July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

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भारत की जल प्रबंधन पर स्टेटस रिपोर्ट, जानिए भारत में जलाशयों की क्या स्थिति है ?

भारत में हाल ही में देश में जलप्रबंधन को लेकर एक स्टेटस रिपोर्ट जारी की गयी है जिसमे भारत में में जल प्रबंधन और भारत में जलाशयों के स्तर में हुई वृद्धि के बारे में बताया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में यास और ताऊ-ते जैसे चक्रवातों के कारण देश के जलाशयों के जल स्तर में वृद्धि देखने को मिली है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार देश के 130 प्रमुख जलाशयों में उनकी क्षमता का 27 प्रतिशत जल दक्षिण-पश्चिम मानसून आने से पहले ही जमा हो गया है। इस साल यह औसत संग्रहण से भी बहुत ज्यादा अधिक है क्योकि पिछले दस वर्षो के औसत जल संग्रहण की बात की जाये तो यह 21 प्रतिशत था जो इस वर्ष बढ़ कर 27 प्रतिशत हो गया है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार देश के 130 जलाशयों में से 49 में जून 2020 की तुलना में अधिक मात्रा में पानी संग्रहित हुआ है। इन जलाशयों में अधिकार जलाशय झारखंड, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में स्थित है। इन राज्यों में स्थित जलाशयों में इस साल सबसे अधिक मात्रा में पानी एकत्र हुआ है जबकि कम भण्डारण वाले जलाशयों की बात की जाये तो पंजाब, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और ओडिसा जैसे राज्यों में स्थित है। इसके अलावा देश के दो बड़े बांध जिनमे ओडिसा का  हरिहरजोर और महाराष्ट्र का उज्जनी बांध डेड स्टॉक के स्तर तक पहुंच गए। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में इस बार जल का संग्रहण बहुत ही अधिक मात्रा में हुआ है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार देश के 130 में से 110 जलाशय ऐसे है जिनमे 80 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, 20 ऐसे जलाशय जिनमे 80 प्रतिशत या इससे कम की जल की वृद्धि हुई है, १12 ऐसे जलाशय है जिनमे 50 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है और 8 ऐसे है जिनमे 50 प्रतिशत से कम की वृद्धि हुई है।

अगर क्षेत्र वार विवरण की बात करे तो उत्तरी भारत में पंजाब, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान को मिलकर 8 जलाशयों में जल स्तर भण्डारण क्षमता का 20 प्रतिशत हो गया है। यह साल 2020 में 38 प्रतिशत और दस सालो के औसत 32 प्रतिशत से भी कम है। अगर पूर्वी भारत की बात की जाये तो झारखंड, ओडिसा, पश्चिमी बंगाल, त्रिपुरा और नागालैंड के 20 जलाशयों में इस बार कुल भंडारण क्षमता का 20 प्रतिशत रहा है। जबकि पिछले साल इन जलाशयों में भंडारण 28 प्रतिशत था और दाल सालो का औसत भण्डारण 21 प्रतिशत था। ऐसे ही देश के अलग अलग क्षेत्रो में स्थित जलाशयों में भंडारण अलग अलग रहा है। भारत में जल उपलब्धता के बारे में बात की जाये तो भारत फ़िलहाल मीठे पानी के संकट से जूझ रहा है। भारत के पास दुनिया के ताजा पानी का सिर्फ 4 प्रतिशत जबकि वैश्विक आबादी का 18 प्रतिशत हिस्सा है।

भारत की जल प्रबंधन स्थिति की बात की जाये तो भारत के पास 1700 क्यूबिक मीटर है। केंद्रीय जल आयोग जल संसाधन के क्षेत्र में एक तकनिकी संघठन है। वर्तमान में जल शक्ति मंत्रालय, जल संसाधन विभाग, नदी विकास और गंगा संरक्षण आदि भारत सरकार के एक संलग्न कार्यालय के रूप में कार्यरत है। इस आयोग को देश में बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, नेविगेशन और पेयजल आपूर्ति से जुडी योजनाए, संरक्षण, जल विधुत विकास और पुरे देश में जल संसाधनों के उपयोग से जुडी सामान्य जिम्मेदारियां सौपी जाती है। भारत में जल प्रबंधन की चुनौतियों के बारे में बात करे तो भू जल का सिंचाई के लिए जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। जल निकायों में जैविक और रासायनिक प्रदूषकों के मिलने से जल उपयोग करने लायक नहीं बचा है। इसके अलावा पराम्परिक जल निकायों में सीवेज और अपशिष्ट पदार्थो के मिलने से भी जल दूषित हो रहा है। सबसे बड़ी चुनौती की बात करे तो जनसँख्या वृद्धि, औधोगिकीकरण और तेजी से बढ़ता हुआ शहरीकरण है। हमे जल प्रबंधन के लिए और भी सख्त कदम उठाने की जरुरत है ताकि जल को भविष्य उपयोग के लिए बचाया जा सके।

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