June 25, 2021

वृतांत – Vritaant

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भारत सरकार ने की राजस्थान सहित पांच राज्यों में नागरिकता आवेदनों की शुरुवात

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हाल ही में केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी की जिसके तहत देश के पांच राज्यों गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा, और पंजाब में नागरिकता संबंधी आवेदन शुरू किये जायेंगे। इन पांचो राज्यों के तेरह जिलों में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्प संख्यको समुदायों के लोगो के लोगो के आवेदन पर अधिकारियो द्वारा नागरिकता स्वीकार करने, सत्यापित करने और अनुमोदित करने के लिए शक्तिया दी गयी है। इस अधिसूचना में कहा गया है कि हिन्दुओ, सिखो, बोद्धो, जेनियो, पारसियों और ईसाइयो को उन समुदायों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है जिनके लोगो को नागरिकता दी जाएगी। इस अधिसूचना के जारी होने के बाद देश में एक बार फिर से सीएए चर्चा में आ गया है। इस कानून पर सरकार द्वारा लम्बे समय से नए नियम बनाने के लिए काम चल रहा है। सूत्रों के अनुसार नागरिकता संशोधन कानून के लिए नियम अभी तक नहीं बनाये गए है। लेकिन हाल में जारी की गयी अधिसूचना को नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के तहत जारी नहीं किया गया है बल्कि इसे नागरिकता अधिनियम 1955 और नागरिकता नियम 2009 के तहत जारी किया गया है। इस अधिसूचना के तहत गुजरात के मोरबी, राजकोट, पाटन और वड़ोदरा जिलों ; राजस्थान के जालौर, पाली, उदयपुर, बाड़मेर और सिरोही जिलों, हरियाणा के फरीदाबाद, पंजाब के जालंधर और छत्तीसगढ़ के दुर्ग और बलोदा बाजार आदि जिलों को सूचीबद्ध किया गया है। इसमें फरीदाबाद और जालंधर को छोड़कर हरियाणा और पंजाब के गृह सचिवों को भी शक्तिया प्रदान की गयी है।

इन सभी जिलों के कलक्टरों को भी प्रमाण मंजूर करने की शक्तिया भी केंद्र सरकार द्वारा दी गयी है। कलेक्टर और सचिव को सरकार द्वारा एक ऑनलाइन और एक भौतिक रजिस्टर बनाने के लिए कहा गया है जिसमे भारत की नागरिकता के रूप में पंजीकृत या देशीयकृत व्यक्ति का विवरण हो और इसके अलावा नागरिकता के पंजीकरण की एक प्रति सात दिनों के भीतर सरकार को देनी होगी। नागरिकता अधिनियम 1955 अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता लेने के लिए प्रतिबंधित करता है। यह नागरिकता प्राप्त करने के लिए विभिन्न आधार जैसे जन्म, वंशनुगत, पंजीकरण, देशीयकरण और क्षेत्र इत्यादि प्रदान करता है। इसके अलावा यह अधिनियम कुछ शर्तो को पूरा करने वाले व्यक्तियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने हेतु आवेदन करने की अनुमति प्रदान करता है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 :

साल 2019 में संसद ने नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पारित किया जिसको राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अधिनियम बना दिया गया है। यह नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करता है। इसके अनुसार 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आये गैर मुस्लिम समुदाय के लोगो अवैध प्रवासी नहीं माना जायेगा। इस अधिनियम के तहत 11 वर्षो की शर्त को हटाकर अब पांच वर्ष कर दिया गया है। इसके अलावा नागरिकता प्राप्त करने के लिए ऐसे व्यक्तियों को भारत में उनके प्रवेश की तारीख से भारत का नागरिक माना जायेगा और उनके खिलाफ सभी क़ानूनी कार्यवाही बंद कर दी जाएगी। नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 यानि सीएए को लेकर देश में भारी विरोध और प्रदर्शन भी हुए। इसके अलावा सीएए के विरोध में दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भी भड़क उठे थे।

इसको लेकर विवाद इसलिए भी हो रहा है क्योकि कुछ आलोचकों के अनुसार यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है क्योकि धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत संविधान की प्रतावना में निहित किया गया है। इसके अलावा इस अभिनियम का विरोध कर रहे लोगो का कहना है कि यह अधिनियम एक धर्म विशेष का विरोध करता है और भारत जैसे धर्म निरपेक्ष देश में धर्म के आधार पर भेद भाव करता है। साथ में इस अधिनियम के विरोधियो का मानना है कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाले अवैध प्रवासी जिनका संबंध इन छह धर्मो से नहीं है वे नागरिकता के लिए पात्र नहीं है। इस मामले में सरकार का कहना है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश इस्लामिक गणराज्य है जहा पर मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यक है इसलिए उन्हें उत्पीड़ित अल्पसंख्यक नहीं माना जा सकता है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य किसी की नागरिकता लेने की बजाय उन्हें  सहायता देना है।

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