June 25, 2021

वृतांत – Vritaant

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क्या 5G रेडिएशन से हमे कोई खतरा है, जानिए क्या है इसके पीछे की सच्चाई

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भारत में अभी तक 5G आया नहीं है लेकिन 5G से संबंधित अलग अलग अपवाहे बहुत ही ज्यादा फैल गयी है। इन अपवाहों में लोगो के मन कई अजीब विचार आ रहे है कि 5G इंसानो और अन्य जानवरो के खतरनाक है। कई लोगो का कहना है कि 5G से कोरोना हो सकता है या 5G कैंसर का कारण भी बन सकता है। इस तरह की धारणाये लोगो के बीच 5G को लेकर फैली हुई है। ऐसे में लोगो के मन कई सारे आ रहे है कि मोबाइल रेडिएशन से ज्यादा खतरनाक 5G रेडिएशन है। जानिए आखिर क्या सच में 5G रेडिएशन से हमे खतरा है ?

अगर बात करे कि मोबाइल फ़ोन रेडिएशन से हमे क्या खतरा हो सकता है तो रेडिएशन का नाम सुनते है हमारे में मन खतरनाक रेडिएशन के बारे में विचार आने लगते है जो हमारे लिए घातक होती है। लेकिन आप को बता दे कि जो प्रकाश तरंगे होती है वे भी रेडिएशन के अंतर्गत ही आती है। लेकिन मोबाइल फ़ोन में इन रेडिएशन्स को दो भागो में रखा गया है जिनमे एक आयोनाइजिंग और एक नॉन आयोनाइजिंग रेडिशन होती है। नॉन आयोनाइजिंग रेडिएशन में मोबाइल फ़ोन, वाई-फाई और एफएम रेडियो की तरंगो को रखा जाता है जबकि आयोनाइजिंग में गमा, एक्स-रे आदि तरंगो को रखा जाता है। ऐसे में हम यह पहले से जानते है कि अगर एक्स-रे किरणों को ज्यादा समय तक काम में ली जाये तो वहा पर हमे कैंसर होने का खतरा हो सकता है। इसलिए इन तरंगो को आयोनाइजिंग केटेगरी में रखा गया है लेकिन मोबाइल फ़ोन की रेडिएशन को इस केटेगरी में नहीं रखा गया है क्योकि हमे इनसे इस तरह का कोई भी खतरा नहीं होता है। लेकिन अगर बात की जाये कि क्या मोबाइल फ़ोन की रेडिएटों से हमे खतरा हो सकता है तो इसके लिए फ़िलहाल कोई भी सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है क्योकि मोबाइल फ़ोन्स पूरी दुनिया में कई सालो से लोगो द्वारा काम में लिए जा रहे है लेकिन इनके कारण इतने सालो में इस तरह की कोई खतरनाक बीमारी या अन्य कोई बीमारी की आशंका बढ़ गयी है ऐसा अभी तक सामने नहीं आया है।

इस तरह से हम यह नहीं बता सकते है कि मोबाइल फ़ोन के रेडिएशन से हमे कोई घातक बीमारी या खतरा हो सकता है। इसके अलावा विश्व स्वास्थय संगठन ने भी मोबाइल फ़ोन से होने वाले रेडिएशन को न तो खतरनाक माना है और न ही लाभदायक। अगर हम बात करे 5G की तो 5G में लौ बैंड, मिड बैंड और हाई बैंड आवर्ती वाली तरंगे देखने को मिलती है। लेकिन भारत 5G सेवा पहले से मौजूद 4G नेटवर्क और 4G रेडिएशन का उपयोग करके ही रोल आउट की जाएगी यानि हमे भारत में 5G के आने के बाद भी रेडिएशन में बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। भारत में पहले से मौजूद 4G रेडिएशन के जरिये 5G सेवा को शुरू किया जायेगा। यानि हम यह कह सकते है कि 5G से आने के बाद भी पहले से मौजूद रेडिएशन में कोई बदलाव नहीं होगा और जो खतरा हमे 4G रेडिएशन से होता है वही खतरा हमे 5G से होगा। यानि 5G के आने के बाद कोई भी रेडिएशन का नया खतरा नहीं बढ़ेगा क्योकि 5G सेवा में जो रेडिएशन काम में लिया जायेगा वो भी 4G रेडिएशन के बराबर का ही होगा जिससे हमे कोई भी नया खतरा देखने को नहीं मिलेगा।

इसके अलावा 5G के दूसरे रूप यानि मिलीमीटर 5G के बारे में बात की जाये तो इसमें हाई आवृति की तरंगो को काम में लिया जायेगा लेकिन इन तरंगो को इस तरह कमजोर बना दिया जाता है कि यह इंसानी शरीर या किसी भी अन्य जानवर के शरीर को पार नहीं कर पाती है जिससे इससे भी हमे कोई खतरा नहीं है। मिलीमीटर वेव 5G में काम में ली जाने वाली तरंगे बहुत ही ज्यादा कमजोर होती है जिसके लिए अलग से टावर लगाने पड़ते है और इनकी संख्या भी बहुत ज्यादा होती है ताकि 5G सेवा को बिना रुकावट के शुरू उपलब्ध कराया जा सके। ऐसे में बहुत ही कम जगहों पर इस मिलीमीटर 5G की टेस्टिंग की जा रही है जबकि विश्व में ज्यादातर जगहों पर स्टैंडअलोन 5G ही रोल आउट किया जायेगा जो पहले से मौजूद 4G इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके ही लागु किया जा सकेगा और इसके लिए अलग से टावर भी लगाने की आवश्यकता नहीं होगी क्योकि इसमें 4G टावर्स का ही उपयोग किया जायेगा। यानि 5G के किसी भी रूप से हमे कोई भी बड़ा खतरा नहीं होगा और न ही इससे हमे कोई ज्यादा नुकसान होगा।

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