July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

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केंद्र सरकार ने बनाया नया सहकारिता मंत्रालय, जानिए इस मंत्रालय की आवश्यकता और कार्य

भारतीय सरकार ने हाल ही में नए सहकारिता मंत्रालय का गठन किया है। इससे पहले यह मंत्रालय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आता था लेकिन अब इसे सरकार द्वारा अलग मंत्रालय बना दिया गया है। इस मत्रालय का कार्यभार गृह मंत्री अमित को दिया गया है। इस मंत्रालय का उद्देश्य है सहकारिता के माध्यम से देश में समृद्धि लाना। इसका दृष्टिकोण है ‘सहकार से समृद्धि’। देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए इस मंत्रालय को बनाया गया है। आखिर इस अलग मंत्रालय की आवश्यकता क्यों पड़ी ? इसके जवाब में कहा जा रहा है कि देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए एक अलग प्रशासनिक, क़ानूनी और नीतिगत ढांचा उपलब्ध कराया जायेगा। इस नए मंत्रालय के द्वारा सहकारी समितियों का जमीनी स्तर तक विस्तार किया जायेगा। इसके अलावा यह मंत्रालय सहकारी समितियों के लिए ‘इज ऑफ़ डूइंग बिजनेस’ प्रक्रियाओं को कारगर बनाने और बहु-राज्य सहकारी समितियों के विकास के लिए काम करेगा। आखिर एक सवाल यह भी आता है कि सहकारिता से क्या अभिप्राय है ? सहकारिता का मतलब होता है साथ मिलकर काम करना। यानि साथ मिलकर व्यापार करना सहकारिता कहलाता है। सहकारिता के अंतर्गत कृषि, दूध या लघु और कुटीर उद्योग आदि को एक साथ शामिल किया जाता है। इसमें आपसी हितो को ध्यान में रखते हुए कुछ लोग स्वेच्छिक रूप से एक समिति का निर्माण करते है इसे सहकारी समिति कहा जाता है। इस सहकारी समिति में लोग अपनी इच्छा से आ भी सकते है और इसे अपनी इच्छानुसार छोड़ भी सकते है।

सहकारी समिति के निर्माण से इसमें शामिल लोगो को लाभ मिलता है और इसमें बिचोलियो द्वारा शोषण नहीं होता है, जिससे छोटे व्यापारी आसानी से व्यापार कर सकते है। अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार सहकारी समिति सहकारी व्यक्तियो का एक स्वायत्त संघ होती है। अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन अंतराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन के साथ मिलकर कर करता है। इसके अंतर्गत कई समितियां आती है। हाल ही में 3 जुलाई 2021 को अंतराष्ट्रीय सहकार दिवस मनाया गया लेकिन यह हर साल इसी दिनांक को नहीं मनाया जाता है। साल 2012 को संयुक्त राष्ट्र ने अंतराष्ट्रीय सहकार वर्ष के रूप में घोषित किया था। अगर भारत की बात की जाये तो 1929 से भारत में भारतीय राष्ट्रिय सहकारी संघ कार्य कर रहा है। यह देश में सहकारी आंदोलन का प्रनिधित्व करने वाला शीर्ष संघटन है। जब इसकी स्थापना की गयी थी तब इसका नाम भारतीय राष्ट्रिय सहकारी संघ के स्थान पर इंडियन प्रोविशनल कोऑपरेटिव बैंक एसोसिएशन था। लेकिन 1961 में इसका नाम बदलकर भारतीय राष्ट्रिय सहकारी संघ कर दिया गया।

तब से यह संघ देश में सहकारी आंदोलन का पथ प्रदर्शक का कार्य कर रहा है। कुछ समय से यह सहकारी आंदोलन को प्रभावित करने वाले उभरते मुद्दों पर प्रकाश डालने के लिए अपने कार्यो का विस्तार कर रहा है। सहकारी समितियों संबंधित विधि का संशोधन करने के लिए सहकारी समिति अधिनियम 1912बनाया गया। इसे अधिनियम 1904 में संशोधन करके बनाया गया था। इस अधिनियम में सहकारी समितियों से संबंधित सभी प्रावधानों को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत कोई भी व्यक्ति सहकारी समिति का निर्माण कर सकता है लेकिन इसमें कम से कम दस व्यक्तियो का शामिल होना आवश्यक है और सभी की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। भारत सरकार द्वारा अलग सहकारी मंत्रालय के गठन से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के प्रभाव हो सकते है। विशेषज्ञों के अनुसार नए सहकारी क्षेत्र बढ़ रहे है  इसलिए उन पर सही तरीके से ध्यान देने के लिए अलग से सहकारी मंत्रालय की आवश्यकता है। इसके अलावा इनका काम भी सुचारु रूप से हो सकेगा साथ ही अलग मंत्रालय के गठन से सहकारिता पर अलग तरह से ध्यान दिया जा सकेगा। अगर नकारात्मक पहलुओं की बात की जाये तो महामारी के दौर और आर्थिक संकट की स्थिति में नया मंत्रालय बनाया जाना उचित नहीं लगता है क्योकि इसके लिए अधिक धन की आवश्कयता होगी।

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