीन पर हमला किया जिसके बाद कई सेकड़ो लोगो मारे गए जिनमे एक भारतीय महिला की भी मृत्यु हो गयी। अब भारत में सामने वहा पर चल रहे विद्रोह को देखते हुए भारतीय लोगो की सुरक्षा की चिंता है। इसके अलावा भारत को अरब देशो और इजराइल सभी से अपने संबंधो को अच्छा रखने के लिए इस मामले संयम बरतना होगा। इस संघर्ष में सबसे बड़ा फायदा इजराइल को ही होगा क्योकि फिलिस्तीन पास न कोई सेना है और न ही हथियार जबकि इजराइल हथियारों के मामले में सबसे शक्तिशाली देशो में है। इस संघर्ष से इजराइल को फिलिस्तीन के बचे हुए क्षेत्र का अधिग्रहण करने में बहुत ही आसानी होगी इसलिए इस मामले का सबसे अच्छा हल शांति हो सकता है। फिलिस्तीन के लोगो को अपना शेष क्षेत्र बचाना है तो उसे इजराइल के साथ शांति का प्रस्ताव रखने की जरुरत है यदि वे ऐसा नहीं करते है तो इजराइल पुरे फिलिस्तीन पर अपना कब्ज़ा कर सकता है।

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