June 25, 2021

वृतांत – Vritaant

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अमेरिका और रूस सम्मलेन से होगी दोनों देश के बीच रिश्तो की नयी शुरुवात

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दुनिया के दो शक्तिशाली देशो अमेरिका और रूस के मध्य सालो से प्रतिस्पर्धा चलती आयी है। ऐसे में अब दोनों देशो के बीच 16 जून को शिखर सम्मलेन होने जा रहा है। इस बात की जानकारी अमेरिका के वाइट हाउस ने दी और कहा कि इस सम्मलेन का उद्देश्य रूस को अमेरिका के विचारो से अवगत कराना है। इस सम्मलेन में किसी नतीजे या आदान-प्रदान के बारे में चर्चा नहीं की जाएगी। 16 जून को यह शिखर सम्मलेन जेनेवा में आयोजित किया जायेगा। इस सम्मलेन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और रुसी राष्ट्रपति व्लामिदिर पुतिन के साथ बैठक करेंगे। इसके अलावा इस सम्मलेन में भाग लेने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ब्रिटेन में जी-7 शिखर सम्मलेन, नाटो की बैठक और ब्रुसेल्स में अमेरिका-यूरोपीय संघ बैठक में भाग लेंगे। अमेरिका के राष्ट्रिय सुरक्षा सलाहकार ने जानकारी देते हुए कहा कि दोनों देशो के बीच होने वाले सम्मलेन को किसी परिणाम की दृष्टि से नहीं देखा जा सकता। इस बैठक के नतीजों की बात करे तो इसमें लम्बे समय तक का इंतजार भी करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा सोचने की बात यह है कि दोनों देशो के बीच कोई वार्ता हो रही है जिससे रूस को अमेरिका के विचार को जानने का मौका मिलेगा और उनके विचारो को हमे जानने का मौका मिलेगा। इस बैठक के साथ दोनों देश एक दूसरे की क्षमताओं के बारे में विचार कर सकते है और दोनों देशो के रिश्तो को सुधारने की ओर कदम बढ़ा सकते है।

इसके बाद उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के राष्ट्रपतियों के साथ बाइडेन की मुलाकात के बाद अमेरिका और रूस के बीच जटिल मुद्दों पर बात करने के लिए इस शिखर सम्मलेन में शामिल होना अमेरिकी दृष्टिकोण से रूस के साथ बातचीत एक सही दिशा की ओर कदम हो सकता है। अमेरिका के अनुसार रूस के साथ बातचीत आपसी विश्वास और रिश्ते के बारे में नहीं है बल्कि दोनों अपनी अपेक्षाओं के संबंध में एक दूसरे से बातचीत करेंगे और यदि रूस  की ओर से कोई भी हानिकारक गतिविधिया जारी रहती है तो अमेरिका हमेशा उनका जवाब देगा। अमेरिका और रूस के संबंध हमेशा से वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर वैचारिक मदभेदों के कारण एक दूसरे से अलग रहे है जिससे दोनों देशो के बीच हमेशा से रणनीतिक गतिरोध देखने को मिला है। दोनों देश शीत युद्ध के दौरान प्रतिद्वंदी रहे थे जिसके बाद भी दोनों देशो के रिश्तो में सुधर नहीं हुआ बल्कि अभी दोनों के संबंधो में वही शीत युद्ध की क्रूरता नजर आती है। इससे वैश्विक सुरक्षा को खतरा हो सकता है। कई रणनीतिक विचारको द्वारा इसे नया शीत युद्ध कहा जा रहा है।

दोनों देशो को वैश्विक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शीत युद्ध के स्थान पर शांति स्थापित करने में ध्यान देने की आवश्यकता है। लेकिन दोनों देशो के द्वारा उन्नत हथियारों की तैनाती लगातार बढ़ाई जा रही है। दोनों देश रणनीतिक मामलो में एक दूसरे को घेर रहे है जबकि दोनों देशो के बीच कोई युद्ध या सीधा टकराव नहीं है। दोनों देश अपने विचारो, रणनीतिक मामलो और आर्थिक कारको की एक जटिल क्रिया द्वारा संचालित रहे है। इससे पहले साल 1979 में जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया था तब दोनों देशो के बीच नया तनाव देखने को मिला। लेकिन जब कम्युनिस्ट प्रणाली का पतन हुआ तब अमेरिका और रूस के साथ अन्य देशो के बीच भी मित्रता का नया रास्ता खुल गया। इसके बाद जब साल 2014 में रूस ने क्रीमिया पर कब्ज़ा कर लिया था तब पश्चिमी देशो ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। हालाँकि भारत ने दोनों देशो के साथ समान रणनीतिक भागीदारी के रूप में संबंध बनाये हुए है। भारत और रूस ऐतिहासिक रूप से भी एक दूसरे के साथ अन्य क्षेत्रो में व्यापार से जुड़े हुए है। इसके अलावा अमेरिका के लिए भी भारत के साथ साझेदारी महत्वपूर्ण है ताकि एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को को कम किया जा सके।

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