June 25, 2021

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क्या कोरोना वायरस प्राकृतिक वायरस नही है ? जानिए क्या है सच्चाई

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पिछले साल जब कोविद-19 या कोरोना वायरस चीन से पूरी दुनिया में फैला तो इसके फैलने के कई अलग अलग तर्क पेश किये गए। कई शोध और खोज बिन से सामने यह भी आया कि यह वायरस प्राकृतिक वायरस नही है। इसके बाद कई सवाल पूरी दुनिया में उठने लगे, जैसे कि क्या यह वायरस जानबूझ कर फैलाया गया था ? क्या यह किसी की लापरवाही का नतीजा था ? इसके अलावा क्या यह चीन के वुहान शहर में स्थित लैब से लीक हुआ था ? इन सभी सवालो के जवाब तलाशने के लिए दुनिया भर के कई वैज्ञानिको ने सभी सवालो के जवाबो को साबुत के साथ पूरी दुनिया के सामने रखा। पिछले डेढ़ साल से मीडिया के जरिये लोगो यह बताया जा रहा है कि कोरोना वायरस के लिए जिम्मेदार केवल इंसान और प्रकृति ही है। कोरोना वायरस इंसान द्वारा बनाया जा सकता है इस बात की पुष्टि निकोलस वेड ने की। निकोलस वेड न्यू यॉर्क टाइम्स के विज्ञानं सेक्शन के लेखक रह चुके है। इन्होने कई पेपर भी पब्लिश किये जिनमे कोरोना वायरस से जुड़े हुए सवाल भी पूछे। जब साल 2019 में इस वायरस के बारे में दुनिया को पहली बार पता चला तो इसके बारे में बताया गया कि यह वायरस चमकादड़ो से इंसानो में फैला है और यह भी बताया गया कि वुहान बाजार में अलग अलग तरह के जानवरो को रखा जाता है और उन्हें खाने के लिए बेचा जाता है वही से यह कोरोना वायरस इंसानो में फैला है। पूरी दुनिया भर में इस सिद्धांत को ज्यादातर लोगो ने मान लिया। निकोलस वेड ने इसी सिद्धांत के बाद अपने पेपर के जरिये सवाल पूछा कि इसके लिए मध्यस्थ जानवर कौन है ? यानि जब कोई वायरस जानवरो से इंसानो में आता है तो यह एक मध्यस्थ जानवर के कारण आता है। सार्स में यह चमकादड़ो से यह वायरस पहले सीविट बिल्ली में आया और इस सीविट बिल्ली को चीन में इंसानो द्वारा खाया जाता है।

इसके बाद मेर्स में  यह वायरस चमकादड़ से ऊंट में आया है और ऊंट को पूर्व मध्य देशो के के लोग खाते है जिसके कारण यह इंसानो में आया। कोरोना को महामारी घोषित हुए दो साल से भी अधिक समय हो गया है लेकिन अभी तक यह पता नहीं लग पाया है कि इस वायरस को इंसानो में फैलाने के लिए कौनसा जानवर जिम्मेदार है। इस सवाल का जवाब न तो डब्ल्यूएचओ के पास है नहीं चीन के पास। इसके बाद दुनिया के सामने इस वायरस को फैलने का दूसरा सिद्धांत सामने आया। इसमें बताया गया कि यह वायरस चीन के वुहान स्थित लैब से फैला है। चीन के वुहान में एक लैब ऐसी भी है जिसमे अलग अलग वायरस पर अध्ययन किया जाता है। इसके बाद सामने आये पीटर डेज़क जो एको हेल्थ अलाइंस के प्रेसिंडेंट है। यह एक एनजीओ है जो दुनिया भर के अलग अलग वायरस की जाँच के लिए फण्ड देती है। इसके बाद एक वीडियो सामने आया जिसमे पीटर कहते हुए नजर आते है कि कैसे कोरोना वायरस का इस्तेमाल करके और भी तेजी से फैलने वाला वायरस बनाया जा सकता है और इसे लैब में बनाया जा सकता है। यह वीडियो साल 2019 का है जो साल 2020 में सामने आया। अजीब बात यह  भी है कि पीटर उन्ही लोगो में से है जिन्हे इस साल चीन में कोरोना वायरस के मूल बिंदु का पता लगाने के लिए शामिल किया गया है। इन्होने बिना किसी जाँच पड़ताल के ही यह कह दिया कि यह वायरस प्राकृतिक वायरस है।

इसके बाद डब्ल्यूएचओ के ह्यूमेन जीनोम एडिटिंग सलाहकार जेमी मेट्ज़ेल ने कहा कि जब से कोरोना वायरस को पूरी दुनिया भर में महामारी घोषित किया गया है तब से कुछ लोग कोरोना वायरस को लैब में भी बनाया जा सकता है, ऐसा कहने वाले वैज्ञानिको को दबाने की कोशिश की जा रही है। चीन की वैज्ञानिक डॉ ली-मेंग यान पहली थी जिन्होंने कहा कि यह वायरस पूरी तरह से इंसानो द्वारा बनाया हुआ वायरस है। इसके बाद से ही चीन में उनकी आवाज़ को दबाने की बहुत कोशिश की। ली-मेंग ने कहा है कि जो लोग यह बोल रहे है कि यह वायरस प्राकृतिक है वे झूट बोल रहे है। चीन ने इनकी आवाज़ दबाने के लिए ली-मेंग की माँ को भी परेशान किया। यानि अलग अलग वायरस पर प्रयोग करके और भी खतरनाक वायरस बनाना कोई नयी बात नहीं है। इसका एक कारण यह भी है कि एक वायरस के प्राकृतिक रूप खतरनाक होने से पहले हम एक नियंत्रित वातावरण में उस पर प्रयोग करके जल्दी वैक्सीन ला सकते है। इस प्रक्रिया के दुष्परिणामों के कारण साल 2014 में ओबामा ने इस प्रक्रिया पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन चीन और डेनमार्क  जैसे देशो में यह अभी भी जारी है और इसी की लापरवाही के कारण दुनिया आज  इस वायरस से जूझ रही है।

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