July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

खबर, संवाद और साहित्य

जानिए कोरोना महामारी के लिए भारत की वैक्सीन कितनी प्रभावी है ?

कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने भारत को हर तरह से कमजोर कर दिया और दूसरी लहर ने भारत में लाखो लोगो की जान ले ली। दूसरी लहर ने भारत में सबसे ज्यादा तबाही मचाई और भारत की चिकित्सा व्यवस्था की कड़ी परीक्षा ली। लेकिन अब भारत ने भी स्वदेशी कोरोना वैक्सीन के उत्पादन को बढ़ा दिया है और देश अब कोरोना की दूसरी लहर कम हो गयी है। अब भारत का लक्ष्य देश के हर वर्ग के लोगो को वैक्सीन लगाना है ताकि देश को कोरोना की तीसरी लहर से न गुजरना पड़े। भारत में अब तक देखा जाये तो तीन करोड़ से भी ज्यादा लोगो को कोरोना ने अपनी चपेट में लिया है, इनमे से कोरोना से ठीक होने वाले लोगो की संख्या लगभग 2 करोड़ 96 लाख है। अगर कोरोना से जान गवाने वाले लोगो की बात की जाये तो चार लाख से ज्यादा लोगो की कोरोना महामारी के कारण जान चली गयी। जो पूरी दुनिया की बात की जाये तो बहुत ही बड़ा आंकड़ा है। ऐसे में दुनिया के विकसित देशो ने अपने ज्यादातर लोगो को कोरोना वैक्सीन लगा दी है लेकिन भारत कोरोना वैक्सीन लगाने के मामले में उनसे बहुत ज्यादा पीछे है। भारत में अब तक लगभग 34 करोड़ से ज्यादा लोगो को कोरोना वैक्सीन लगायी जा चुकी है। ऐसे में देश जनसँख्या अधिक होने और वैक्सीन का आवश्यक उत्पादन नहीं होने के कारण देश में कोरोना वैक्सीन की कमी होने लगी, जिसके कारण देश में वैक्सीन लगाने का काम बहुत ही धीमे हो गया है। लेकिन अब भारत ने कोरोना की दूसरी लहर से सामना करने के बाद देश में स्वदेशी वैक्सीन और अन्य कंपनियों द्वारा बनायीं गयी वैक्सीन के उत्पादन को बढ़ा दिया है।

भारत में बनी स्वदेशी वैक्सीन में भारत बायोटेक की कोवेक्सिन है जिसके उत्पादन अब तेजी से किया जा रहा है। लेकिन आखिर भारत की वैक्सीन कोरोना को रोकने में कितनी प्रभावी है यह जानना भी बहुत आवश्यक है। इसके लिए भारत बायोटेक ने कोवेक्सिन की प्रभाविकता को जांचने के लिए परीक्षण कराया है, जिसमे 18 वर्ष से लेकर 98 वर्ष तक के लगभग 25 हजार लोगो को शामिल किया गया। इस परीक्षण में पाया कि कोवेक्सिन कोरोना के लक्षणों के प्रति 80 प्रतिशत तक प्रभावशाली है। इसके अलावा दूसरी लहर में सामने आये कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के प्रति यह 65 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान करती है। आखिर भारतीय कोवेक्सिन अन्य विदेशी वैक्सीन जैसे कोवीशील्ड और स्पुतनिक वी के मुकाबले कितनी प्रभावी है। इसके लिए तीनो वैक्सीन के मध्य आंकड़ों के अनुसार अंतर दिया गया है।

ऑक्सफ़ोर्ड – अस्ट्रज़ेनेका की कोवीशील्ड : कोरोना की इस वैक्सीन को ब्रिटेन की ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और अस्ट्रज़ेनेका ने मिलकर बनाया है। भारत में इस वैक्सीन का उत्पादन पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट द्वारा किया जा रहा है। यह वैक्सीन वायरल वेक्टर प्लेटफार्म के ऊपर बनाई गयी है जिसमे वायरस के कमजोर संस्करण का उपयोग करके बनाया गया है। यह कोरोना वायरस को रोकने में लगभग 76 प्रतिशत तक प्रभावी है। इसके पहले डोज़ के बाद दूसरा डोज़ 12 से 16 हफ्तों के भीतर लगाया जाता है।

स्पुतनिक वी : यह वैक्सीन रूस के गमालिया नेशनल इंस्टिट्यूट द्वारा बनाई गयी है जो मॉस्को में स्थित है। यह वैक्सीन भी वायरल वेक्टर प्लेटफार्म पर बनाई गयी है इस वैक्सीन को भी दो डोज़ में लगाया जाता है जो 21 दिनों के अंतराल के बाद लगायी जाती है। अगर इस कोरोना वायरस के प्रति प्रभाविकता की बात की जाये तो तीन चरणों के परीक्षण के बाद यह पाया गया कि यह कोरोना वायरस के प्रति 91 प्रतिशत तक सुरक्षा देती है।

भारत बायोटेक की कोवेक्सिन : यह भारत में बनी हुई स्वदेशी कोरोना वैक्सीन है जिसको भारत के हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक के द्वारा बनाया गया है। इस वैक्सीन के निर्माण में मृत कोरोना वायरस के स्ट्रेन का उपयोग किया गया है जो अन्य वायरस पैदा नहीं कर सकता है। जब इसे किसी व्यक्ति के शरीर में डाला जाता है तो यह जैसे ही शरीर में प्रतिक्रिया शुरू करता है तो शरीर इससे लड़ने के लिए एंटीबॉडी तैयार करने लगता है जो हमे असली कोरोना वायरस से लड़ने में सहायक होती है। इस की प्रभाविकता की बात की जाये तो यह भी कोवी शील्ड के लगभग समान यानि 80 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान करती है।इसके पहले डोज़ को लगाने के 28 दिन बाद दूसरा डोज़ लगाया जाता है। फ़िलहाल भारत अब इसके उत्पादन को तेजी से बढ़ा रहा है ताकि देश के सभी लोगो को कोरोना वैक्सीन लगायी जा सके।

%d bloggers like this: