September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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कांग्रेस ने केंद्र सरकार से की सभी जीवन रक्षक दवाओं और उपकरणों से जीएसटी हटाने की मांग

कोरोना महामारी से देश में फैले संकट और चिंताओं को देखते हुए कांग्रेस नेता प्रिंयका गाँधी वाड्रा ने जीएसटी परिषद की 43वी बैठक के मद्देनजर केंद्र से नॉवल कोरोना वायरस के उपचार में उपयोग होने वाली जीवन रक्षक दवाइयों और उपकरणो से जीएसटी हटाने की मांग की है। हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए जीएसटी परिषद की 43वी बैठक आयोजित की। इस बैठक में देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के उपचार से जुडी दवाइयों, औषधियों, ऑक्सीजन और उपकरणों पर कर की दरों के मामले में और राज्यों के राजस्व के बारे में चर्चा की गयी। इससे पहले भी जीएसटी परिषद की 42वी बैठक 5 अक्टूबर 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए की गयी थी।

साल २०२१ के वित्तीय वर्ष की यह पहली बैठक है। इसके बैठक को देखते हुए कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने देश में कोरोना महामारी के प्रकोप और प्रभाव को देखते हुए मांग की है कि इस बैठक में सरकार को उन सभी दवाओं और उपकरणों से जीएसटी हटा देना चाहिए जिनका उपयोग कोरोना वायरस के उपचार में किया जा रहा है। इन जरुरी चीज़ो से जीएसटी हटने के बाद कोरोना संक्रमित मरीजों का सस्ते में उपचार हो सकेगा और देश में तेजी से कोरोना को खत्म करने में मदद मिलेगी।

प्रियंका गाँधी ने ट्विटर के जरिये कहा कि जिस तरह से देश में लोग कोरोना महामारी से प्रभावित हो रहे है उसे देखते हुए जीवन रक्षक दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, टीको, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर से जीएसटी वसूलना सरकार का असंवेदनशील रवैया है। इसके अलावा उन्होंने ट्विटर पर एक सूचि जारी की जिसमे अलकोहल बेस्ड हैंड सैनिटाइज़र, हैंड वाश, साबुन, कॉटन मास्क, पीपीई किट से लेकर कोरोना वैक्सीन, रेमेडीसीवीर, अन्य कोरोना के उपचार में काम आने वाली दवाये और वेंटिलेटर आदि के साथ 15 वस्तुओ की अलग अलग जीएसटी दरे दी गयी है।

जीएसटी परिषद् में वित्त मंत्री, राजस्व मंत्री और राज्य वित्त मंत्री शामिल होते है जो जीएसटी की दरों, छूट, सीमा और अन्य मामलो में चर्चा करते है। जीएसटी परिषद् कई विषयो पर केंद्र और राज्यों को सिफारिश करती है जिनमे यह बताया जाता है कि किन वस्तुओ पर जीएसटी में छूट दी जनि चाहिए और किन वस्तुओ को जीएसटी के अधीन शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा जीएसटी परिषद् किसी प्राक्रतिक आपदा या विपदा के समय आवश्यक वस्तुओ से विशेष अवधि के जीएसटी को हटा भी सकता है। भारत में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक वस्तुओ की कीमतों का नियंत्रण किया जाता है। भारत में आबादी के बड़े हिस्से द्वारा दवाओं की कीमत को वहन करना मुश्किल होता है। हर साल लाखो लोग स्वास्थय देखभाल के खर्च के कारण गरीबी रेखा से निचे चले जाते है।

भारत में दवा बाजार में एक जटिल आपूर्ति श्रंखला मौजूद है जिसे सही तरीके से रेगुलेट करना जरुरी है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि मजबूत स्वास्थय सेवा का एक बुनियादी ढांचा बनाया जाये जो रोगियों की सुरक्षा को ज्यादा महत्व देता है और जो दवाओं की लागत को कम करता है। हालाँकि कांग्रेस पार्टी द्वारा आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों से जीएसटी हटाने की मांग भी जायज है क्योकि देश में कोरोना महामारी से संक्रमित लोगो ने आवश्यक दवाओं और उपकरणों का खर्च वहन नहीं कर पाने के कारण अपनी जान गवानी पड़ी। जीएसटी परिषद् द्वारा कम से कम एक निश्चित अंतराल तक के लिए आवश्यक दवाओं और उपकरणों से जीएसटी हटा देने के बारे में विचार करना चाहिए।   ट्रेड मार्जिन रेशनलाइज़शन (टीएमआर) एक  ऐसा समाधान है जो दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के निर्माताओं को बाजार में दुसरो के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए नयी दवाओं और टीको में निवेश करने की अनुमति देता है। जीएसटी परिषद् की बैठक के दौरान दवाओं की कीमत पर विचार इस इस दिशा में सुगमता लाएगा। वर्तमान परिस्तिथि को देखते हुए सरकार द्वारा दवाओं की कीमत से जीएसटी हटाकर लोगो को राहत देने का तर्क उचित है ताकि लोगो को कोरोना वायरस का उपचार करना महंगा नहीं पड़े और ज्यादा से ज्यादा लोग इस बीमारी से लड़ सके।

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