July 29, 2021

वृतांत – Vritaant

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जानिए पेगसस वायरस क्या है और कैसे सरकार इसके जरिये हमारी जासूसी कर सकती है ?

अगर आपको पता चले कि आप अपने मोबाइल पर क्या सर्च कर रहे है, किससे बाते कर रहे है और कैसे मेसेज भेज रहे है इन सब पर सरकार नजर रख रही है तो यह सुनकर आप हैरान हो जायेंगे। लेकिन ऐसा होना सम्भव है क्योकि पेगसस वायरस एक ऐसा कंप्यूटर वायरस है जो ऐसा कर सकता है। यह कोई आम कंप्यूटर वायरस नहीं है जो किसी लिंक पर क्लिक करने से आपके फ़ोन आ सकता है। यह वायरस आपके फ़ोन एक आई मेसेज या वीडियो कॉल के जरिए डाला जा सकता है। इसके बाद यह उस मेसेज या वीडियो कॉल का नोटिफिकेशन भी डिलीट कर सकता है। इसके अलावा यह आपका कैमरा ऑन करके आपको देख सकता हैऔर आपके माइक को ऑन करके आपकी बाते सुन सकता है। यह सब सुनकर आप सोचने पर मजबूर हो सकते है कि क्या सच में ऐसा सम्भव है? लेकिन आंकड़ों के हिसाब से देखा जाये तो पूरी दुनिया में लगभग 50 हजार लोगो के साथ ऐसा हुआ है। कुछ दिनों पहले एमनेस्टी इंटरनेशनल एंड फॉरबिडेन स्टोरीज ने एक जाँच के तहत यह दावा किया कि पेगसस नाम के एक कंप्यूटर वायरस का इस्तेमाल पत्रकारों, कार्यकर्ताओ और यहाँ तक कि राजनेताओ पर भी हुआ है। दुनिया के इन 50 हजार लोगो में 300 लोग भारतीय है। आखिर यह पेगसस वायरस क्या है और यह किस तरह से हमारी जासूसी कर सकता है ?

दुनिया के सबसे खतरनाक और मोस्ट वांटेड लोगो में ओसामा बिन लादेन के बाद एल चाको मोस्ट वांटेड अपराधियों में से एक था। मैक्सिको प्रशासन ने दावा किया कि एल चाको को पकडने के लिए उन्होंने पेगसस वायरस का इस्तेमाल किया था। यह पेगसस वायरस इजराइल की एनएसओ नाम की कम्पनी के द्वारा बनाया गया कंप्यूटर वायरस है। एनएसओ केवल देख की सरकारों को ही अपना यह वायरस बेचती है। लेकिन जब सरकार किसी भी देश की सरकार इस वायरस का इस्तेमाल अपराधियों पर नजर न रखने के स्थान पर पत्रकारों पर नजर रखने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है तब यह बड़ी परेशानिया खड़ी हो जाती है। कई देशो से ऐसे मामले सामने आये है जहा पर उन देशो की सरकारों ने इस वायरस का इस्तेमाल समाजिक कार्यकर्ताओ और पत्रकारों पर नजर रखने के लिए किया गया। भारत में भी इस मामले को लेकर बहुत बवाल है क्योकि जिन 300 लोगो पर इस वायरस का इस्तेमाल किया गया उनमे भारत के बड़े राजनेताओ के भी नाम है। 17 न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स ने यह इसके लिए अपने स्तर पर भी जाँच भी की है और वे सभी एक ही निष्कर्ष पर पहुंचे है। कई बड़े समाचार पत्रों में एक जैसी ही बात बोली गयी है और ऐसी खबरों को पढ़कर हर कोई डर सकता है।

भारत के पास भी पेगसस वायरस है लेकिन क्या भारत भी खुद के लोगो पर इस वायरस का इस्तमाल कर रहा है। कुछ एनालिसिस के आधार पर यह कहा जा रहा है कि अन्य देशो के मुकाबले भारत ही खुद के लोगो पर नजर रख रहा है। यह इसलिए भी माना जा रहा है कि भारत के बड़े राजनेताओ, उद्योग पतियों, वकीलों और कई बड़े कार्यकर्ताओ के नाम एक ही सूचि में आता है तो यह हो सकता है कि भारत सरकार ही यह सब कर रही हो। लेकिन आज के समय में हम एक दुनिया में रहते है जहा पर केवल हमारी सरकार ही नहीं बल्कि दूसरी कोई सरकार भी ऐसा कर सकती है। लेकिन इन सब आंकड़ों के बाद किसी भी प्राइवेसी को खतरा हो सकता है। लेकिन एनएसओ के अनुसार वह हर साल 5000 ऑपरेशन करता है लेकिन इस लिस्ट में 50 हजार नाम है। पेगसस ऐसा सॉफ्टवेयर नहीं है जिसको बार बार अलग अलग डिवाइस में इस्तेमाल किया जा सके। यह एक डिवाइस के हिसाब से बेचा जाता है और इसकी कीमत भी बहुत ही ज्यादा होती है। एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 में 10 आईफोन पर नजर रखने के लिए एनएसओ ने 6, 50, 000 डॉलर लिए और पेगसस के इनस्टॉल के लिए अलग से 5,00,000 डॉलर भी एनएसओ द्वारा लिए गए। इन 50 हजार लोगो के हिसाब से एनएसओ ने लगभग 57 बिलियन डॉलर कमाए है। लेकिन सवाल यह आता है कि क्या भारत के पास सच में पेगसस वायरस है ? इसका  जवाब यह है कि भारत ने यह स्वीकार नहीं किया है जिस तरह मैक्सिको ने किया था। ऐसा सम्भव है कि भारत सरकार इस वायरस का इस्तेमाल लोगो पर नजर रखने के लिए कर सकती है। लेकिन इस बात के कोई पर्याप्त सबूत नहीं है कि भारत सरकार लोगो पर इस वायरस की मदद से लोगो पर नजर रखती है। किसी भी तरह से लोगो की प्राइवेसी को  खतरे में डालना और नजर रखना यह बिलकुल भी सही नहीं चाहे वह भी सरकार द्वारा ही किया जाये। इस तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल केवल आपराधिक कार्य करने वाले लोगो पर ही किया जाना चाहिए।

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