September 26, 2021

वृतांत – Vritaant

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बारिश के मौसम में लोगो को घूमने के लिए खूब भाता है जयपुर का आमेर का किला

राजस्थान की राजधानी जयपुर देश भर में ही नहीं बल्कि पुरे विश्व भर में पर्यटन के लिए प्रसिद्द है। जयपुर में पर्यटन की दृष्टि से सबसे ज्यादा लोकप्रिय यहाँ स्थित आमेर का किला है। यह आमेर का किला लाल पत्थरो और मार्बल से बना हुआ है। आमेर का किला जयपुर का सबसे बड़ा पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र है। राजपूत राजाओ द्वारा बनवाया गया यह किला मुगलो के द्वारा बनवाये गए महलो से मिलता है। यदि आप जयपुर घूमने आते है और आपने आमेर का किला नहीं देखा, तो मतलब आप ने कुछ नहीं देखा। आमेर का किला अपनी बनावट, कला और विशाल क्षेत्र में फैले होने के कारण भी बहुत ही लोकप्रिय है। आमेर के किले को बनने में 157 साल का समय लगा था। इस किले की अनेको विशेषताएं है जो इसे बहुत ही खास बनाती है और यह पर्यटकों को खूब भाता है। यह किला जयपुर में पहाड़ी पर स्थित है और इतने सालो बाद भी बहुत ही मजबूत और आकर्षक है। इस किले की विशेषताओं के बारे में बात करे तो सबसे पहले आता है इसका मुख्य द्वार, जिसे सिंह पोल के नाम से जाना जाता है। किले का मुख्य द्वार बहुत ही विशाल और आकर्षक है। इस किले में एक बहुत ही विशाल स्वागत ढोल भी रखा गया है। ऐसा कहा जाता है कि पुराने ज़माने जब भी किले में कोई विशेष अतिथि आता था तो उनके स्वागत में यह ढोल बजाया जाता था। आज भी आमेर के किले में यह ढोल रखा हुआ है।

आमेर के किले की अन्य विशेषताओं के बारे में बात करे तो इसमें सबसे पहले आता है दीवान-ए- आम। यह किले का वह स्थान है जहा पर जयपुर के राजा बैठकर अपनी जनता की शिकायतों को सुनना और उनका निवारण करने का काम करते थे। इसमें सबसे खास है इस महल के खम्बे। दीवान-ए-आम में कुल 48 खम्बे है जिसमे 16 खम्बे मार्बल के बने है और और 32 खम्बे लाल पत्थरो से बने है। इसमें हमे हिन्दू और मुस्लिम संस्कृति का मिश्रण देखने को मिलता है। इन खम्बो के ऊपर हाथी की आकृतिया बनी है जो हिन्दू संस्कृति को दर्शाती है और खम्बो के निचे कमल की आकृतिया बनी हुई है जो मुस्लिम संस्कृति को दर्शाती है। इसके बाद आता है शीशमहल जो आमेर के किले में रहने वाली रानियों के बनाया गया था। इस महल के दरवाजे पर भगवान गणेश की तस्वीर भी है। इस महल में तीन खिड़किया भी है जहा से रानियां जंग के बाद राजा का स्वागत करती थी।

आमेर किले की अन्य विशेषता है केसर की खेती। 17वी शताब्दी में राजा जय सिंह ने आमेर के किले में केसर की खेती की शुरुवात की लेकिन वे नाकामयाब रहे क्योकि केसर की खेती के लिए ठंडा वातावरण चाहिए जबकि जयपुर का वातावरण गरम है। इस किले में आज भी पानी गरम करने वाला गीजर मौजूद है जिससे राजा और रानियों के लिए पानी गरम किया जाता था। इसमें बिलकुल ही अलग तरीके का प्रयोग किया जाता था जिसमे लकड़ियों का इस्तेमाल होता था। इसमें लकड़ियों को जलाकर पुरे टैंक का पानी गरम किया जा सकता था। आमेर के किले में कई जगहों पर सोने के पानी से रंग किया गया है। यह रंग आज भी इतना चमकीला और आकर्षक है कि जब भी इस पर प्रकाश पड़ता है तो यह सोने की पोलिश की तरह चमकता है।  इसके बाद आता है दीवान-ए-खास, जिस तरह दीवान-ए-आम को आम जनता के लिए बनाया गया था उसी तरह दीवान-ए-खास को खास अतिथियों के बनाया गया था। इस महल में दीवारों और छतो पर शीशे से कलाकारी की हुई है जो बेल्जियम से मंगवाए गए थे। इस महल को विंटर पैलेस के नाम से भी जाना जाता है क्योकि सर्दियों में यह महल गरमाहट देने के लिहाज से बने गया था। इसमें चारो तरफ  इतने शीशे लगाए गए है कि प्रकाश की एक किरण भी एक हजारो सितारों की तरह चमकती है।

इस किले का सबसे पुराण हिस्सा है मानसिंह महल, जो राजा मानसिंह द्वारा बनवाया गया था। आमेर के किले के इस हिस्से को बनने में 25 साल लगे थे। इस किले में कई गुप्त दरवाजे भी है जो दुश्मनो से के हमले से छिपने के लिहाज से बनवाये गए थे। आज भी यह किला देखने में बहुत ही आधुनिक लगता है। यहाँ पर आज भी इतिहास जीवित है जिसे यहाँ पर घूमने आने वाले पर्यटक महसूस कर सकते है। बारिश के मौसम यहाँ पर आने वाले पर्यटकों की संख्या और भी बढ़ जाती है। यहाँ राज हजारो पर्यटक आते है और इस किले का आनंद लेते है। बारिश के मौसम में यहाँ पहाड़ो पर हरियाली खिल जाती है और किले के सरोवर में पानी आ जाता है जिससे किला और भी खूबसूरत लगता है। जयपुर घूमने की योजना में सबसे पहले आमेर किले को ही शामिल किया जाता है।

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