July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

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नाटो ने चीन को अंतराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया

हाल ही में हुए नाटो सुरक्षा सम्मलेन 2021 में सदस्य देशो के बीच कई अंतराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। इस बार सबसे बड़ा मुद्दा अंतराष्ट्रीय सुरक्षा का रहा। नाटो में शामिल देशो के लिए चीन सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है और नाटो ने चीन को अंतराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। इस सम्मलेन में नाटो में शामिल देशो द्वारा चीन की ओर से संभावित खतरों और उनसे निपटने के लिए रणनीतियों पर चर्चा की गयी। चीन द्वारा उठाये जा रहे कदमो से अंतराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा के लिए और भी बड़ी चुनौती सामने आ गयी है। चीन लगातार अपने हथियारों का आधुनिकीकरण कर रहा है और नए नए खतरनाक हथियारों का अनियंत्रित ढंग से परिक्षण कर रहा है। इसके अलावा चीन मनमाने ढंग से इन हथियारों का प्रयोग भी कर रहा है जिसके कारण नाटो के देशो के लिए चीन बड़ा खतरा बन गया है और चीन की हरकतों को नियंत्रित करने के लिए नाटो के सदस्य देशो ने इस सम्मलेन में चर्चा की। चीन लगातार विश्व शांति व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है और लगातार परमाणु मिसाइल्स का परिक्षण कर रहा है। चीन के द्वारा इस तरह के कदम और उसका मुखर व्यवहार अंतराष्ट्रीय नियमो और अंतराष्ट्रीय गठबंधन व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गए है। नाटो सम्मलेन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि सभी देशो को मिलकर चीन  के खिलाफ आवाज़ उठानी होगी। इसके अलावा उन्होने कहा कि अंतराष्ट्रीय प्रणाली को बनाये रखने और जिम्मेदारी से कार्य करने के लिए सभी देशो को एकजुट होना होगा और चीन जैसे देश पर लगाम लगाए जाने की जरुरत है ताकि अनतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को शांति से बहाल रखा जा सके।

राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जी7 सम्मलेन के दौरान भी कहा कि चीन में कई तरह के गंभीर मामले सामने है जिनको सुधर करने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि चीन में जबरन श्रम प्रथा, उइगर मुस्लिमो पर अत्याचार और अन्य समूहों के प्रति मानवाधिकार के मामले सामने है। नाटो का मुख्यालय बेल्जियम के ब्रुसेल्स में है जिसकी विज्ञप्ति में कहा गया कि नाटो देश अंतराष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मिलकर चीन का सामना करेंगे। सभी देश चीन से निपटने के लिए सामूहिक सुरक्षा सिद्धांत पर कार्य करेंगे। इस बार हुए नाटो सम्मलेन में इस बात चर्चा की गयी कि सभी देश भविष्य में आने वाली चुनोतियो का सामना करने के लिए कितने तैयार है। इससे पहले नाटो के लिए कुछ प्राथमिकताएं जारी की गयी थी। जिसमे बताया गया था कि नाटो सैन्य रूप से मजबूती को सुनिश्चित करेगा, राजनितिक सुदृढ़ता को मजबूत करेगा और एक वैश्विक दृष्टिकोण पर कार्य करेगा।

हालाँकि नाटो की कार्यसूची में भारत शामिल नहीं है लेकिन नाटो के लिए भारत चीन से निपटने के लिए सबसे मददगार साबित होगा, क्योकि अमेरिका जैसा बड़ा देश और अन्य सभी देश जो नाटो के सदस्य है ने चीन को वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है जिससे इसका भारत की विदेश निति और रक्षा निति पर भी असर पड़ेगा। भारत एशिया महाद्वीप में अकेला ऐसा देश है जो चीन को खुले आम चुनौती दे सकता है जिससे नाटो को भी भारत की मदद से चीन पर नियंत्रण लगाने में आसानी होगी। चीन वैश्विक स्तर पर कई बड़ी चुनौतियां पेश कर रहा है। चीन  वैश्विक स्तर पर अपनी प्रभुता को बढ़ा रहा है, चीन लगातार अपने पड़ोसी देशो की भूमि को अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रहा और सभी पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, चीन क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा रहा है, आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, साइबर हमलो को प्रोत्साहित कर रहा है और इसके अलावा चीन जलवायु परिवर्तन और कोरोना महामारी के लिए भी बड़ी चुनौतियां पेश कर रहा है। चीन पर लगाम लगाने के लिए सभी देशो को एकजुट होने की आवश्यकता है। नाटो देशो को बढ़ते हुए खतरे को देखते हुए रणनीति में बदलाव करने की आवश्यकता है।

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