June 25, 2021

वृतांत – Vritaant

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भारतीय चुनावों के महारथी जिन्होंने बंगाल चुनावों के परिणाम पहले ही बता दिये थे – the story of Prashant Kishore

the story of prashant kishore, वृतांत - Vritaant

the story of Prashant Kishore

वर्ष 2014 और मई का महिना तो आप सभी को याद होगा,

जी हाँ यह वो वक़्त था जब वर्तमान के प्रधानमंत्री और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एक बड़े ब्रेंड की तरह उभरकर सामने आये। इतने बड़े ब्रेंड की बड़ी से बड़ी बॉलीवुड और हॉलीवुड हस्तियां उनसे बहुत पीछे छूट गयी। ऐसी लोकप्रियता की ना केवल 130 करोड़ लोगों के भारी जनादेश से वे देश के प्रधानमंत्री बने बल्कि पूरे विश्व में उन्होंने अपनी लोकप्रियता का डंका बजा दिया।

लेकिन कौन था इतनी बड़ी योजना के पीछे? कौन था जिसने एक राजनेता को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने के पीछे की पूरी प्लानिंग की? क्या आपने कभी सोचा है? चलिए आज हम आपको बताते हैं भारतीय चुनावों के महारथी और महान पोलिटिकल पंडित कहे जाने वाले प्रशांत किशोर के बारे में। इसे आप बतौर एक मोटिवेशनल बायोग्राफी पढ़ें तो बेहतर होगा।

Political Strategist Prashant Kishore का शुरूआती जीवन

बिहार के रोहतास जिले में जन्मे प्रशांत किशोर को पढाई लिखाई में कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं थी। बिहार का बक्सर जिला जहाँ उनके डॉक्टर पिता की पोस्टिंग थी वहीं के सरकारी स्कूल से PK ने अपनी पढाई की। गणित और नंबरों का खेल शायद उनका शुरू से बढ़िया था। इसलिए दसवीं कक्षा में गणित विषय में अव्वल आने के बाद साइंस-मैथ्स से उन्होंने 12वीं कक्षा पास की। अपनी स्टडी को लेकर PK कभी सीरियस नहीं हुए, इसलिए 12वीं के बाद उन्होंने 3 साल के लिए पढाई छोड़ दी। इसी तरह लखनऊ से ग्रेजुएशन के बाद 2 साल के लिए पढाई छोड़ दी। PK of Indian Politics

डिजिटल न्यूज चैनल The Lallantop को दिए एक साक्षात्कार में जब PK से पूछा गया कि इस बीच वो क्या कर रहे थे उनका जवाब बड़ा ही स्पष्ट था कि एक नौजवान व्यक्ति जो भी उलटे काम कर सकता था वो बस वही कर रहे थे। पढाई-लिखाई में ज्यादा रूचि नहीं थी लेकिन पिताजी के दबाव में हैदराबाद से इंजिनीयरिंग पूरी की।

हैदराबाद में ही यूनाइटेड नेशंस के साथ काम किया फिर नौकरी के लिए ऑफर मिला तो यूएस गए उसके बाद वेस्ट अफ्रीका में 4 साल काम किया। यहीं काम करते हुए उन्होंने भारत में कुपोषण पर एक लेख लिखा जो उन चार राज्यों पर बेस्ड था जो एकनॉमिकली तेजी से ग्रोथ कर रहे थे। और उन्ही राज्यों में से एक राज्य वो था जहाँ से उनके चुनावी रणनीतिकार के करियर की शुरुआत हुई। जी हाँ हम बात कर रहे हैं गुजरात की, PK ने अपने लेख में कुपोषण को लेकर गुजरात की हालत सबसे चिंताजनक बताई थी।

डिप्लोमेट की नौकरी से स्वदेश वापसी और राजनीति में हस्तक्षेप

इसी लेख को लेकर गुजरात CMO ने प्रशांत से संपर्क किया और शिकायत करने की बजाय यहाँ आकर साथ काम करने का न्यौता दिया। 2011 में अपना सूट-बूट डिप्लोमेट वाला पेशा छोड़कर अब प्रशांत भारत लौट चुके थे। प्रशांत की ख़ास बात यह थी कि यह जहाँ भी गए इन्होने अपनी शर्तों पर काम किया। तो जब ये गुजरात आये तो इन्होने स्पष्ट तौर पर कहा कि वे किसी hierarchy का हिस्सा बनकर काम नहीं करेंगे बल्कि डायरेक्ट CM के साथ जुड़कर काम करेंगे।

उनकी इस शर्त को स्वीकार किया गया और फिर शुरू हुआ PK का एक बड़ा पॉलिटिकल पंडित बनने का सफर। भारत में 2014 में आम चुनाव होने वाले थे इसी दौरान 2013 में किशोर ने आम चुनाव की तैयारी में एक मीडिया और प्रचार कंपनी Citizens for accountable governance (CAG) बनाई। यह वो दौर था जब सोशल मीडिया की शुरुआत भारत में हो चुकी थी और भारत में ऑरकुट की जगह फेसबुक ले चुका था।

2014 आम चुनाव में नरेंद्र मोदी का चुनावी कैंपेन बड़े लेवल पर हुआ और प्रशांत द्वारा दिया गया नारा “अबकी बार मोदी सरकार” बच्चे-बच्चे की जुबान पर चढ़ गया। इसी प्रकार 2015 के बिहार चुनाव में महागठबंधन के पीछे प्रशांत किशोर की ही प्लानिंग थी “बिहार में बहार है, नीतीश कुमार है” जैसे बहुप्रचलित नारों से बिहार चुनाव भी सफल हुआ।

इसी तरह 2017 पंजाब का पंजाब चुनाव जहाँ आम आदमी पार्टी और भाजपा को पटखनी देते हुए कांग्रेस के अमरिंदर सिंह की सरकार बनी। हालाँकि प्रशांत कुछ दफा विफल भी हुए जैसे 2017 का यूपी चुनाव जहाँ कांग्रेस के साथ इन्होने काम किया। और आंधप्रदेश का चुनाव जहाँ YSR Reddy को हार का सामना करना पड़ा। इसी सिलसिले में हाल ही में प्रशांत एक बार फिर लाइम लाइट में आये जब 2021 के बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी ने उन्हें अपना सलाहकार बनाया और भारी बहुमत से विजय प्राप्त की।

Prashant Kishore prediction about Bengal 2021 elections & its truth

prashant tweet

चुनाव के नतीजों से पहले ही प्रशांत अपने ट्विटर हैंडल से कह चुके थे कि बंगाल चुनावों में भाजपा 100 के आंकड़े को पार नहीं करेगी और अंजाम तो आप और हम जानते ही हैं। Prashant abour bengal elections प्रशांत ipac यानि की इंडियन पोलिटिकल एक्शन कमिटी नाम की कंपनी चलाते हैं जिसके थ्रू वे पोलिटिकल कैंपेनिंग का कार्य करते हैं। [ Prashant & Modi ] परन्तु अब प्रशांत ने इस काम को छोड़कर पूरी तरह पॉलिटिक्स ज्वाइन करने की बात कही है अब वे ट्विटर पर सरकार की कठोर आलोचना करते दिखाई देते हैं। Prashant Kishore ipac company

वे अपने क्षेत्र बिहार से अपना पोलिटिकल करियर शुरू करने वाले हैं जहाँ उनका लक्ष्य है पॉलिटिक्स में काबिल युवाओं को आगे लेकर आना और बिहार का तेज गति से विकास करना। आपको बता दें कि प्रशांत को 2018 में जदयू पार्टी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था लेकिन उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया है।

PK – The great political pandit of this era – प्रशांत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बहुत बड़े फोलोवर हैं उनका कहना है कि अगर कोई उनमे या उनके द्वारा कही किसी बात में या उनके द्वारा लिए गये किसी निर्णय में कमी निकालता है तो उसे अपने व्यक्तित्व के विकास पर और अधिक कार्य करने की जरुरत है। प्रशांत आगे पॉलिटिक्स में क्या करते हैं और कितना आगे जाते हैं, क्या उनकी भविष्य की योजनाएं हैं ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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