July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

खबर, संवाद और साहित्य

आखिर हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था में कौनसी कमिया है जिनको हमे दूर करने की आवश्यकता है?

किसी भी देश के विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका शिक्षा की होती है। जिस देश की शिक्षा व्यवस्था  मजबूत होती है उस देश का विकास भी बहुत जल्दी होता है। दुनिया के कई देश बहुत ही ज्यादा विकसित है क्योकि उनकी शिक्षा व्यवस्था  हमारे देश कई  ज्यादा बेहतर है और वे शिक्षा के द्वारा नए अविष्कारों और खोजो को ज्यादा महत्तव देते है। ऐसे में जब बात हमारे देश भारत की आती है तो हमारी शिक्षा व्यवस्था के बारे में हमे कई बुरी बाते सुनने को मिलती है। ज्यादातर लोग हमारी शिक्षा व्यवस्था  को लेकर शिकायत क्यों करते रहते है ? आखरी हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था  में कौनसी कमिया है और इन कमियों को सुधारने के लिए हमे क्या करना चाहिए ?

साल 2020 में भारत में नयी शिक्षा निति को पेश किया। इस शिक्षा निति के बारे में पीछे 30 सालो से केवल चर्चा की जा रही थी आखिर अब यह शिक्षा निति देश में लागु होने जा रही है। हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था की बात की जाये तो भारत में हमारी शिक्षा व्यवस्था सभी को एक ही दौड़ में दौड़ना सिखाती है जिसमे जितने वाले मिलता भी कुछ नहीं लेकिन वह इसी बात में खुश रहता है कि वह हारने वाले से आगे है। यानि हमारे देश में ज्यादातर लोग दूसरे को देखकर उसके जैसा बनने की कोशिश करते है और खुद की तुलना दुसरो से करने में ही समय गवा देते है जिससे न तो वे किसी चीज़ के काबिल बनते है और न ही वे कुछ सीख पाते है। इसके अलावा भारत में कुछ लोग बहुत काबिल होते है वे बेहतर अवसरों के लिए देश छोड़ कर देश से बाहर चले जाते है जिसके कारण देश के विकास में योगदान देने वाले लोगो की कमी के चलते देश के विकास में बाधाएं आती है। इसके अलावा स्कूल के समय से ही बच्चो को यह सिखाया जाता है कि जो किताब में लिखा है वही सही है और परीक्षा को पास करने के लिए वही लिखना होगा। जिससे बच्चो का लक्ष्य केवल परीक्षा को पास करना है बन जाता है और वे कुछ भी नया नहीं सीख पाते है। वे केवल परीक्षा को पास करने के लिए दौड़ लगाते और उन्हें यही सिखाया जाता है कि जो ज्यादा नंबर लाएगा वही कामयाब होगा। इसी सोच के कारण देश में बच्चे केवल किसी भी क्लास की परीक्षा को पास करने की तैयारी में जुट जाते है और उन्हें कुछ भी सिखने से कोई मतलब नहीं होता।

हमारी शिक्षा व्यवस्था यह नहीं सिखाती कि आप में कितना ज्ञान है बल्कि यह सिखाती है कि आप एक तोते की तरह किस तरह से चीज़ो को रट सकते हो। जिसका नतीजा आज हमारे सामने है क्योकि देश में हुई एक रिसर्च में पाया गया कि हमारे देश के 80 प्रतिशत इंजीनियर बेरोजगार है क्योकि उनमे ऐसी कोई स्किल नहीं है जो किसी भी इंडस्ट्रीज के लिए आवश्यक है। ऐसे ही अन्य क्षेत्रो में भी हमारे देश में यही हाल है क्योकि हमारे देश के ज्यादातर युवाओ में ऐसी कोई काबिलियत नहीं जिससे वे देश में विकास में अपना योगदान दे सके। अब भारत सरकार देश में नयी शिक्षा निति को पेश करने जा रही है जो बहुत ही प्रभावी और कारगर लग रही है। इससे यह हो सकता है कि आने वाली पीढ़ी के लिए यह परेशानी खत्म हो जाये और आने वाली पीढ़ी को इसका अच्छा फायदा भी मिले। लेकिन फिर भी यह आवश्यक कि छात्र और माता-पिता ज्ञान जो ज्यादा महत्व दे न कि मार्क्स को। भारत में नयी शिक्षा निति के साथ ही स्कूलों के पाठ्यक्रम में सामान्य कार्यो को करने के लिए भी जिन तरीको की आवश्यकता होती है उन्हें बच्चो को शुरू से ही सीखना चाहिए। पाठ्यक्रम को ऐसा बनाना होगा कि स्कूल के समय से ही बच्चो के पसंदीदा विषयो और रूचि पर खास ध्यान दिया जाये जिससे बच्चे स्कूल के समय से ही नयी चीज़ो को सीख सके। यानि हमारी शिक्षा व्यवस्था में सच में बदलाव करने की आवश्यकता है ताकि देश का विकास तेजी से किया जा सके।

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