June 25, 2021

वृतांत – Vritaant

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भारत में व्हाट्सप्प, फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लग सकता है प्रतिबंध, जानिए क्या है कारण ?

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भारत में सॉइल मीडिया के सबसे लोकप्रिय प्लेटफार्म में फेसबुक, व्हाट्सप्प, इंस्टाग्राम और ट्वीटर सबसे ज्यादा लोकप्रिय है लेकिन ये इन सभी प्लेटफॉर्म्स के कारण देश में कई झूटी खबरे लोगो में तेजी से फैलती है जिसके कारण देश में कई बार अशांति का माहौल बन जाता है। इसी के मध्यनजर साल 2021 के जनवरी में सरकार ने घोषणा की थी कि वह सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नए आईटी नियम लाने जा रही है और इन नए सरकार द्वारा लाये गए इन सभी नए नियमो को सभी कंपनियों द्वारा मानना होगा। यदि कोई  भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म इन नियमो का पालन नहीं करता है तो उस पर प्रतिबन्ध लगा दिया जायेगा। इसके अलावा सरकार ने सोशल मीडिया के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी नियंत्रण करने के लिए नए नियम बनाये थे ताकि किसी भी ओटीटी प्लेटफार्म पर उपलब्ध सामग्री को फ़िल्टर किया जा सके और अश्लील सामग्री को कम किया जा सके। जनवरी के माह में सरकार ने सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफार्म दोनों को भारत में नियंत्रित तरीके से रेगुलेट करने के लिए नए नियम बनाये थे क्योकि आये दिन सोशल मीडिया के जरिये कोई न कोई झूटी खबरे जनता में तेजी से फेल जाती थी और ओटीटी पर कोई भी नया शो रिलीज़ होता था तो कोई न कोई विवाद उत्पन्न हो जाता था। इस चीज़ से लडने के लिए सरकार ने 15 फरवरी को नए आईटी नियमो को पेश किया और सभी कंपनियों को इन नियमो को रेगुलेट करने का समय 25 मई तक का दिया गया था जो कि पूर्ण हो चूका है। लेकिंन अभी तक किसी भी सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफार्म ने कोई भी कदम नहीं उठाया है ऐसे में खबरे आ रही है कि यदि में वे ऐसा नहीं करते है तो उन्हें भारत में प्रतिबंधित किया जा सकता है।

नए आईटी नियमो के अंतर्गत सभी कंपनियों को तीन अलग अलग अधिकारियो की नियुक्ति करनी थी जिनमे पहला अधिकारी चीफ कम्प्लाइंस अफसर जिसका काम सरकार और जनता को जवाबदेही होगा। इसके बाद एक नोडल अफसर की नियुक्ति करनी होगी जो सरकार के साथ मिलकर काम करेगा और सरकार को यह सुनिश्चित करेगा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कैसे रेगुलेट किया जाना चाहिए। इसके बाद तीसरा अधिकारी ग्रीवेंस अफसर भी रखना होगा जिसका काम जनता की शिकायतों को सुनना होगा और उन्हें उचित समाधान प्रदान करना होगा। क्योकि सोशल मीडिया सभी के लिए एक ओपन प्लेटफार्म है और कोई भी व्यक्ति यहाँ पर कुछ भी पोस्ट कर सकता है लेकिन यदि किसी व्यक्ति को किसी पोस्ट या सोशल मीडिया सामग्री पर आपत्ति होती है तो वह ग्रीवेंस अफसर को इसकी शिकायत कर सकता है। लेकिन अभी तक किसी भी सोशल मीडिया ने कंपनी ने इनमे से किसी भी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की है और न ही किसी भी नियम को लागु किया है।

इन नियमो को लागु नहीं करने के पीछे के कारणों के बारे में बात करे तो सोशल मीडिया प्लेफॉर्म्स का कहना है कि सरकार द्वारा दिया गया तीन माह का समय उनके लिए कम और उन्हें इसके लिए छह माह का समय दिया जाना चाहिए। भारत में किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म किसी भी नियमो जुड़े हुए निर्णय खुद नहीं ले सकते है क्योकि इन सभी का मुख्यालय यूएस में है जहा से इन्हे नियंत्रित किया जाता है। हालाँकि इनके मुख्यालय में दुनिया के बहुत ही स्मार्ट लोग है और वे इन्हे रेगुलेट करते है जिससे वे इसके लिए भी कोई न कोई रास्ता वे हमेशा निकाल लेते है लेकिन अभी तक इस मामले में कोई भी कदम नहीं उठाया गया है। इसके पीछे भी बहुत से कारण है क्योकि इन सभी नियमो को लागु करना भी बहुत ही ज्यादा मुश्किल है। उदाहरण के लिए यदि सोशल मीडिया पर कोई भी आपत्तिजनक पोस्ट या किसी भी प्लेटफार्म में गड़बड़ होना या कोई भी बुरी चीज़ बहुत ज्यादा तेजी से फैल रही है तो इसके लिए पूरी जवाबदेही मुख्य कार्यकारी अधिकारी की हो जाती है जिससे पूरा मामला चीफ अप्लाइंस अफसर पर आ जायेगा। इसीलिए चीफ अप्लाइंस अफसर को नियुक्त करना किसी भी कंपनी के लिए बहुत ही मुश्किल है।

इन नए नियमो में व्हाट्सप्प जैसी चैटिंग एप्स के लिए भी बदलाव किये गए जिनमे सरकार ने कहा है कि व्हाट्सप्प पर किसी भी अपवाह या बुरी खबर या किसी झूटी खबर फैल जाती है तो व्हाट्सप्प को उस खबर की शुरुवात कहा से हुई थी यह सब बताना होगा जो कि व्हाट्सप्प के लिए मुश्किल है क्योंकि व्हाट्सप्प एन्ड-टू-एन्ड एन्क्रिप्शन पर काम करता है जिससे किसी भी मेसेज के मूल बिंदु का पता नहीं लगाया जा सकता है। यदि व्हाट्सप्प यह मानने को तैयार हो जाता है तो उसे अपना एन्ड-टू-एन्ड एन्क्रिप्शन बंद करना पड़ेगा जिससे यूज़र्स की प्राइवेसी को खतरा हो सकता है। हालाँकि सरकार की हुई समयवधि के पूरा होने के बाद भी किसी भी प्लेटफार्म ने नए नियमो को लागु करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कुछ समय में सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स प्रतिबंधित हो सकते है। हालाँकि सभी कंपनियों के पास एक शक्ति यह है कि वे सरकार के नियमो के विरोध में कोर्ट में याचिका दायर कर सकते है जिसके बाद कोर्ट के फैसले पर सबकुछ निर्भर करेगा।

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