August 4, 2021

वृतांत – Vritaant

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अंटार्टिक की बर्फ के लगातार पिघलने से बढ़ा समुद्र स्तर के तेजी से बढ़ने का खतरा

पृथ्वी पर धरती की तुलना में समुद्र का क्षेत्र बहुत ही ज्यादा है। ऐसे में पृथ्वी के सबसे ठंडे महाद्वीप अंटार्कटिका में विशाल ग्लेशियर मौजूद है लेकिन अब ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ने लगा है और ये विशाल ग्लेशियर पिघल कर मिलने लगे है जिससे अब समुद्र का स्तर और ज्यादा बढ़ने लगा है। नए अध्ययन के मुताबिक पश्चिमी अंटार्टिक में बर्फ की चादर लगातार पिघलने से इस सदी के अंत तक समुद्र का स्तर 20 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। शोध करने वाले वैज्ञानिको ने इस पिघलती हुई बर्फ की चादर पर अध्ययन के लिए नयी गणना को जल निष्कासन तंत्र के रूप में संदर्भित किया है। इसका मतलब यह है कि जब बर्फ की चादर का ठोस आधार ऊपर की ओर बढ़ने लगता है तो बर्फ की चादर का कुल वजन घट जाता है और जब यह अपने आप ऊपर उठने लगता है तो आस पद के क्षेत्र का पानी समुद्र में जाने लगता है जिससे समुद्र के जल स्तर में बढ़ोतरी हो जाती है।

शोध के अनुसार यदि बर्फ की चादर पूरी तरह से ध्वस्त हो जाती है तो 1000 वर्ष के भीतर समुद्र के जल स्तर में वैश्विक वृद्धि एक मीटर तक बढ़ सकती है। जलवायु में तेजी से हो रहे परिवर्तन के कारण एक नया संकट पैदा हो रहा है। इसके कारण बर्फ की चादरे पिघल रही है और इससे बढ़ते हुए समुद्र स्तर के कारण कई द्विपीय देश जल मग्न हो जायेंगे। दुनिया में जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक और मानवीय कारणों से हो रहा है लेकिंन इसके बदलने का सबसे बड़ा योगदान मानवीय कारण है।

लेकिन जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग है जिसके लिए ग्रीन हाउस गैसे जिम्मेदार है। इन ग्रीन हाउस गैसों में कार्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड आदि पृथ्वी के तापमान को तेजी से बढ़ा रही है। इसके अलावा भूमि के उपयोग में परिवर्तन, जंगलो की कटाई, पशुपालन, कृषि और नाइट्रोजन वाले उर्वरको का उपयोग से भी ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है। समुद्र स्तर के बढ़ें से सबसे बड़ा खतरा समुद्र के करीब बसे हुए देशो को है क्योकि ऐसे में भविष्य में इनके अस्तित्व पर खतरा आ सकता है और ये भी समुद्र में मिल सकते है। इससे पृथ्वी पर भूमि का क्षेत्र और कम हो जायेगा और इंसानो के लिए भूमि कम पडने लगेगी।

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