September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

खबर, संवाद और साहित्य

भारत में 6 राज्यों के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी होगा विधान परिषद् का गठन, राज्य सरकार ने दी मंजूरी

Kolkata: West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee at a Press Conference increasing numbers of COVID 19 cases at Nabanna in Howrah on May 6, 2021. (Photo: IANS)

हाल ही में पश्चिमी बंगाल में विधान सभा के चुनाव संपन्न हुए और एक बार फिर से तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आ गयी है। तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी फिर से पश्चिमी बंगाल की मुख्य मंत्री बन गयी है। तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने सत्ता में आते ही राज्य में विधान परिषद् के गठन को मंजूरी दे दी है। हालंकि अभी तक केंद्र सरकार द्वारा इस मामले में कोई निर्मय नहीं लिया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार को राज्य में विधान परिषद् के गठन के लिए विधान सभा में विधेयक प्रस्तुत करना होगा जिस पर राज्य के राज्यपाल की मंजूरी आवश्यक होगी। हालाँकि राज्य में इससे पहले भी विधान परिषद् का गठन किया जा चूका है जिसको साल 1969 में समाप्त कर दिया गया था। भारत के संविधान के भाग 5 और अनुच्छेद 169 के अनुसार राज्य में विधान सभा के अलावा विधान परिषद् का भी गठन किया जा सकता है। जिस प्रकार संसद के दो सदन होते है, उसी प्रकार राज्यों में भी विधान सभा के अतिरिक्त एक विधान परिषद् हो सकती है। संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार जिन राज्यों में पहले से विधान परिषद् मौजूद है उनमे संसद द्वारा विधान परीक्षण का विगठन किया जा सकता है और जिन राज्यों में विधान परिषद् नहीं है उनमे संसद विधान परिषद् का गठन ककर सकती है।

भारत में फ़िलहाल 6 राज्यों में ही विधान सभा के अलावा विधान परिषद् मौजूद है। यह राज्य तेलंगाना, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र है। पश्चिमी बंगाल में विधान परिषद् का गठन होने के बाद यह देश का 7वा राज्य बन जायेगा जिसमे विधान परिषद् होगी। विधान परिषद् के गठन के लिए राज्य की विधान सभा के कुल सदस्यों की संख्या का बहुमत, विधान सभा में उपस्तिथि और मतदान करने वाले सदस्यों की संख्या के कम से कम दो तिहाई सदस्यों का बहुमत होना आवश्यक होता है। विधान परिषद् में एक सभापति होता है और एक उपसभापति होता है। इसके अलावा विधान परिषद् के सभी सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। जिस प्रकार संसद का सबसे उच्च राज्य सभा है, उसी प्रकार राज्य में विधान परीक्षण विधान मंडल का उच्च सदन होता है। राज्य की भौगोलिक स्थिति, जनसँख्या और अन्य पहलुओं को देखते हुए राज्य विधान मंडल के उच्च सदन विधान परिषद् के गठन का प्रावधान दिया गया है।

भारतीय संविधान में ने विधान सभा को यह अधिकार दिया हुआ है कि यदि किसी कानून को लेकर उनमे कोई असहमति होती है तो उसे विधान परिषद् के सुझावों का अध्यारोहण करने का अधिकार है। विधान परिषद् एक ऐसा सदन होता है जिसमे राज्य के शिक्षाविद, कलाकार, वैज्ञानिक, बुद्धिजीवी आदि सदस्य होते है और सरकार की जान कल्याण योजनाओ के द्वारा राज्य के विकास में अपना योगदान देने के लिए एक मंच प्रदान करता है। विधान परिषद् की कार्यप्रणाली संसद की राज्य से मेल खाती है जैसे राज्य सभा की तरह है विधान परिषद् को भांग नहीं किया जा सकता है और इसके अलावा इसके सदस्यों का कार्यकाल भी 6 वर्ष का होता है।

इस साल हुए विधान सभा चुनावो में पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में विधान परिषद् के निर्माण की घोषणा की थी। इससे पहले पश्चिम बंगाल में विधान परिषद् वर्ष 1969 तक मौजूद रही थी। वर्ष 1967 मे हुए आम चुनावो में पश्चिम बंगाल में 14 दलों ने गठबन्धन कर सरकार बनायीं थी जो लम्बे समय तक नहीं चली और कुछ ही महीनो में सरकार गिर गयी। इसके बाद वर्ष 1969 में दूसरा संयुक्त मोर्चा सत्ता में आया जिसके बाद विधान सभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया और चार महीनो के भीतर राज्य में विधान परिषद् को समाप्त कर दिया गया। अब ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने पश्चिमी बंगाल में फिर से विधान परिषद् के गठन को मंजूरी दे दी है, जिससे राज्य में विधान सभा विकास योजनाओ में मदद मिलेगी।

%d bloggers like this: