June 25, 2021

वृतांत – Vritaant

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गोवा जैसा अतरंगी कुछ भी नहीं | यात्रा वृतांत – A Tale of journey to GOA

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जाने की ज़िद जिससे किस्मत ने भी हमारा साथ दिया

हम मुंबई एक क्लाइंट से मीटिंग के लिए आये थे। लेकिन गोवा घूमने की तीव्र इच्छा भी मन में थी। एक मन कह रहा था इतना दूर तो आ चुके हैं, थोड़ा आगे और बढ़ना है तो दूसरी ओर पीछे छूटे अधूरे पड़े काम और जिम्मेदारियां हमें जल्द से जल्द वापस लौटने को कह रहे थे। हम असमंजस में थे आखिर किसकी सुनें एक मन जो कुछ आज़ादी महसूस करना चाहता है तो दूसरा आरोप पर आरोप मढ़ रहा है। यह आरोप ताउम्र ख़त्म नहीं होंगे हमें इस सच्चाई का एहसास तब हुआ जब पिछले कुछ सालों को हमने खंगालकर देखा। मीटिंग सुबह ज्यादा देर नहीं चली। ऑटो और लोकल में ट्रेवल करते हुए सुल्तान भैया ने गोवा जाने वाली सभी ट्रेनों की जानकारी निकाल ली। किसी भी ट्रैन में सीट खाली नहीं थी। मन में एक डर बैठ रहा था कि हम ना जा पाए तो? सवाल यही था कि जाएं कैसे?

दिन में सुल्तान भैया अपने रिश्तेदारों से मिलने मीरा रोड़ चले गए। मैं और भावना नेरीमन पॉइंट और गेटवे ऑफ़ इंडिया घूमने आ गए। सबसे पहले हमने बॉम्बे सैंडविच का स्वाद चखा। वाह ! ऐसा सैंडविच शायद ही कहीं और मिलता हो। नेरीमन पॉइंट से घूमते हुए हम गेटवे ऑफ़ इंडिया की ओर बढ़ रहे थे। मुंबई शहर का यह हिस्सा बेहद अलग एहसास देता है। विशाल समंदर को देख हम अब गोवा जाने के लिए मर रहे थे। हमने सुल्तान भैया से कोई ना कोई जुगाड़ निकालने के लिए कहा। हम अँधेरी में एक परिचित के घर ठहरे थे इसलिए मीटिंग पर जाने से पहले हमने सामान वहीं छोड़ा था। शाम होते-होते हम तीनों लौटे और गोवा जाने की प्लानिंग पर डिस्कस करने लगे। सुल्तान भैया ने बताया की एक स्पेशल ट्रैन दादर से रात साढ़े ग्यारह बजे चलने वाली है। डिनर के बाद हम दादर के लिए निकल चुके थे। परन्तु दादर स्टेशन पहुँचने पर हमें पता चला कि टैक्सी वाले ने हमें दादर लोकल उतार दिया है। और जब हम स्टेशन पहुंचे तब तक हमारी ट्रैन छूट चुकी थी।

Fort

आधी रात को अपने सामान के साथ हम दादर स्टेशन पर निराश बैठे थे। सुल्तान भैया अपने फ़ोन में देख रहे थे यदि कुछ देर बाद कोई ट्रैन गोवा के लिए निकलती हो। उसी समय जयपुर घर लौटना भी मुमकिन नहीं था। सुल्तान भैया ने बताया कि सुबह 5 बजे पनवेल से एक ट्रैन गोवा के लिए निकलेगी। हम बिना कुछ ज्यादा सोचे टैक्सी लेकर पनवेल पहुँच गये। रात भर ट्रैन का इंतज़ार करते रहे। थकान से हम तीनों बेहाल थे लेकिन गोवा जाने का भूत अभी तक सवार था। सुबह ट्रैन आई सुल्तान भैया ने टीसी से बहुत मिन्नतें की कि वह हमें कोई एक सीट ही दे दे। परन्तु वह टस से मस नहीं हुआ। हमारे अब घोर निराशा में घिर चुके थे और अपने आप को कोसने लगे थे। ट्रैन निकलने में अब केवल 5 मिनट का वक्त था। टीसी एक बार फिर हमारे सामने था। सुल्तान भैया अपनी आखिरी कोशिश में लगे थे। और इस बार टीसी को हम पर दया आ गई।

Baga beach

दरअसल कुछ सीटों पर यात्री नहीं आये थे। इतनी थकान के बावजूद हम ज्यादा नहीं सो पाए। इतनी जद्दोजहद के बाद आखिरकार हम गोवा की राह पर थे। यह मन में दबी किसी टीस पर जीत हासिल कर लेने जैसा था। जुलाई का महीना और मौसम सुहाना। हम में इतनी ऊर्जा हमारे उत्साह के कारण थी। जहाँ-जहाँ ट्रैन रूकती हम ट्रैन से बाहर निकल आते। सुल्तान भैया इस क्षेत्र से वाकिफ थे और गोवा का रूट उनकी ज़ुबान पर था। उन्होंने बताया कि यह कोंकण क्षेत्र है, जो कर्णाटक और मराठा से थोड़ा भिन्न है। दिन के लगभग 2 या ढ़ाई बजे हम करमली नाम के स्टेशन पर उतर गए। यह एक बहुत ही शांत और हरा भरा स्टेशन था। हम टैक्सी लेकर गोवा बीच क्षेत्रों की ओर रवाना हो गए। Goa travel stories

गोवा की हवा घुली है एक मीठी मदहोशी

सुल्तान भैया के अनुसार हम बागा क्षेत्र में एक सामान्य ही होटल में रूम ले लिया। यह वो जगह थी जहाँ आपको बन-ठनकर नहीं बल्कि पूरी तरह रिलैक्स होकर बाहर निकलना था। सांझ के साथ गर्मी भी कम हो चुकी थी। हम बीच के लिए निकल चुके थे। बागा बीच यहाँ सबसे आम जगह है और सबसे ख़ास भी। चारों और जैसे खुशियों का मेला लगा हो और उस मेले में पूरी दुनिया से लोग आये हों। सजे हुए बाजार, अपनी मौज में घूमती टोलियां, छुट्टी मनाते परिवार और प्रेम में डूबे प्यार के पंछियों की यहाँ भीड़ लगी है। हर एक के चेहरे पर ख़ुशी और सुकून का समावेश। बागा का बाज़ार ऐसा मानों पूरा विश्व यहाँ मिलकर त्यौहार मना रहा हो। यहाँ ना किसी की कोई जाति है, ना ही किसी का कोई मज़हब। यहाँ हर एक अपने असली रुप में है, यायावर। एक मदहोशी जो कहीं, कभी महसूस नहीं हुई। मन के पिंजरे में बंद पंछी को मानों कैद से आज़ादी मिल गई हो।

Anjuna

समंदर का किनारा मैंने मुंबई या दमन में पहले भी देखा था। लेकिन शीशे सा साफ़ नीला समुद्री पानी और पांवों तले से फिसलती रेत का अनुभव मैंने पहली बार किया था। बीच पर वही मेले जैसा माहौल था। कुछ लोग पानी में डुबकियां लगा रहे थे तो कुछ वाटर स्पोर्ट्स का मजा ले रहे थे। कुछ अपनी धुन में लेटे ढलती शाम को को महसूस कर रहे थे तो कुछ ग्रुप बनाकर गेम्स भी खेल रहे थे। यहाँ हर एक अपने जीवन को पूरी तरह जी रहा था। हमने माहौल को समझने में ज्यादा समय गंवाने की बजाय कुछ मजे करने में ज्यादा ध्यान दिया। हमने वाटर स्पोर्ट्स के मजे लेने का प्लान किया। हलकी बारिश शुरू हो चुकी थी। समुद्र की लहरों में उफान शुरू हो चुका था। एक ट्यूब वाली नाव में सवार होकर हम दूर समंदर में गए।

समुद्र की लहरें अब और अधिक ऊपर नीचे होने लगी थी। नाविक ने बीच समंदर नाव रोक दी। हम सभी ने लाइफ जैकेट पहनी थी। नाविक ने कहा की जो भी डुबकी लगाना चाहता है लगा ले। पहले तो हमें लगा कि वह मजाक कर रहा है। लेकिन जब वह ज़ोर देने लगा तो सुल्तान भैया ने छलांग लगा दी। मुझसे भी रहा ना गया। मैंने भी छलांग लगा दी। पहले तो दुनियाभर का खारा पानी मेरे गले में गया लेकिन फिर खुदको सँभालने के बाद मैं लाइफ जैकेट के सहारे पानी की सतह पर तैर रहा था। ऊपर नीचे हो रही लहरों पर झूलने का अनुभव बेहद एडवेंचरस था। Goa Travel Blog.

Goa Market

इसके बाद हम क्लब में गए जहाँ लाउड म्यूजिक की जबरदस्त बीट पर हर कोई थिरकने को मजबूर था। खुदको खोने का इससे बेहतर अवसर नहीं मिल सकता था। हम देर रात तक क्लब में नाचते रहे। अगले दिन हमने 2 एक्टिवा किराये पर ले ली और अलग-अलग जगहों पर घूमने के लिए निकले। बागा के अतिरिक्त गोवा में कई अन्य बीच हैं और हर एक की अपनी विशेषता है। सबसे पहले हम अगोदा फोर्ट गए। यह बेहद ही खूबसूरत जगह थी। समंदर की ओर बहती हवा को महसूस करने के लिए यह एक बढ़िया जगह है। हम दिनभर अलग-अलग बीचों पर जाकर मौसम के साथ समुद्री लहरों का लुत्फ़ लेते रहे। दो दिनों में हम वेगेटर, अंजुना, कलंगुट और कैंडोलिम बीच पर गए। वेगेटर बीच के नज़दीक थलासा नाम का एक बेहद ही खूबसूरत रिसोर्ट स्थित है। इसे गोवा की लाइफस्टाइल जीने की एक परफेक्ट जगह कही जाए तो बिल्कुल गलत नहीं होगा। गोवान फ़ूड और जबरदस्त इलेक्ट्रिफाइड परफॉरमेंसेज के साथ ट्रांस म्यूजिक का एक बढ़िया मिश्रण इस रिसोर्ट को बेहद ख़ास बनाता है।

thalassa

गहन शून्य का अनुभव करवाता है गोवा का सूर्यास्त

सर्दियों के मौसम में गोवा एक बेहद महंगी जगह मानी जाती है, इसलिए बारिश का मौसम उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो सीमित बजट में गोवा घूमना चाहते हैं। मौसम बेहद सुहाना था। घर लौटने से पहले वाली शाम हम अंजुना बीच पर आये। किनारे पर छोटी-छोटी चट्टानें थी जिनसे समुद्र की लहरें लगातार टकरा रही थी। विशाल समंदर मानों कह रहा हो कि इंसानों की दुनिया में कोई कितना भी बड़ा क्यों ना बन जाए उसके सामने वह एक अति सूक्ष्म जीव के समान ही रहेगा। चट्टानों से टकराती लहरों की आवाज़ मन में एक गहरा सुकून भर रही थी, और साँझ में डूबते सूरज की सुंदरता का कोई मुकाबला नहीं था। सूर्यास्त होने तक वहीं डटे रहे। हमने आपस में कोई ज्यादा बातचीत नहीं की। क्योंकि यह खुदके साथ बिताया वक़्त था।

sunset in Goa

मुझे गोवा अपने आप में एक पाठशाला जैसा प्रतीत हुआ। वो पाठशाला जो जीना सिखाती है। जो कहती है कि यहाँ हर एक व्यक्ति केवल मुसाफिर है। जितने ज्यादा पल वह जी सकता है जी ले, अगले पल ना जाने क्या हो। यह बड़ी ही साधारण सी सीख है जो गोवा की हवा में घुली है, एक ख़ुमार की तरह। 2 दिन अपनी ज़िन्दगी जीकर हम वहाँ से लौट आये लेकिन वो ख़ुमार अभी भी ज़िंदा है। और खुलकर जीने के लिए प्रेरित करता रहता है।

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