July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

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महाभारत की इन तीन महत्वपूर्ण शिक्षाओं को आज की पीढ़ी को अपने जीवन में जरूर उतरना चाहिए

हमारे देश भारत में रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथो के बारे में स्कूलों में बहुत ही कम पढ़ाया जाता है। कुछ लोगो का मानना है कि ये दोनों धार्मिक ग्रन्थ है लेकिन देखा जाये तो ये दोनों ही हमारे इतिहास का हिस्सा है। अगर बात की जाये तो यह किसी धर्म की बात नहीं है बल्कि कहानियो की है क्योकि स्कूलों में बच्चे सबसे ज्यादा कहानियो से ही सीखते है। ऐसे में देखा जाये तो महाभारत और रामायण दोनों ही हमे जीवन की सही राह दिखाते है। आज की पीढ़ी के लिए अगर बात की जाये तो महाभारत की तीन ऐसी शिक्षाए जो आज की पीढ़ी अपने जीवन में उतारना चाहिए और आज की पीढ़ी के लोगो को ऐसे पथ की बहुत हिह ज्यादा जरुरत है ताकि वे अपने जीवन को सही दिशा दे सके। जानिए महाभारत की ऐसी कौनसी तीन शिक्षाए है जो आज के जमानें के लोगो को अपने जीवन में शामिल करना चाहिए।

1 अपनी शक्ति पर कभी घमंड नहीं करना : आज इंसान ने विज्ञानं के जरिये अपने जीवन को बहुत ही आसान बना लिया है और ऐसे में लोगो को लगता है कि वे विज्ञानं के जरिए सबकुछ नियंत्रित कर सकते है। जैसे आज इंसान के लिए चाँद और अन्य ग्रहो पर पहुंचना बहुत ही आसान हो गया है, घर बैठे कोई भी जानकारी पा सकता है यहाँ तक कि जमीन और समुद्र की गहराई से पेट्रोलियम निकाल सकता है लेकिन इंसान कुछ भी कर ले अगर वह प्रकृति से छेड़छाड़ करता है तो उसे इसका फल भुगतना ही पड़ता है। जैसे महाभारत में भीम खुद को दुनिया में सबसे ताकतवर समझते थे और उन्हें अपनी ताकत पर बहुत ही घमंड हो गया था। ऐसे में वे किसी से भी नहीं डरते थे लेकिन वनवास के दौरान उनके सामने एक वानर आया और वह वानर भीम के रास्ते में आ रहा था। वानर बहुत ही कमजोर था और वह उठ भी नहीं पा रहा था तो भीम ने वानर को उनके रास्ते से अपनी पूंछ को उठाने को कहा। लेकिन वानर ने भीम से कहा कि में तो कमजोर हूँ, आप ही मेरी पूंछ उठा दो और चले जाओ। ऐसे में भीम को गुस्सा आया और उन्होंने अपने पैरो से उस वानर की पूंछ को रास्ते से हटाना चाहा लेकिन पूंछ हिली ही नहीं। इसके बाद भीम ने अपनी पूरी ताकत से पूंछ जो उठाने की कोशिश की लेकिन वह पूंछ उनसे नहीं हिल सकी। ऐसे में भीम आखिर में हाथ जोड़ लिए और यह जान गए थे कि ये कोई साधारण वानर नहीं है। ये पवनपुत्र हनुमान थे। इसके बाद हनुमानजी अपने असली रूप में आते है और भीम से कहते है कि शक्ति तो कई लोगो के पास होती है लेकिन जिस क्षण हमे हमारी शक्ति पर गर्व होने लगे तब वही शक्ति हमारी कमजोरी बन जाती है। यानि कुछ काम हमे शक्ति से नहीं हाथ जोड़कर भी करने पड़ते है और  इसमें कोई  शर्म नहीं है।

2 सच्चे मित्र की पहचान : आज के ज़माने सच्चे दोस्त की बहुत आवश्यकता होती है लेकिन कौन हमारा सच्चा दोस्त है इसके बारे में हम महाभारत के पात्र कर्ण और दुर्योधन से सिख सकते है। कर्ण और दुर्योधन भी एक दूसरे के अच्छे मित्र थे क्योकि जब कर्ण के भाइयो ने कर्ण को बेइज्जत किया और उसका मजाक उड़ाया तब दुर्योधन ने उसको गले लगाया और उसे अपनी बराबरी का दर्जा दिया। कर्ण दुर्योधन के द्वारा सम्मान मिलने पर उसकी हर बात में साथ देता था चाहे दुर्योधन सही करे या गलत। कर्ण महाभारत में ऐसा पात्र है जिससे हम बहुत कुछ सिख सकते है लेकिन कर्ण के साथ हमेशा से नाइंसाफी हुई थी। लेकिन आखिर कर्ण ने कहा गलती की ? जब भी दुर्योधन ने घोर पाप किये तब कर्ण ने आंखे बन करके दुर्योधन का साथ दिया और हमेशा दुर्योधन का पक्ष लिया। यानि जिन गलत कामो को करने से कर्ण को दुर्योधन को रोकना चाहिए था वहा कर्ण ने उसका साथ दिया और यही उसके जीवन की सबसे बढ़ी भूल थी। कर्ण ने दुर्योधन के लिए अपनी पूरी सच्ची मित्रता दिखाई लेकिन फिर भी वह फ़ैल हो गया और एक बार नहीं वह बार बार फ़ैल हुआ क्योकि उसने दुर्योधन को आइना नहीं दिखाया। इससे हम सिख सकते है कि हमारे असली दोस्त कौन होते है ? हमारे असली दोस्त वही होते है जो हमे गलत रास्ते पर जाने से रोकते है और हमे हमारी गलतियों का एहसास कराते है।

3 असली हीरो कौन होता है : महाभारत में पांडवो और कौरवो में दोनों में से कोई भी पूरी तरह से संपन्न नहीं था। पांडवो और कौरवो दोनों में गुण भी थे और कमियां भी थी लेकिन फिर भी महाभारत की लड़ाई में पांडवो की विजय हुई और सबको इस बात का संतोष भी है। आखिर पांडवो को ही को जितना चाहिए था ? कौरवो को पांडवो में एक खास अंतर् था जो पांडवो को जित का हक़दार बनाता था क्योकि पांडवो ने अपने जीवन में गलतियों का सामना किया, अपनी गलतियों से वे कभी हारे और कभी जीते लेकिन कभी उनसे भागे नहीं। दूसरी तरह देखा जाये तो कौरव हमेशा अपनी स्थिति के लिए दुसरो को जिम्मेदार ठहराते थे और कभी अपनी गलतियों की ग्रहण नहीं किया। इसी के साथ वे हमेशा दुसरो पर अपनी गलितयों का बोझ मढ़ देते थे। उन्होंने कभी अपनी गलतियों का सामना नहीं किया और हमेशा उनसे बचकर भागते रहे थे। यानि आज ज़माने यह बहुत ज्यादा जरुरी है कि लोग यह सीखे की उन्हें अपनी गलतियों का सामना करना चाहिए और उनको ग्रहण करके सुधार करना चाहिए।

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