September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश के सामने टीकाकरण की बड़ी चुनौती

भारत में कोरोना की दूसरी लहार ने भारी तबाही मचाई हुई है और देश कोरोना वायरस के प्रकोप से गुजर रहा है। ऐसे में अब देश के सामने इस तेजी से फैलते हुए कोरोना वायरस को रोकने के लिए एक ही उपाय है और वो है सभी को कोरोना का टिका लगाना। लेकिन यह देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है क्योकि देश की इतनी करोडो जनसँख्या को देखते हुए कोरोना के टीको की उपलब्ध्ता बहुत ही कम है। ऐसे में भारत में केवल दो ही कम्पनिया कोरोना के ठीके का उत्पादन कर रही है जिससे देश के सभी लोगो के लिए प्रयाप्त संख्या में कोरोना के टीके उपलब्ध नहीं हो पा रहे है। लेकिन देश को कोरोना संक्रमण से बचाने और कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सभी का टीकाकरण होना सबसे ज्यादा आवश्यक है। ऐसे में अब देश के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती है कि भारत सरकार कैसे सभी लोगो को कोरोना का टीका लगा पायेगी और कितने कम समय में यह काम पूरा कर पायेगी ?

हालाँकि सरकार ने देश में 18 से 44 वर्ष तक की आयु के लोगो को कोरोना का टीका लगाने की शुरुवात कर दी है। लेकिन पहले किये गए टीकाकरण से इस बार किए जा रहे टीकाकरण में कमी देखी जा रही है। इसके अलावा देश में शहरो और गावो में भी कोरोना की टीकाकरण प्रक्रिया में अंतर दिखाई दे रहा है। देश में कोरोना मरीजों की संख्या बहुत ही ज्यादा बढ़ गयी है जबकि सरकार के पास टीको की उपलब्धता में कमी आ गयी है। हालाँकि देश में 18 से 44 वर्ष तक के लोगो के लिए मुफ्त में टीकाकरण करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण भी शुरू कर दिया गया है लेकिन अभी तक पंजीकृत किसी भी व्यक्ति को टीका नहीं लग पाया है। अधिकारियो के अनुसार पंजीकरण की प्रक्रिया इसलिए कराई गयी ताकि टीकाकरण केन्द्रो पर भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। इसके अलावा सरकार टीकाकरण से पहले पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया है जिसके लिए लोगो को पहले कोविन पोर्टल पर जाकर पंजीकरण करना होगा।

भारत में अब तक लगभग 17 करोड़ लोगो को कोरोना का टीका लगाया जा चूका है। लेकिन अब सरकार के सामने कोरोना के टीको की मांग और आपूर्ति में असामनता की सबसे बड़ी चुनौती है। इसके अलावा गावो और शहरो में भी टीकाकरण को लेकर असमानता देखी जा रही है जिससे अब नयी चुनौतियां सरकार के सामने पेश हो रही है। कोरोना की वैक्सीन की कमी की बात करे तो भारत सहित पूरी दुनिया में कोरोना वैक्सीन की कमी देखी जा रही है। भारत में कोरोना छोटी जगहों पर कोरोना वैक्सीन में की उपलब्धता में कमी देखी जा रही है जिससे अस्पतालों  में वैक्सीन को मांगने, इसकी उपलब्धता के लिए दी गयी सुविधाओं का खर्च और वैक्सीन की कीमत में बढ़ोतरी के कारण शहरो और गावो में टीकाकरण को लेकर अंतर देखा जा रहा है।

कोरोना के टीकाकरण को लेकर शहरो में ज्यादा रुझान इसलिए भी देखने को मिल रहा है क्योकि सरकार ने टीकाकरण के लिए पंजीकरण को आवश्यक कर दिया है जिससे गावो के लोगो के पास आवश्यक सुविधाएं नहीं होने के कारण वे इसके लिए पंजीकरण नहीं करा पा रहे है जबकि शहरो से लोग बहुत अधिक संख्या में कोरोना के टीकाकरण के लिए पंजीकरण कर रहे है। इसका एक कारन यह भी है कि कोविन पोर्टल पर सभी जानकारी अंग्रेजी भाषा में दी गयी है जिससे गांव के लोग शहरी लोग के मुकाबले कम सहज हो पाते है जिससे वे पंजीकरण की प्रक्रिया को समझ नहीं पा रहे है। इसके अलावा देश के कई गावो में इंटरनेट की उपलब्धता नहीं होना भी एक बड़ा कारण है। ऐसे में भारत सरकार के सामने कोरोना को रोकने के लिए सबसे बड़ी चुनौती कोरोना के टीकाकरण की है। अब सरकार को नए तरीको देश सभी लोगो  को कोरोना की वैक्सीन लगाने की योजना तैयार करना और वैक्सीन की देश के सभी राज्यों तक उपलब्धता को मजबूत करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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