July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

खबर, संवाद और साहित्य

चीन हिन्द महासागर में बढ़ा रहा अपनी समुद्री ताकत, जानिए इसके लिए भारत की रणनीति क्या है

चीन को हाल ही में नाटो देशो ने वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बताया था क्योकि चीन लगातार अपने खतरनाक हथियारों का परिक्षण कर रहा है। ऐसे में अब चीन अपनी समुद्री ताकत को भी और बढ़ा रहा है। साल २००४ में चीन ने रक्षा क्षेत्र से जुड़ा हुआ एक श्वेत पत्र पेश किया था। इसके बाद साल 2012 में चीन के तत्कालीन राष्ट्रपति हू जिन्ताओ ने घोषणा की थी कि चीन का लक्ष्य एक समुद्री ताकत बनने का है और अब उसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए चीन लगातार अपनीं समुद्री ताकत को बढ़ा रहा है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा जहाज उत्पादक देश है। ऐसे में चीन अब अपनी नौसेनिक शक्ति ने विस्तार कर रहा है। चीन के पास सबसे बड़ी मर्चेंट नेवी है, कोस्ट गार्ड और फिशिंग फ्लीट है। चीन स्ट्रिंग एंड पर्ल निति, बेल्ट एंड रोड पहल के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। आखिर चीन इस क्षेत्र में अपने प्रभुत्व को बढ़ाना चाहता है इसके लिए हमे हिन्द महासागर के महत्व को समझना आवश्यक है। हिन्द महासागर दुनिया के पांच बड़े महासागरों में तीसरे स्थान पर आता है। तेल उत्पादन की बात की जाये तो दुनिया का करीब 40 प्रतिशत तेल का उत्पादन यही होता है। इसके अलावा हिन्द महासागर में कई महत्वपूर्ण क्षेत्र आते है जैसे बंगाल की खाड़ी, अरब सागर, अदन की खाड़ी, पारस की खाड़ी, लाल सागर आदि। चीन की स्ट्रिंग ऑफ़ पर्ल निति के तहत चीन आस पास के देशो के कई बड़े बंदरगाहों पर कब्ज़ा कर अपना प्रभुत्व बनाने की कोशिश कर रहा है। हिन्द महासागर में बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देशो के बंदरगाहों के जरिए चीन हिंदी महासागर में अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाह रहा है।

इस तरह से हिन्द महासागर में अपना प्रभत्व स्थापित करने के बाद चीन लाल सागर में जो कि यूरोपीय देशी को जोडने का सबसे अहम् मार्ग है को नियंत्रित करना चाहता है। इस तरह से हम समझ सकते है कि चीन के लिए हिन्द महासागर क्यों महत्वपूर्ण है। ऐसे में जरुरी यह कि भारत के अलावा जो भी देश हिन्द महासागर को साझा करते है वे आपसी हितो का सम्मान करते रहे ताकि किसी अन्य देश का नियंत्रण इस क्षेत्र में न हो सके। यदि चीन ने इस क्षेत्र में अपना प्रभत्व स्थापित कर लिया तो पूरा समुद्री व्यापर मार्ग चीन के नियंत्रण में आ सकता है जिससे अन्य देशो को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। हिन्द महासागर भौगोलिक अवस्थी के अनुसार भी महत्वपूर्ण है और यहाँ पर ब्लू इकॉनमी यानि मत्स्य व्यापार अधिक होता है। हिन्द महासागर में कई महत्वपूर्ण बंदरगाह है जहा से कई देशो के बीच परिवहन और माल की आवाजाही होती है।

इस मामले में अगर भारत की रणनीति की बात की जाये तो भारत हिन्द महासागर का एक विश्वसनीय भागीदार है। हिन्द महासागर में ही भारत और अमेरिका के बीच समुद्री युद्धाभ्यास पाससेक्स भी किया गया था। इसके अलावा भारत ने इसी तरह का युद्धाभ्यास जापान के साथ भी पिछले साल की थी। इसी के साथ भारत भी चीन के हिन्द महासागर में बढ़ते हुए हस्तक्षेप को देखते हुए कई अन्य देशो के साथ मिलकर हिन्द महासागर में चीन को प्रभुत्व स्थापित करने से रोकने के लिए अहम् भूमिका निभा रहा है। भारत, चीन के साथ नौसेना शक्ति में कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहा है जिससे चीन को रोकने में मदद मिलेगी। इसके अलावा भारत रीजनल मेरीटाइम ट्रैफिक सेंटर भागीदार है जिसमे हिन्द महासागर के सभी भागीदार एक वर्चुअल नेटवर्क स्थापित कर रहे है। इसके अलावा भारत को अधिक सक्रीय रूप से अपनी नीतियों को गति देने की आवश्यकता है ताकि चीन की समुद्री ताकत का जवाब दिया जा सके। भारत को हिन्द महासागर में परिचालन द्वारा अपनी स्थिति को और भी मजबूत करने की आवश्यकता है। भारत – चीन के आपसी मतभेदों के मामले में भारत एक नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभा सकता है और इसके अलावा अन्य परियोजनाओं को भी संचालित करने की आवश्यकता है। भारत को अन्य देशो के साथ हिन्द महासागर में अपना परिचालन बढ़ाना होगा ताकि भारत व अन्य देशो की मदद से चीन को अपने लक्ष्य को हासिल करने रोका जा सके।

%d bloggers like this: